एसएमएस से होने वाली आय में 685 अरब रुपए की कमी

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Image caption अध्ययन में कहा गया है कि अभी भी बड़ी संख्या में लोग एसएमएस को ही सुविधाजनक पाते हैं

एक रिपोर्ट के अनुसार सोशल मैसेजिंग एप्लीकेशन की संख्या बढ़ने की वजह से मोबाइलों के जरिए होने वाले एसएमएस की संख्या में भारी कमी आई है.

इसकी वजह से पिछले बरस मोबाइल नेटवर्क कंपनियों को 13.9 अरब डॉलर ( लगभग 685 अरब रुपए) का नुकसान हुआ है.

विश्लेषण करने वाली कंपनी ओवम की ओर से लोकप्रिय सोशल मैसेजिंग एप्लीकेशन व्हाट्सएप, ब्लैकबेरी मैसेंजर और फेसबुक चैट का वैश्विक अध्ययन किया गया.

इस अध्ययन के बाद कहा गया है कि 'बड़ी इंटरनेट कंपनियों की वजह से मिल रही चुनौतियों से निपटने के लिए मोबाइल ऑपरेटरों को मिलकर काम करना होगा'.

उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल ऑपरेटर अगर साझा रुप से अगर प्रभावशाली दरों पर सुविधा देने की योजना बनाएँ तो इस घाटे की भरपाई की जा सकती है.

रणनीति बदलने का सुझाव

इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए ओवम ने दुनिया भर में स्मार्टफ़ोन के जरिए उपयोग में लाए जाने वाले विभिन्न सोशल मैसेजिंग एप्लीकेशन का अध्ययन किया.

इस अध्ययन में पश्चिम के देशों में उपयोग में लाए जाने वाले एप्लीकेशन के अलावा दक्षिण अफ्रीका में बेहद लोकप्रिय एप्लीकेशन एमएक्सइट (MXit) का भी अध्ययन किया गया.

सोशल मैसेजिंग एप्लीकेशन आमतौर पर महंगे शॉर्ट मैसेजिंग सर्विसेस यानी एसएमएस के स्थान पर स्मार्टफोन के जरिए मिलने वाली इंटरनेट सुविधा का उपयोग करते हैं.

हालांकि इस अध्ययन में ये आकलन नहीं किया गया कि इंटरनेट का उपयोग बढ़ने की वजह से मोबाइल नेटवर्क कंपनियों को मोबाइट डेटा ट्रांसफर की वजह से कितनी आमदनी हो रही है.

इस रिपोर्ट को तैयार करने वाली नेहा धारिया का कहना है कि मोबाइल ऑपरेटरों को अब सोशल मैसेजिंग के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के साथ काम करना चाहिए.

उनका कहना है, "ऑपरेटरों को एप्लीकेशन डवलप करने वाले लोगों के साथ साझेदारी के लिए तैयार रहना चाहिए, उनसे उपभोक्ताओं के आंकड़े साझा करना चाहिए उन्हें इस बात के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए कि वे उपभोक्ता के सोशल कनेक्शनों के साथ जोड़कर कुछ तैयार करें."

नेहा धारिया का कहना है, "मोबाइल हैंडसेट बेचने वाली कंपनियों से साथ काम करना भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका कुछ बहुत लोकप्रिय सोशल मैसेजिंग एप्लीकेशन पर नियंत्रण है और वे मोबाइल को बाजार में उतारने से पहले कुछ एप्लीकेशन डाल सकते हैं."

बड़ी हो रही चुनौती

जेम्स बारफर्ड एंडर्स कंपनी के विश्लेषक हैं. वे कहते हैं कि हालांकि ये आंकड़ा भारी भरकम दिखाई दे रहा है लेकिन ये ध्यान में रखना चाहिए कि पूरी दुनिया में उपयोग में लाए जा रहे मोबाइल नेटवर्क में सोशल मैसेजिंग की भूमिका अभी भी बहुत सीमित है.

उनका कहना है कि व्हाट्सएप जैसी सेवाएँ लगातार लोकप्रिय होती जा रही हैं और उपभोक्ता एसएमएस के स्थान पर इनका उपयोग करने लगे हैं.

बीबीसी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, "हालांकि उद्योग का आकार के लिहाज से ये संख्या बहुत बड़ी नहीं है लेकिन बहुत से लोग इस तरह के एप्लीकेशन का उपयोग अंतरराष्ट्रीय संदेश भेजने के लिए कर रहे हैं."

उनका कहना है कि वे ऐसे खर्च भी बचा रहे हैं, जो शायद उन्हें करना ही नहीं पड़ता, इसमें ईमेल या इसी तरह के दूसरे तरीके हो सकते हैं.

जेम्स बारफर्ड बताते हैं कि वर्ष 2011 के अप्रैल महीने में कॉमस्कोर ने एक अध्ययन में पाया था कि उस महीने अमरीका में स्मार्टफोन का उपयोग करने वालों में से चार प्रतिशत ने संदेश भेजने के लिए व्हाट्सएप का उपयोग किया.

जून, 2011 में यूगोव की ओर से हुए एक और सर्वेक्षण में पाया गया कि स्मार्टफोन का प्रयोग करने वाले लोगों में से बड़ी संख्या में लोग (लगभग 81 प्रतिशत) अभी भी एसएमएस को सुविधाजनक पाते हैं.

वे कहते हैं, "मैं मानता हूँ कि ये ऐसी चुनौती है जो लगातार बढ़ रही है लेकिन सही दरें लागू करके और सही लागत से इसका मुकाबला किया जा सकता है."

उनका कहना है, "लोग अभी भी मोबाइल नेटवर्क का उपयोग कर रहे हैं और वे इसके लिए भुगतान करने के लिए भी तैयार हैं."

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