बिना 'छुए' ऑपरेशन !

  • 24 जून 2012
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Image caption इंगलैंड में डॉक्टरो ने रिमोट से ऑपरेशन करने का परीक्षण करना शुरु किया है

लंदन के डॉक्टरों की कोशिश है कि रिमोट कंट्रोल की सहायता से अतिसंवेदनशील ऑपरेशन कर लिया जाए. इसके लिए उन्होंने परीक्षण भी शुरु कर दिया है.

अभी हो रहे ऑपरेशनों में मरीज के शरीर के भीतर की जानकारी के लिए सर्जन पूरी तरह से 3डी इमेज की सहायता लेते हैं, इसमें समय भी ज्यादा लगता है और की-बोर्ड और माउस पर निर्भरता बनी रहती है.

परीक्षण के तौर पर सर्जनों ने कोशिश की है कि वे एक नई तकनीक से चित्रों को जोड़ कर आवाज से मिला दें और हाथ के क्रिया-कलापों का ऐसा इस्तेमाल करें की उन्हें मरीज की तस्वीरें देखने के लिए सिर्फ बोलकर निर्देश देने हों.

डॉक्टरों का कहना है कि इससे उन्हें ऑपरेशन करने में ज्यादा सुविधा होगी और किसी तरह की रुकावट भी नहीं होगी.

स्वतंत्र विशेषज्ञों का कहना है कि रिमोट कंट्रोल से ऑपरेशन करना अगले दस से पंद्रह वर्षों में हर जगह शुरु हो जाएगा.

आवाज सुनेगा

लंदन के संत थॉमस हॉस्पिटल के सर्जन ‘गेम टेक्नोलॉजी’ की सहायता से इस ऑपरेशन को अंजाम देने की कोशिश में लगे हुए हैं.

रिमोट ऑपरेशन का प्रयोग इस तरह किया जा रहा है जिससे कि वह सिर्फ सर्जन की बात सुनेगा और जब वह कुछ कहेगा तो उसकी आवाज के अनुरूप ही हाथ हरकत करेगा.

संत थॉमस हॉस्पिटल में किए जा रहे इस परीक्षण में सर्जन टॉम कैरेल के हाथ एक कंडक्टर की तरह उठे हुए हैं और वो बाईं आंत की 3डी इमेज को मोनिटर में देखकर निर्देश दे रहे हैं.

हाथ के इशारे से वो शरीर के किसी भी भाग तक जा सकते हैं, छवि को बड़ी-छोटी करने के अलावा उसे उलट-पुलट भी सकते हैं. अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचने के बाद जब वो संतुष्ट हो जाते हैं कि इसी जगह या अंग का उन्हें ऑपरेशन करना है, तो वो उसे ‘लॉक’ कर देते हैं.

वो बताते हैं कि इस तरह के सीधे नियंत्रण ने उन्हें ऑपरेशन करने के लिए तकनीक पर ध्यान केन्द्रित करने में सुविधा होती है.

आसान होगी सर्जरी

सर्जन टॉम कैरेल का कहना है, “हाल-फिलहाल तक मैं ऑपरेशन थियेटर में लोगों को बोल-बोलकर बताता रहता था कि आपको क्या करना है या फिर कैसे बाएं जाना है, किसको दाएं जाना है या फिर आगे जाना है या पीछे जाना है. लेकिन 'काइनेक्ट' की सहायता से मैं उस जगह पर तुरंत पहुंच जाता हूं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके लिए मुझे न माऊस की जरुरत पड़ती है और न ही की-बोर्ड की.”

टॉम कैरेल का कहना है यह तकनीक प्रयोग करने में काफी आसान है.

कैरेल के अनुसार, “यह कुछ ऐसा ही है जैसा कि स्मार्ट फोन. अगर आप एक बार उस भाव-भंगिमा को जान लेते हैं तो यह काफी आसान हो जाता है.”

यह पूरी दुनिया में अपनी तरह का पहला परीक्षण है. इसके कुछ कारक जैसे-आवाज और शारीरिक क्रिया-कलाप से नियत्रंण- सबसे महत्वपूर्ण हैं.

इस तकनीक को माइक्रोसोफ्ट रिसर्च ने लैंसेस्टर विश्वविद्यालय की मदद से विकसित किया है. माइक्रोसोफ्ट रिसर्च की हेलेना मेंटिस का कहना है ऑपरेशन थियेटर में अलग तरह की चुनौती होती है.

भीड़ में कमी

हेलेना मेंटिस के अनुसार, “ऐसा होता है कि ऑपरेशन थियेटर में सर्जन, नर्स सभी एक-दूसरे के काफी करीब होते हैं और उनके सामने रोगी लेटा रहता है.”

हेलेना बताती हैं, “आपकी क्षमता इतनी नहीं होती है कि आप थोड़ा-बहुत भी हिल-डुल सकें. आप किसी वैसी चीजों को नहीं छू सकते जो स्थिर न हो.”

उनके अनुसार, “मुझे आश्चर्य होगा अगर दस से 15 साल के बाद इस तकनीक का प्रयोग हर जगह नहीं होने लगेगा.”

लैंकैस्टर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ कम्यूटिंग एंड कम्युनिकेशनंस विभाग के डॉक्टर मार्क रॉउन्सफिल्ड ने इस परीक्षण का स्वागत किया है.

उनका कहना है, “यह अंतर्विषयक शोध काफी सुन्दर है. इसमें कंप्युटर के साथ–साथ समाज वैज्ञानिक और मानव वैज्ञानिकों के विशेषज्ञता का प्रयोग किया गया है.”

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