आपकी खुशी से है दिल का रिश्ता

Image caption आजकल तनाव भरी जिंदगी के चलते हृदय रोगियों की तादाद बढ़ रही है

अमरीकी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप खुश रहते हैं तो हृदय से जुड़ी समस्याओं से बचे रह सकते हैं.

'साइकोलॉजिकल बुलेटिन' में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक खुश और आशावादी लोगों को हृदय रोग और दिल का दौरा पड़ने का जोखिम कम रहता है.

'हावर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ' ने 200 से ज्यादा अध्ययनों की समीक्षा के बाद यह बात कही है.

चूंकि इस तरह के लोग आम तौर पर औरों से सेहतमंद होते हैं, इसलिए वैज्ञानिक मानते हैं कि खुद को भला-चंगा समझने से उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं होने की आशंका भी कम रहती है.

तनाव और अवसाद हृदय रोग की वजह माने जाते हैं.

हावर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने मेडिकल ट्रायल डेटाबेस को खंगाला ताकि ऐसे अध्ययनों का पता लगाया जा सके जिनमें मनोवैज्ञानिक तंदुरुस्ती और हृदय रोग के बीच संबंध के बारे में जानकारी दर्ज हो.

इससे पता चला कि आशावादी होने, जीवन से संतुष्ट होने और खुश रहने से हृदय रोग और इस तरह की दूसरी समस्याओ का जोखिम कम रहता है, भले ही व्यक्ति की उम्र, सामाजिक-आर्थिक दर्जा और शरीर का वजन कुछ भी हो. धूम्रपान का भी इस पर असर नहीं होता.

आशावादी लोगों में हृदयरोग होने का जोखिम 50 फीसदी कम पाया गया.

'प्रमाण नहीं'

डॉ. जूलिया बोएहम और उनकी टीम इस बात पर जोर देती है कि उनका काम सिर्फ आशावादी होने और दिल की बीमारी से बचे रहने के बीच एक संबंध की तरफ इशारा करता है, इसका कोई सबूत नहीं देता है.

Image caption टहलना हमेशा सेहत के लिए फायदेमंद होता है

पहली बात तो मनोवैज्ञानिक तंदुरुस्ती को मापना बहुत मुश्किल है, और दूसरा जब हृदय रोग के जोखिमों को कम करने की बात आती है तो कॉलेस्ट्रोल और मधुमेह जैसे कारकों पर कहीं प्रमुखता से ध्यान दिया जाता है.

इस अध्ययन में जो लोग आशावादी थे, उनमें कसरत करने और संतुलित खाना खाने की आदतें भी पाई गईं. इनका भी अपना एक असर होता है.

शोधकर्ताओं ने लगभग 200 अध्ययनों का जायजा लिया, लेकिन अभी वे कोई निष्कर्ष नहीं देना चाहते हैं और इस बारे में ज्यादा अध्ययन की जरूरत पर जोर देते हैं.

मनोवैज्ञानिक सेहत और हृदय रोग पर अब तक जो काम हुआ है, तो उनमें खुशी की बजाय तनाव और चिंता पर ज्यादा जोर दिया गया है.

'ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन' में हृदय रोग से जुड़ी वरिष्ठ नर्स मौरीन टालबोट का कहना है कि हृदय रोग और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध बहुत ही जटिल है और इसे अभी पूरी तरह नहीं समझा गया है.

हालांकि इस अध्ययन में तनाव के प्रभावों का जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन इसमें इस बात की पुष्टि की गई है कि मनोवैज्ञानिक तंदुरुस्ती स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा है.

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