मेडिकल इंप्लांट पर कंप्यूटर हमला !

Image caption डाइबिटीज के मरीज इंसुलिन का इंजेक्शन लेते हैं

कई लोगों को जीने के लिए जरूरी मेडिकल इंप्लांट पर कंप्यूटर से हमला कर उन्हें जान के लिए खतरा बनाया जा सकता है.

कंप्यूटर सुरक्षा पर काम कर रहे शोधकर्ताओं ने इस तरह के हमले प्रोग्राम किए हैं, जो डायबिटीज और दिल की बीमारियों के लिए लगाए गए मेडिकल इंप्लांट को ढूंढ कर उन्हें बेकार कर सकते हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि इन मेडिकल उपकरणों को हमलों से बचाने के लिए बहुत काम करने की जरूरत है.

ऐसे लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है जो सक्रिय जिंदगी जीने के लिए मेडिकल इंप्लांट पर निर्भर रहते हैं.

बीमार लोगों की हालत में सुधार के लिए पेसमेकर, इंसुलिन पंप और डिफिब्रिलेटर्स जैसे मेडिकल उपकरण लगाते हैं.

पेसमेकर से दिल की धड़कन को बराबर बनाए रखा जाता है, इंसुलिन पंप से डाइबिटीज के मरीजों को भोजन के बाद इंसुलिन जी जाती है जबकि डिफिब्रिलेटर्स से भी हृदय की गतिविधियों को सामान्य रखा जाता है.

इस तरह के कई और मेडिकल इंप्लाटं भी है जो शरीर के अंदर फिट किए जाते हैं.

जाहिर है ऐसे इंप्लांट जिंदगी को बनाए रखने में बेहद अहम होते हैं और अगर उन्हें बेकार कर दिया जाए तो रोगियों पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है.

इंटरनेट से खतरा

सुरक्षा फर्म मैकएफी के एक शोधकर्ता बर्नैबी जैक ने पाया कि इन इंप्लांट को अपडेट करने के लिए जरूरी वायरलेस इंटरनेट कनेक्शन में सेंध लगाई जा सकती है.

Image caption हृदय के काम को बनाए रखने के लिए कुछ लोगों को पेसमेकर की जरूरत होती है

उन्होंने कहा, "हम इंसुलिन पंप पर 300 फिट की दूरी से काम कर सकते हैं. हम पंप को पूरा 300 यूनिट इंसुलिन एक साथ शरीर में छोड़ने का निर्देश दे सकते हैं और इसके लिए हमें इंप्लांट की विशेष आईडी की जरूरत भी नहीं होती."

जैक के मुताबिक डायबिटीज के मरीजों को आम तौर पर एक बार में 5-10 यूनिट इंसुलिन की जरूरत होती है और 300 यूनिट एक साथ देने से वो गंभीर संकट में पड़ सकता है.

इसी तरह के शोध मासाच्यूसेट्स एम्हर्स्ट यूनिवर्सिटी में भी किए गए और पाया गया कि डिफिब्रिलेटर्स को बेकार किया जा सकता है.

इस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर केविन फू के अनुसार इस तरह के शोध से पता चलता है कि हमले रोकने के लिए कितना का अभी जरूरी है.

उन्होंने कहा, "आने वाले समय में उपकरण और ज्यादा इंटरनेट से जुड़े होंगे. बचने के लिए कोई एक रास्ता नहीं है लेकिन अभी भी ऐसी तकनीक मौजूद है जो इस तरह के खतरों को बहुत कम कर सकता है."

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