यूरोप का मिशन जाएगा जूपिटर पर

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Image caption ये मिशन बृहस्पति के तीन बड़े चंद्रमाओं यूरोपा, गेनिमेड और केलिस्टो का अध्ययन करेगा

यूरोप की अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) जूपिटर ग्रह और उसके बर्फीले उपग्रहों पर खोज करने के लिए एक मिशन भेज रही है जिस पर एक अरब यूरो यानी लगभग 70 अरब रुपए का खर्च आएगा.

ईएसए का कहना है कि दस वर्षों की अवधि में एक नए अंतरिक्ष यान छोड़ा जाएगा जिसे वर्ष 2030 तक बृहस्पति ग्रह पर पहुंचना होगा.

ये मिशन बृहस्पति के तीन बड़े चंद्रमाओं यूरोपा, गेनिमेड और केलिस्टो का अध्ययन करेगा जो बर्फ की तरह ठंडे हैं और समझा जाता है कि इनमें समुद्र भी मौजूद हैं.

ईएसए का कहना है कि ये मिशन इस बात की संभावनाओं को तलाशेगा कि क्या बृहस्पति के चंद्रमाओं पर जीवन के अनुकूल दशाएं हैं, क्या वहां इंसान घर बसाकर रह सकता है.

साथ ही ये मिशन यूरोपा चंद्रमा पर उन जगहों की पहचान करेगा जहां भविष्य में एक नया मिशन भेजा जा सकता है.

जूस मिशन

जूस के नाम से जाना जाने वाले इस मिशन को पैरिस में हुई इस एजेंसी के सदस्यों की एक बैठक में मंजूरी दी गई.

जूस का मतलब है 'जूपिटर आइसी मून एक्सपलोरर'. इसमें लगभग पांच टन भारी सेटलाइट लगाए जाने का प्रस्ताव है जिसे सौर-मंडल के सबसे बडे ग्रह में जांच के लिए भेजा जाएगा.

टीम के सदस्य प्रो मिशेल डोहरटी ने बीबीसी को बताया, ''कहीं पर भी जीवन होने के लिए चार चीजें जरूरी होती हैं. पानी, उर्जा का स्रोत ताकि बर्फ पानी बन पाए, फिर आपको सही केमिस्ट्री चाहिए - नाइट्रोजन, कार्बन, हाइड्रोजन, और चौथी चीज जिसकी आपको जरूरत है वो है स्थिरता - यानी एक समय की अवधि जिससे जीवन शुरु हो पाए.''

उन्होंने कहा, ''जूपिटर के बर्फीले चंद्रमा की खासियत है कि हम समझते हैं कि यह चारों चीजें वहां मौजूद हैं. जूस हमें बताएगा कि क्या ऐसा सच में है.''

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