महामारी की वजह बन सकता है बर्ड फ्लू वायरस

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Image caption भविष्य में घातक रूप ले सकता है एच5एन1 वायरस

एक नए वैज्ञानिक शोध में पता चला है कि एच5एन1 बर्ड फ्लू का वायरस बदलकर ऐसा रूप ले सकता है कि वो इंसानों के बीच तेजी से फैल सके.

शोधकर्ताओं ने ऐसे पांच जैविक परिवर्तनों की पहचान की है जिनके कारण ये वायरस इंसानों के बीच महामारी फैलने की वजह बन सकता है.

'साइंस' पत्रिका में प्रकाशित इस शोध का कहना है कि सैद्धांतिक रूप से प्रकृति में इस तरह के परिवर्तन संभव हैं.

एक अमरीकी एजेंसी ने शोध के हिस्सों को प्रकाशित होने से रोकने की नाकाम कोशिश की क्योंकि उसे आशंका थी कि इसका इस्तेमाल चरमपंथी जैविक हथियार बनाने में कर सकते हैं.

अहम शोध

इस शोध को करने वाली टीम का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर रॉन फोशियर ने कहा कि पूरी शोध रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद वैज्ञानिक समुदाय के पास भविष्य में इस फ्लू से होने वाली महामारी से निपटने के बारे में विचार करने का सर्वोत्तम मौका होगा.

उन्होंने बीबीसी को बताया, “उम्मीद है कि हमें पता चलेगा कि कौन से वायरस से महामारी हो सकती है और इसके बाद हम उसे रोकने के भी बेहतर तरीके तलाश पाएंगे.”

प्रोफेसर फोशियर का कहना है कि उनके शोध के बाद बर्ड फ्लू से फैलने वाली बीमारियों के खिलाफ टीके और विषाणु-रोधी दवाएं तैयार करने में मदद मिलेगी.

एच5एन1 से करोड़ों मुर्गियों की मौत हुई है जबकि उससे भी कहीं ज्यादा मुर्गियों को बर्ड फ्लू के वायरस को रोकने की मुहिम के तहत मार दिया गया.

ये वायरस इंसानों के लिए भी घातक है लेकिन उनमें ये बीमारी संक्रमित मुर्गियों या अन्य पक्षियों के बेहद निकट रहने से ही फैलती है.

इसीलिए बर्ड फ्लू से मरने वाले इंसानों की संख्या खासी कम रही. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ का कहना है कि 2003 के बाद से इस बीमारी से 332 लोग मारे गए हैं.

महामारी का डर

स्वास्थ्य अधिकारियों की आशंका है कि एच5एन1 एक दिन ऐसा रूप ले सकता है कि वो इंसानों के बीच खांसने और छींकने से फैलने लगे.

उन्हें डर है कि अगर ऐसा हो गया तो गंभीर महामारी फैल जाएगी जिससे दुनिया भर में तेजी से करोड़ों लोग मौत के मुंह में समा जाएंगे.

ये अध्ययन कहता है कि ऐसे घातक वायरस का अस्तित्व में आना सैद्धांतिक रूप से संभव है.

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Image caption बर्ड फ्लू की जब भी आहट होती है तो मुर्गियों को मारने का काम शुरू हो जाता है.

प्रोफेसर फोशियर के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम जानना चाहती थी कि ऐसे कौन से जैविक परिवर्तन हैं कि जिनसे एच5एन1 ऐसा रूप ले लेगा कि वो एक इंसान से दूसरे में फैल सके.

उन्होंने बर्ड फ्लू के वायरस की जैविक संरचना की तुलना इससे पहले इंसानों में महामारी के कारण बनने वाले फ्लू की जैविक संरचना से की.

उन्हें पांच अंतर मिले जो उनके मुताबिक जो हवा के जरिए इस वायरस को फैलने के काबिल बना सकते हैं.

और शोध की जरूरत

ये पहला मौका है जब शोधकर्ताओं ने साबित किया है कि बर्ड फ्लू वायरस हवा के जरिए फैल सकता है, लेकिन वे ये तय नहीं कर पाए कि वास्तव में ऐसा होने की कितनी संभावना है.

इस शोध का विश्लेषण करने वाली टीम के प्रमुख प्रोफेसर डेरेक स्मिथ का कहना है कि इस बारे में अभी और जानकारी की जररूत होगी.

उन्होंने कहा कि इन शोधकर्ताओं को इस बारे में बेहतर समझ विकसित करनी होगी कि कैसे फ्लू के वायरस एक इंसान से दूसरे में फैलते हैं ताकि हवा में खासी या जुकाम से उड़ते वायरस से लोगों के संक्रमित होने की संभावना के बारे में स्पष्ट अवधारणा तैयार किया जा सके.

लेकिन प्रोफेसर स्मिथ के मुताबिक इस शोध से आगे के प्रयोगों में मदद मिलेगी.

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