कुआला भालू के अस्तित्व पर खतरा

  • 30 अप्रैल 2012
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Image caption पर्यावरणविद् लंबे समय से कुआला के संरक्षण की कोशिशों में जुटे हैं

ऑस्ट्रेलिया में बेहद पसंद किए जाने वाले कुआला भालुओं के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है. इसीलिए उन्हें संरक्षित प्रजातियों की सूची में शामिल किया गया है.

ऑस्ट्रेलिया के पर्यावरण मंत्री टोनी बुर्क ने बताया कि क्वींसलैंड, न्यू साउथ वेल्स और ऑस्ट्रेलियाई राजधानी क्षेत्र में कुआला भालु संकट में हैं क्योंकि उनके बसेरे सिमट रहे हैं और शहरों का विस्तार हो रहा है. उनकी घटती संख्या की वजह कारें, कुत्ते और बीमारियां भी हैं.

बुर्क के मुताबिक कुछ इलाकों में कुआला भालुओ की संख्या बढ़ भी रही है. पर्यावरणविद् लंबे समय से कुआला के संरक्षण के लिए मुहिम चला रहे हैं.

समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल जारी एक सरकारी रिपोर्ट में कहा गया कि कुआला भालुओं के संरक्षण के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे.

खास है कुआला

ये जीव दिन में बीस घंटे सोता है और इसके शरीर पर फर होते हैं. पेड़ों पर रहने वाला ये भालु ऑस्ट्रेलियाई लोगों को बहुत पसंद हैं.

पर्यावरण मंत्री बुर्क ने कहा, “कुआला भालु ऑस्ट्रेलिया के लिए बहुत खास हैं और हमारे समुदाय में उनका महत्वपूर्ण स्थान है.”

ऑस्ट्रेलिया में 1788 में ब्रिटिश बस्तियों के कायम होने से पहले इन जीवों की संख्या दसियों लाख में मानी जाती थी. लेकिन 1920 के दशक में फर के लिए उनका बड़े पैमाने पर शिकार किया गया, जिससे देश के कई हिस्सों में यह प्रजाति तेजी से खत्म होने लगी.

इस भालु के शिकार पर लोगों ने बड़े पैमाने पर गुस्सा जताया. इसके चलते शिकार तो बंद हो गया लेकिन कुआला भालुओं की संख्या को कभी उस स्तर तक नहीं पहुंचाया जा सका.

इनकी मौजूदा संख्या के बारे में कोई पुख्ता आंकड़े नहीं हैं. यह संख्या कुछ सौ से लेकर कुछ हजार तक हो सकती है, लेकिन इसके 43,515 से ज्यादा होने का अनुमान नहीं है.

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