चूहों में अंधेपन का इलाज संभव

Image caption कोशिका प्रत्यारोपण के जरिए अंधेपन का इलाज संभव है

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने अंधे चूहों की आँख में प्रकाश संवेदी कोशिकाओं के प्रत्यारोपण के जरिए आँख की रोशनी दोबारा लौटाने में सफलता पाई है.

यह प्रयोग उन मरीजों के इलाज में एक महत्वपूर्ण कदम है जिनकी आँखों की रोशनी कम हो गई है.

लंदन इंस्टीट्यूट ऑफ आफ्थैमोलॉजी के वैज्ञानिकों ने छोटे चूहों की आँखों से कोशिकाओं को निकालकर सीधे उन वयस्क चूहों में प्रत्यारोपित कर दिया जिन्हें रात में न दिखने की बीमारी थी.

यह शोध परिणाम मशहूर विज्ञान पत्रिका ‘नेचर’ में प्रकाशित हुआ है.

इस दौरान रॉड फोटोरिसेप्टर नामक कोशिकाओं का प्रत्यारोपण किया गया जो अँधेरे में देखने के लिए जिम्मेदार होती हैं.

शोध में पता चला कि चार से छह सप्ताह के भीतर छह में से करीब एक प्रत्यारोपित कोशिका ने मस्तिष्क को दृष्टि संवेदनाएं भेजने की क्षमता प्राप्त कर ली.

शोधकर्ताओं ने इसका परीक्षण हल्की रोशनी युक्त पानी में किया. जिन चूहों में रॉड कोशिकाएं प्रत्यारोपित की गई थीं, वे छिपे हुए उस स्थान को देखने में सक्षम थे जो पानी के उस पार था. जबकि वे चूहे ऐसा करने में असमर्थ थे जिनमें ये कोशिकाएं प्रत्यारोपित नहीं की गई थीं.

शोध के नेतृत्वकर्ता प्रो. रॉबिन अली के मुताबिक, “हमने पहली बार ये साबित किया है कि प्रत्यारोपित फोटोरिसेप्टर कोशिकाएं रेटिना में सफलतापूर्वक जोड़ी जा सकती हैं और इससे आँखों की रोशनी बढ़ सकती है.”

वे आगे कहते हैं, “हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही इन कोशिकाओं को भ्रूण की स्टेम कोशिकाओं से भी पा सकेंगे और इनका सफलतापूर्वक प्रयोग मानव पर भी हो सकेगा.”

हालांकि इस प्रयोग के परिणाम तो बेहद उत्साहजनक हैं, लेकिन इसके जरिए मरीजों का उपचार करने में अब भी कई रोड़े हैं.

समस्या

दरअसल, आँख में दो तरह की फोटोरिसेप्टर कोशिकाएं होती हैं- रॉड्स और कोन्स. इनमें कोन फोटोरिसेप्टर को प्रत्यारोपित करना बहुत मुश्किल है जो मनुष्य में देखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती हैं, खासकर पढ़ने के लिए.

वैज्ञानिक भ्रूण की स्टेम कोशिका से फोटोरिसेप्टर निकालने पर भी काम कर रहे हैं. प्रो. अली का कहना है कि ऐसी कोशिकाएं होती तो हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि इन्हें प्रत्यारोपित करना कितना प्रभावी होगा.

इस शोध के लिए कई संस्थानों ने धन मुहैया कराया है. इनमें मेडिकल रिसर्च काउंसिल, वेलकम ट्रस्ट, रॉयल सोसायटी और मिलर्स ट्रस्ट जैसी संस्थाएं शामिल हैं.

कोशिका प्रत्यारोपण के जरिए अंधेपन के इलाज के लिए कई तरह की शोध परियोजनाएं पहले से ही चल रही हैं.

पिछले साल, इसी शोध समूह ने मूरफील्ड हॉस्पिटल में मनुष्य की भ्रूण की स्टेम कोशिका के जरिए यूरोप का पहला क्लीनिकल परीक्षण किया था.

उसमें स्टारगार्ड्ट्स नामक बीमारी के मरीजों का अध्ययन शामिल था. यह बीमारी युवा लोगों में अंधेपन की सबसे प्रमुख वजह होती है.

शुरुआती परिणाम बताते हैं कि ये तकनीक सुरक्षित है, लेकिन विश्वसनीय परिणाम आने में अभी कई साल लगेंगे.

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