फास्ट फूड कंपनियों को प्रायोजक बनाना 'गलत'

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Image caption एक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में पांच प्रतिशत आबादी मोटापे या अधिक वजन से पीड़ित है

ब्रिटेन के डॉक्टरों ने मोटापे के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है. ब्रिटेन में लगभग एक चौथाई व्यस्क इसके शिकार हैं.

वहां शुरु किए गए अभियान में फैट-टैक्स, व्यायाम को बढ़ावा देने, खाद्य पदार्थों के विज्ञापन को सीमित करने जैसे कदम उठाने की समीक्षा की जाएगी.

संस्था के प्रवक्ता, प्रोफेसर टेरेन्स स्टीवनसन का कहना है कि, "कोका-कोला और मेकडोनाल्ड जैसी फास्ट फूड कंपनियों को ओलंपिक खेलों जैसी प्रतियोगिताओं का प्रायोजक बनने की इजाजत देना एक 'गलत संदेश' देता है."

इस अभियान में ब्रिटेन के डाक्टरों का प्रतिनिधित्व करनी वाली लगभग सभी संस्थाएं एकजुट हुई हैं.

लेकिन मोटापा ब्रिटेन ही नहीं बल्कि भारत सहित विश्व के कई देशों की बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है.

साल 2007 के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में पांच प्रतिशत आबादी मोटापे या अधिक वजन से पीड़ित है.

रणनीति

स्टीवनसन ने कहा, ''ब्रिटेन में यह समस्या बहुत बड़ी है. यह ऐचआईवी और स्वाइन फलू से काफी बड़ी है.''

अभियान के पहले चरण में यह देखा जाएगा कि इन रणनीतियों में से किससे फायदा हो सकता है.

टेरेन्स स्टीवनसन ने बीबीसी को बताया कि लोगों को सेहतमंद खाना खाने के लिए प्रेरित करना उसी तरीके से काम कर सकता है जैसे के धूम्रपान के खिलाफ अभियान चल रहा है.

ब्रिटेन में टीवी और खेल प्रतियोगिताओं में धूम्रपान के विज्ञापनों पर कई तरह की पाबंदियां हैं.

स्टीवनसन ने कहा, ''धूम्रपान की तरह इस समस्या का समाधान भी माहौल बदलने में और इस बात पर निर्भर करेगा कि आप लोगों पर इन खाद्य पदार्थों को खरीदने के लिए कैसा दबाव बनाते हैं, कैसे विज्ञापन देते हैं और इनकी मार्किटिंग करते हैं.''

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