थ्री-डी प्रिंटर की मदद से बने जबड़े का प्रतिरोपण

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption डॉक्टरों का कहना है कि आने वाले वर्षों में थ्री-डी प्रिंटर तकनीक आम हो जाएगी

थ्री-डी प्रिंटर की मदद से जबड़े का निचला हिस्सा बनाकर एक महिला के चेहरे पर लगाने में क़ामयाबी मिली है जिसके बारे में डॉक्टरों का कहना है कि ये अपनी तरह का पहला मामला है.

जबड़े का ये प्रतिरोपण नीदरलैंड में बीते साल किया गया लेकिन इसकी जानकारी अब प्रकाशित की गई है.

इस जबड़े को टाइटेनियम पाउडर को तपाकर बनाया गया है. इसे बनाने के लिए लेजर का भी इस्तेमाल किया गया.

तकनीक के जानकारों का कहना है कि इस ऑपरेशन की सफलता से थ्री-डी प्रिंटर की मदद से ज़्यादा से ज़्यादा मरीजों के लिए ख़ास तरह के अंग या हिस्से बनाए जा सकेंगे.

जटिल काम

बेल्जियम में हसेल्ट यूनिवर्सिटी स्थित बायोमेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने इस बारे में शोध किया और लेयरवाइज़ नामक एक मेटल-पार्ट्स निर्माता ने इस जबड़े को तैयार किया.

जिस महिला को ये जबड़ा लगाया गया, वो लंबे समय से अस्थि संक्रमण से पीड़ित था. डॉक्टरों का मानना है कि इस महिला की उम्र बहुत ज़्यादा होने की वजह से सर्जरी करना आसान नहीं था, इसलिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया.

जबड़े के जिस हिस्से का प्रतिरोपण किया गया, वो बड़ा जटिल था जिसमें गांठदार जोड़ और मांसपेशियों के साथ जुड़ाव के लिए केविटी तथा नलिकाएं थीं.

लेकिन एक बार इसकी डिज़ाइन तैयार होने के बाद इसका प्रिंट तैयार करने में ज़्यादा वक्त नहीं लगा.

लेयरवाइज़ के एक इंजीनियर रुबेन ने बीबीसी को बताया, ''जबड़े का थ्री-डी डिज़ाइन मिलने के बाद वो अपने आप टू-डी परतों में बंट गया और इसके बाद हमने उन क्रॉस सेक्शंस को प्रिंटिंग मशीन पर भेज दिया.''

उन्होंने बताया, ''जबड़े का हिस्सा बनाने के लिए टाइटेनियम पाउडर की परतों को महीन किया गया, इसके लिए लेजर बीम का इस्तेमाल किया गया.''

चार घंटे में सर्जरी

हर परत के साथ ऐसा ही किया गया. एक मिलीमीटर ऊंचा हिस्सा बनाने के लिए इस तरह की 33 परतों की ज़रूरत पड़ी. इस तरह अनुमान लगाया जा सकता है कि इस जबड़े को बनाने के लिए कितनी परतें लगी होंगी.

ये प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस हिस्से पर बायोक्रोमिक कोटिंग की गई. सर्जरी करने वाली टीम का कहना है कि बुज़ुर्ग महिला के चेहरे पर इस जबड़े के प्रतिरोपण में चार घंटे लगे.

उनका कहना है कि परम्परागत तरीके से इस तरह की सर्जरी करने में कहीं ज़्यादा वक्त लगता है.

सर्जरी के बाद होश में आने पर इस महिला ने चंद शब्द भी बोले और एक दिन के बाद मरीज इस लायक हो गया कि भोजन को निगल सके.

सर्जरी के चार घंटे के बाद ही महिला को अपने घर जाने की मंज़ूरी मिल गई थी. उसके इस नए जबड़े का वज़न 107 ग्राम है.

डॉक्टरों का कहना है कि आने वाले वर्षों में ये तकनीक आम हो जाएगी.

संबंधित समाचार