सुंदर दिखिए लेकिन ख़तरों से सावधान!

  • 16 फरवरी 2012
इमेज कॉपीरइट SPL
Image caption एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के मुताबिक कॉस्मेटिक सर्जरी के मामले में 2010 में भारत का दुनिया में चौथा स्थान था.

नई दिल्ली में रहने वाली 60-वर्षीय विन्नी सिंह ने कुछ दिनों पहले कॉस्मेटिक सर्जरी के ज़रिए फ़ेस लिफ़्ट कराया है जो चेहरे की झुर्रियां हटाने के लिए किया जाता है. इससे पहले 45-साल की उम्र में उन्होंने पेट के इर्द-गिर्द चर्बी कम करने के लिए लाइपोसक्शन करवाया था.

ज़ाहिर है कि इसके पीछे विन्नी की चाहत पहले से बेहतर दिखना और अपनी सुंदरता बरक़रार रखना ही होगी.

उन्होंने बीबीसी को बताया, “हां, हो सकता है कि ये फ़ैसला करते समय मेरे अवचेतन में ज़रूर कहीं-न-कहीं ये बात रही होगी कि मैं सुंदर दिखना चाहती हूं, मेरी झुर्रियां न दिखें और लोग कहें कि मैं सुंदर हूं.”

पहले से बेहतर दिखने का फ़ैसला भले ही भावनात्मक था लेकिन इस फ़ैसले के लिए विन्नी सिंह ने दिल से ज़्यादा दिमाग़ की बात सुनी.

वे कहती हैं कि उन्होंने इंटरनेट पर कॉस्मेटिक सर्जरी के बारे में काफ़ी छान-बीन करने और फिर एक प्रशिक्षित कॉस्मेटिक सर्जन से इसके फ़ायदे और नुकसान का पता करने के बाद ये फ़ैसला लिया.

लेकिन किसी भी दूसरे ऑपरेशन की ही तरह कॉस्मेटिक सर्जरी में भी ख़तरा होता है जिसके बारे में या तो लोगों को पता नहीं होता या फिर अक्सर सुंदर दिखने की चाह में वे इन्हें अनदेखा कर देते हैं.

दिसंबर 2011 में फ्रांस और ब्रिटेन में दोषपूर्ण ब्रेस्ट इमप्लांट या स्तन प्रतिरोपण का मामला सामने आया जिससे हज़ारों महिलाएं प्रभावित हुईं. इसके पीछे ग़ैर-चिकित्सीय श्रेणी के सिलिकॉन वाले इमप्लांट का इस्तेमाल था जिसे पीआईपी नाम की फ़्रांस की एक कंपनी ने बनाया था.

भारत में बढ़ता चलन

बात अगर भारत की करें, तो इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ़ ऐस्थेटिक प्लास्टिक सर्जरी नाम की संस्था के एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में पाया गया कि कॉस्मेटिक सर्जरी के मामले में वर्ष 2010 में भारत 894,700 सर्जिकल और नॉन-सर्जिकल प्रक्रियाओं के साथ दुनिया में चौथे स्थान पर था.

डॉक्टरों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में ये चलन और भी बढ़ेगा. तो भारत पीआईपी जैसे घोटालों से निपटने के लिए कितना तैयार है? क्या ऑपरेशन बिगड़ने की हालत में मरीज़ों के पास कोई क़ानूनी विकल्प है?

नई दिल्ली के अपोलो अस्पताल में सीनियर कॉस्मेटिक सर्जन डा. अनूप धीर कहते हैं, “भारत में कॉस्मेटिक सर्जरी के केस बिगड़ने का एक बड़ा कारण ये है कि अप्रशिक्षित लोग या डॉक्टर प्लास्टिक या कॉस्मेटिक सर्जरी कर रहे हैं. ऐसे में ऑपरेशन में कई जटिलताएं पैदा हो सकती हैं. दूसरा, कॉस्मेटिक सर्जरी में मरीज़ का चुनाव बहुत ध्यान से करना पड़ता है. ऐसे व्यक्ति को चुनना चाहिए जिसे उससे लाभ मिलेगा और वो ख़ुश रहेगा. अगर मरीज़ को अपने आप में सबकुछ ग़लत या ख़राब लगता है, ऐसे लोगों की सर्जरी नहीं करना ही बेहतर होता है.”

सुंदर या पहले से बेहतर दिखने की चाह के कारणों के बारे में डा.धीर कहते हैं, “वैसे तो भारत में आज की तारीख में आधे से अधिक लोगों के कॉस्मेटिक सर्जरी कराने की मुख्य वजह शादी है, लेकिन अब ये सोच बदल रही है. ज़्यादातर लोगों में तो ख़ुद को बेहतर बनाने की चाह होती है. आज लोग सैटेलाइट टीवी देखते हैं और इंटरनेट की वजह से भी बॉडी इमेज की धारणा में बदलाव आ रहा है और लोग चाहते हैं कि उनका फ़िगर भी हीरो या हीरोइन की तरह हो.”

रिस्क फ़ैक्टर

बॉलीवुड अभिनेत्री कोएना मित्रा इस बात को नहीं मानतीं. कुछ साल पहले अपनी नाक की कॉस्मेटिक सर्जरी करवाने वाली कोएना कहती हैं, “सुंदर दिखने की चाह व्यक्तिगत होती है. आज के ज़माने में लोग ‘पर्फ़ेक्शन’ चाहते हैं और मुझे नहीं लगता कि इसके लिए फ़िल्म स्टार ज़िम्मेदार हैं.”

इस बारे में उन्होंने बताया, “हम लोग स्क्रीन पर दिखते हैं और लोग हमसे ‘पर्फ़ेक्शन’ की उम्मीद करते हैं. उस समय मुझे कुछ निर्माता-निर्देशकों ने कहा कि अगर मैं नाक की सर्जरी करवाऊं, तो बेहतर लगूंगी. वैसे भी मेरी नाक की बांयी तरफ़ एक अतिरिक्त हड्डी थी और इसलिए भी मेडिकल कारणों से ये मेरे लिए ज़रूरी था. मुझे लगा कि अगर सर्जरी से ये चीज़ बेहतर हो सकती है, तो क्यों नहीं.”

जहां कोएना कॉस्मेटिक सर्जरी कराने के अपने फ़ैसले को सही ठहराती हैं, वहां वे सैद्धांतिक रूप से इसके ख़िलाफ़ हैं.

Image caption दिसंबर 2010 में फ़्रेंच कंपनी पीआईपी के दोषपूर्ण ब्रेस्ट इमप्लांट से हज़ारों महिलाएं प्रभावित हुईं.

वो कहती हैं, “मैं इसका प्रचार नहीं करूंगी और न ही लोगों को बढ़ावा दूंगी कि सिर्फ़ बेहतर दिखने के लिए वे ये ख़तरा मोल हैं क्योंकि ये एक ‘रिस्क फ़ैक्टर’ है. आज आप सर्जरी करवाते हैं लेकिन आपको नहीं मालूम कि पांच साल बाद आपके शरीर की क्या प्रतिक्रिया होगी.”

क़ानूनी विकल्प

ऑपरेशन बिगड़ने की स्थिति में मरीज़ के पास क़ानूनी विकल्प भी है. चंडीगढ़ स्थित एंटीक्लॉक एज रिवर्सल क्लिनिक में सीनियर कॉस्मेटिक सर्जन डा. केएम कपूर का कहना है, “भारत में स्वास्थ्य सेवाएं उपभोक्ता संरक्षण क़ानून के अंतर्गत आती हैं. अगर किसी मरीज़ को लगता है कि डॉक्टर या अस्पताल की लापरवाही की वजह से उसका नुक्सान हुआ है, तो वे इस क़ानून के तहत अदालत जा सकता है.”

ऐसा भी देखा गया है कि कई बार लोग विज्ञापन या विशेष छूट आदि के प्रलोभन में पड़कर अप्रशिक्षित लोगों के चक्कर में फंस जाते हैं जिससे उनका नुकसान हो सकता है.

इस बारे में डा. कपूर कहते हैं कि इसमें सर्जरी कराने वाले व्यक्ति की भी ज़िम्मेदारी बनती है. वे कहते हैं, “डॉक्टर के साथ मरीज़ को अपने अधिकारों के बारे में पता होना चाहिए. आप जो सर्जरी कराना चाहते हैं, पहले उसके बारे में और डॉक्टर के बारे में पूरी तरह छान-बीन करनी चाहिए जो कि इंटरनेट आदि के ज़रिए किया जा सकता है.”

लेकिन क्या ज़िम्मेदारी सिर्फ़ मरीज़ की ही बनती है? इसमें भारतीय मेडिकल काउंसिल, एमसीआई, की क्या भूमिका है?

डा. अनूप धीर कहते हैं कि कॉस्मेटिक सर्जरी से जुड़े संभावित ख़तरों से निपटने के लिए भारतीय मेडिकल काउंसिल के मौजूदा दिशानिर्देश काफ़ी नहीं हैं.

उनका कहना है, “मेडिकल काउंसिल के दिशानिर्देशों के अनुसार एक प्रशिक्षित सर्जन, बिना प्लास्टिक सर्जन लिखे भी, कोई भी सर्जरी कर सकता है. भारत में स्पेशलिस्ट रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत है जैसा अमरीका और इंग्लैंड में है जहां किसी ख़ास क्षेत्र में स्पेशलाइज़ेशन करने के बाद ही सर्जरी की अनुमति मिलती है. जब तक यहां ऐसा नहीं होगा, तब तक एमसीआई अप्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा बिगड़े मामलों पर नियंत्रण नहीं रख सकती.”

वहीं ऐसे मामलों से निपटने के लिए डा. केएम कपूर एक विशेष क़ानून की वक़ालत करते हैं.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार