क्यों लगाए जाते हैं बिजली के झटके

Image caption ‏‏शोध दल का दावा है कि बिजली के झटके देने के बाद 75 से 85 प्रतिशत लोगों का दिमाग सही हो जाता है

जब किसी का दिमागी संतुलन बिगड़ जाता है तो उसे दुरुस्त करने के लिए बिजली के हल्के झटके क्यों दिए जाते हैं? इसका बड़ा आसान जवाब हो सकता है कि बिजली के झटकों से दिमाग सही हो जाता है.

लेकिन बिजली के झटकों की वजह से मरीज का दिमाग सही क्यों हो जाता है? एक नए शोध में इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की गई है.

एबरडीन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि बिजली के झटके देने से मरीज के मस्तिष्क के दो अलग-अलग हिस्सों के बीच स्थापित हो गया गैर-जरूरी संबंध टूट जाता है.

इनमें से एक हिस्सा वो होता है जो इंसान का मूड निर्धारित करता है. दूसरा हिस्सा वो होता है जिसका संबंध सोचने-विचारने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता से होता है.

दिमाग का रासायनिक संतुलन

बिजली का झटका देने का मकसद होता है दिमाग का कुदरती रासायनिक संतुलन दोबारा स्थापित करना.

एबरडीन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का ये अध्ययन प्रोसेडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (पीएनएएस) में छपा है.

शोध दल की अगुआई करने वाले प्रोफेसर इयान रीड कहते हैं, ''इलाज की ये विधि विवादित है. आलोचना की प्रमुख वजहों में से एक वजह ये समझ नहीं आना है कि विधि आखिर काम कैसे करती है और मस्तिष्क से इसका क्या लेना-देना है.''

इयान रीड कहते हैं, ''ये सबसे ज्यादा प्रभावी इलाजों में से एक है. सिर्फ मनोचिकित्सा में ही नहीं बल्कि दवाओं से भी कारगर है क्योंकि इसके बाद 75 प्रतिशत से 85 प्रतिशत तक मरीज दुरुस्त हो जाते हैं.''

वे कहते हैं, ''हमारा मुख्य निष्कर्ष ये है कि यदि आप बिजली के झटके देने से पहले और झटके देने के बाद की स्थिति की तुलना करेंगे तो पाएंगे कि ये दिमाग के उन हिस्सों के बीच उस संबंध को कम कर देते हैं जिनकी वजह से सारी गड़बड़ी पैदा होती हैं.''

इयान रीड का मानना है कि ये शोध आगे के अध्ययनों के लिए भी मददगार साबित हो सकता है. इम्पीरियल कॉलेज लंदन के प्रोफेसर डेविड नट का भी कहना है कि ये शोध काफी महत्व रखता है.

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