खिसकेगा सूर्य जब टकराएंगी आकाशगंगाएं

एंड्रोमेडा इमेज कॉपीरइट NASA

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने हबल दूरबीन की मदद से पता लगाया है कि हमारी आकाशगंगा अपनी पड़ोसी एंड्रोमेडा से कब टकराएगी.

एंड्रोमेडा आकाशगंगा और पृथ्वी की आकाशगंगा गुरूत्वाकर्षण बल से एक दूसरे के करीब आ रही है और लगभग चार अरब साल में ये एक दूसरे से टकरा जाएंगी.

इस टकराव के लगभग दो अरब साल बाद ये दोनों आकाशगंगाएं एक हो जाएंगी.

इससे खगोलीय गतिविधि से सूर्य के स्थान में तो बदलाव आएगा पर ग्रहों और उनकी चंद्रमाओं को इससे ज्यादा खतरा नहीं है.

पृथ्वी से रात के वक्त आसमान में हो रही ये गतिविधियां देखने लायक होंगी, अगर ये उम्मीद करें कि मनुष्यों का अस्तित्व आने वाले अरबों वर्षों तक कायम रहेगा.

अमरीका के स्पेस टेलिस्कोप साइंस इंस्टिट्यूट के प्रमुख शोधकर्ता रोलैंड वैन डेर मारेल ने कहा, “आज, एंड्रोमेडा आकाशगंगा हमें आसमान में एक छोटे से चित्तेदार आकृति जैसी नजर आती है जिसे पहली बार प्राचीन खगोलशास्त्रियों ने लगभग एक हजार साल पहले देखा था.”

आकर्षक खगोलीय गतिविधि

मारेल आगे कहते है, “कुछ चीजें मानवों को भविष्य पता लगाने की तुलना में अपनी ओर ज्यादा आकर्षित करती है. इस तथ्य का पता लगाना वाकई रोमांचक है कि एक दिन यही चित्तेदार आकृति हमारे सूर्य और आकाशगंगा को घेर लेगी.”

दोनों आकाशगंगाएं एक दूसरे की तरफ बढ़ रही है इस बात का पता पहले ही लगाया जा चुका था.

दोनों आकाशगंगाओं के बीच की दूरी करीब 25 लाख प्रकाश वर्ष है, लेकिन वे चार लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से एक दूसरे के करीब आ रहे है.

हबल दूरबीन से प्राप्त नई जानकारियों से पता चला है कि दोनों कब और कैसे मिलेंगी.

दूरबीन से मिली जानकारी के आधार पर बने कंप्यूटर ग्राफिक्स में दिखता है कि दोनों आकाशगंगाए टकराने के बाद कुछ-कुछ हमारी आकाशगंगा जैसा ही आकार लेगी.

दोनों आकाशगंगाएं मिल जाएगी लेकिन उनमें बसे तारों के आपस में चकराने की संभावना कम है क्योंकि उनके बीच पर्याप्त खाली जगह होती है.

वैज्ञानिकों को प्राप्त जानकारी के अनुसार संभावना है कि एंड्रोमेडा के छोटे सहयोगी ट्रायंगुलम आकाशगंगा और एम33 भी इस गतिविधी में शामिल हो जाए.

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