औद्योगिक शोर से पेड़-पौधों को 'खतरा'

  • 22 मार्च 2012
पायनन पाइन
Image caption शोध के दूसरे हिस्से में पायनन पाइन पेड़ पर शोर के असर की जांच की गई

अमरीकी शोधकर्ताओं के एक दल ने पाया है कि औद्योगिक शोर से उन जीवों के व्यवहार में परिवर्तन आता है जो आम तौर पर परागण और बीजों को फैलाने में कारगर भूमिका निभाते हैं.

शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे भू-दृश्य में बदलाव आ सकता है. ये शोध ‘रॉयल प्रोसीडिंग्स बी’ में प्रकाशित किया गया है.

उत्तरी कैरोलीना के नेशनल इवोल्यूशनरी सिंथेसिस सेंटर के शोधकर्ता क्लिंटन फ्रांसिस के नेतृत्व वाले इस दल ने जंगल में औद्योगिक शोर के प्रभावों पर जांच किए.

ये जांच न्यू मेक्सिको के रैटलस्नेक कैनयन हैबिटैट मैनेजमेंट एरिया में की गई. इस इलाके में कई प्राकृतिक गैस कुएं स्थापित हैं.

शोध के पहले दो हिस्सों में दल ने पक्षियों पर शोर के असर की जांच की. शोधकर्ताओं ने इस जांच में पाया कि पक्षी शोर को लेकर विशेष तौर पर संवेदनशील होते है क्योंकि वो आपस में आवाज के जरिए ही बातचीत करते हैं.

परागण की प्रक्रिया

शोधकर्ताओं ने शांत और शोर-शराबे वाले इलाकों में कुछ ऐसे पौधों के नकल को रखा गया जिसका परागण हमिंगबर्ड करते हैं.

असली दिखने वाले इन पौधों के फूलों में ट्यूबों में मधुरस रखी गई ताकि पता लगाया जा सके कि हमिंगबर्ड प्रजाति की पक्षियों ने कितना मधुरस पिया.

शोधकर्ताओं ने पाया कि औद्योगिक शोर से पक्षियों की गतिविधियों में खासी बढ़ोत्तरी हुई.

डॉक्टर फ्रांसिस का कहना है कि ऐसा हो सकता है कि शोर शराबे वाली जगहें हमिंगबर्ड को भाती हों, क्योंकि पक्षियों की दूसरी कई प्रजातियां ऐसी जगहों पर नहीं जातीं.

शोध के दूसरे हिस्से में दल ने पायनन पाइन पेड़ पर शोर के असर की जांच की.

जांच दल ने पाइन के फूलों को 120 पेड़ों के नीचे शांत और शोर वाले दोनों तरह के इलाकों में लगाया गया. इनके परागण पर नजर रखने के लिए कैमरे भी लगाए गए.

पक्षियों पर शोर का असर

Image caption शोर-शराबे वाले इलाकों में कुछ ऐसे पौधों के नकल को रखा गया जिसका परागण हमिंगबर्ड करते हैं

तीन दिनों में पाइन फूलों के पास कई तरह के छोटे जानवर आए, जिसमें चूहे, गिलहरियां, पक्षी और खरगोश सभी शामिल थे. चूहे विशेष तौर पर शोर शराबे वाली जगहों पर आए, जबकि वेस्टर्न स्क्रम प्रजाती की पक्षियां ऐसी जगहों पर नहीं आए.

शोधकर्ताओं का मानना है कि ये पेड़-पौधों के लिए बुरी खबर है.

डॉक्टर फ्रांसिस बताते हैं कि चूहे जिन बीजों को खाते हैं वो उनके शरीर से बाहर आने की प्रक्रिया तक सुरक्षित नहीं रहते. इसलिए शोर शराबे वाली जगहों पर चूहों की संख्या के बढ़ना का मतलब है कि उस इलाके में बीज काफी कम संख्या में अंकुरित होंगे.

इसके विपरीत वेस्टर्न स्क्रब प्रजाती के पक्षी एक साथ हजारों बीज के जा सकता है जिसे वो बाद में खाने के लिए बचाकर जमीन में छुपा देते हैं. इसमें से कई बीज अंकुरित हो जाते हैं.

शांत और शोर शराबे वाले इलाकों में पाइन के बीजों को गिनने पर शोधकर्ताओं ने पाया कि शांत इलाकों में अंकुरित बीजों की संख्या शोर शराबे वाले इलाक़े के मुक़ाबले चार गुना थी.

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