डूबे जहाजों की जंगली दुनिया

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Image caption वैज्ञानिक दुरभाग्यपूर्ण किंगस्टन और बाकी डूबे हुए जहाजों का अध्ययन कर रहे हैं

इस महीने अमरीका की तटरक्षक सेना ने जापान के जहाज रुओ-अन मारु को लगभग एक साल समुद्र में इधर उधर बहने के बाद अलास्का की खाड़ी में डुबा दिया. इससे वह सागर के तल पर तीन लाख नष्ट जलयानों में शामिल हो गया. लेकिन समुद्री जीवों के लिए नष्ट जलयान अच्छे हैं या बुरे?

साल 1881 में किंगस्टन नाम का एक जहाज लंदन से निकला. कप्तान और बाकी दल का मानना था कि जहाज एडन जा रहा है लेकिन वो जहाज लाल सागर के आगे नहीं जा पाया.

उसी साल 22 फरवरी को वो शैवाल से टकरा गया. दल को बचा लिया गया लेकिन जहाज डूब गया.

एक शताब्दी बाद, किंगस्टन कई रंगो में रंगा है. पास की शैवाल पर रहने वाले लगभग 38 जीव अब इस टूटे जहाज पर रहते हैं. कई तरह से यह जहाज समुद्र के फर्श का हिस्सा बन गया है.

वैज्ञानिक दुर्भाग्यपूर्ण किंगस्टन और बाकी डूबे हुए जहाजों का अध्ययन कर रहे हैं ताकि इस बात का अंदाजा लगाया जा सके कि पानी के नीचे इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है.

चौंकाने वाले तथ्य

विभिन्न बर्बाद जहाज कई चौंकाने वाले तथ्य सामने ला रहे हैं. कुछ तो समुद्री जीव से लगभग घृणा करते हैं, कुछ अन्य अनपेक्षित जीवों के समुदायों का घर बन जाते हैं.

तेल अवीव विश्वविद्यालय में समुद्री जीव-विज्ञान के प्रोफेसर येहुदा बेनायाहू ने अपने कैरियर का काफी समय लाल सागर में बर्बाद जहाजों का अध्ययन करने में बिताया है.

उन्होंने बीबीसी को बताया, ''लाल सागर में हमारे अध्ययन ने इस बात का फायदा उठाया कि सात से 10 बर्बाद समुद्री जहाज सुऐज की खाड़ी के प्रवेश द्वार पर हैं. त्रास्दी की तिथि मालूम है और सभी 30 मीटर की गहराई क्षेत्र में हैं.''

हर जहाज दिखाता है कि शैवाल का विकास कैसे हुआ होगा.

उनके शोध में सामने आया है कि संरचनात्मक समानताएं होने पर अप्राकृतिक शैवाल प्राकृतिक शैवालों की ही नकल करती हैं.

इसलिए अधिकतर डूबे हुए जहाज समुदाओं के नए आवास बन गए हैं.

लार्वा

लारवा सबसे पहले जीव हैं जो यहां आते हैं. उन्होंने कहा, ''समुद्री लारवा इसका लाभ उठाते हैं. एक तरह से वे परंपरा की शुरुआत करते हैं जिसका मतलब है कि समय के साथ आप वहां अलग अलग जीवों को बसते हुए देखते हैं.''

खुले पानी की मछलियां इस शैवाल पर खाने के लिए आकर्षित होती हैं. जामुनी टैंग जैसी मछलियां यहां खाद्य पदार्थ और घर की तलाश में आती हैं. दोनों परभक्षियों को भी आकर्षित करते हैं.

लड़ाई का जहाज

आठ साल पहले रॉयल नेवी लड़ाई का जहाज एचएमएस सकीला ब्रिटेन में कोरनवॉल के तट पर डूब गया था.

विटस्टैंड बे पर एक अप्राकृतिक शैवाल बनाया गया. शुरु से ही वैज्ञानिकों ने निगरानी रखी कि समुद्र के जीव इससे कैसे प्रभावित होते हैं.

मैरीन बायलॉजिकल ऐसोसेशन के ऐसोसिएट फैलो डॉ कीथ हिसकॉक के अनुसार कई चौंकाने वाले तत्य सामने आए.

उन्होंने कहा, ''पहले दो सालों में उपनिवेशन हर जगह पर था. गोल पत्थर पर तट पर पाए जाने वाले नरम जीव बड़ी संख्या में यहां पर आ चुके थे. फिर दूसरे साल में बड़ी मछलियां आई और उन सब को खा गईं.''

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