भालू कर सकते हैं गणना

  • 20 जून 2012
Image caption काले भालू सोच-समझकर गिनती कर सकते हैं.

काले भालुओं ने पहली बार गणना करने की क्षमता का प्रदर्शन किया है.

एक विज्ञान पत्रिका 'ऐनिमल बिहेवियर' में छपे शोध के मुताबिक तीन भालुओं ने टच स्क्रीन कंप्यूटर पर संख्या पर आधारित एक टेस्ट दिया.

टेस्ट में उन्हें दो आकार के बिन्दुओं में से चुनाव करना था और सही चुनाव करने पर अच्छा भोजन पुरस्कार स्वरूप दिया जाना था.

भालुओं पर किए गए इस शोध का नेतृत्व करनेवाली प्रोफेसर जेनिफर वॉन्क ने कहती हैं, ''लोग आमतौर पर भालुओं को बुद्धिमान नहीं समझते लेकिन ये सच नहीं है.''

हालांकि मांसाहारी पशुओं में भालुओं का मस्तिष्क सबसे बड़ा होता है लेकिन उनकी बौद्धिक क्षमता को अब तक ठीक से समझा नहीं गया है.

ऑकलैंड विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की सहायक प्रोफेसर जेनिफर वॉन्क बताती हैं कि उत्तरी अमरीका के काले भालुओं को सबसे पहले इस प्रक्रिया और उसमें इस्तेमाल होनेवाले उपकरण को समझने का प्रशिक्षण दिया गया.

उन्होंने कहा," भालुओं के टच स्क्रीन पर काम करने पर ये पहला प्रकाशित प्रयोग है. इससे पहले किसी भी बड़े मांसाहारी जीव पर ऐसा प्रयोग नहीं किया गया है."

प्रयोग

इस प्रयोग के तहत भालुओं को दो तरह के डॉट्स और सारणी दी गई.

शोधकर्ता जेनिफर बताती हैं कि उनका मकसद ये जानना था कि भालू कम चुनना पसंद करते हैं या ज्यादा.

प्रयोग में शामिल भालुओं को कंप्यूटर के टचस्क्रीन पर सारणियों और बिन्दुओं में से एक का चुनाव करना था और सही उत्तर देने पर पुरस्कार स्वरूप उन्हें भोजन दिया जाना था.

एक भालू ने ज्यादा संख्या में बिन्दुओं का चुनाव कर सही उत्तर दिया तो दो अन्य भालुओं ने कुछ बिन्दुओं वाली सारणी का चुनाव कर पुरस्कार हासिल किया.

Image caption भालुओं पर किए गए प्रयोग से भविष्य में उनपर शोध में मदद मिलेगी.

काले भालू जंगलों में प्राय: अकेले रहना पसंद करते हैं, असामाजिक स्वभाव के होते हैं, इसलिए प्रयोग के जो नतीजे आए उनसे पता चलता है कि समूह से दूरी रखने वाले पशुओं में संख्या आधारित फैसले लेने की क्षमता होती है.

ऐसे ही परीक्षण नरवानरों पर भी किए गए ताकि वैज्ञानिक ये जान सकें कि काले भालुओं और नर वानरों की बुद्धिक्षमता में क्या अंतर है.

इस प्रयोग से पहली बार ये पता चल सका है कि भालुओं की बौद्धिक क्षमता नरवानरों जैसी ही होती है.

प्रोफेसर वॉन्क कहती हैं, ''मैं कुछ समय से इन भालुओं के व्यवहार पर नजर रख रही हूं और साथ ही मैंने एक चिंपैंजी पर भी निगाह रखी है. मैंने पाया कि वर्गीकरण करने और अमूर्त धारणाएं बनाने की क्षमता भालू और चिंपैंजी की एक जैसी ही होती है.''

प्रोफेसर वॉन्क कहती हैं कि भालुओं पर किए गए इस प्रयोग के नतीजों से भविष्य में उनके व्यवहार और बुद्धिमत्ता को और बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी.

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