ओलंपिक पूर्व शोध: आलस्य से उतनी ही मौतें जितनी धूम्रपान से

Image caption शोध के मुताबिक संसार में 53 लाख मौतें शारीरिक व्यायम न करने की वजह से हो रही है

एक नए मेडिकल शोध में कहा गया है कि व्यायाम न करने की वजह से संसार में उतनी ही मौते हो रही हैं जितनी धूम्रपान या फिर मोटापे की वजह से.

ओलंपिक से पहले मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित इस शोध में अनुमान लगाया गया है कि एक तिहाई वयस्क पर्याप्त रुप से शारीरिक गतिविधियां नही करते, जिसकी वजह से सालाना 53 लाख मौंतें हो रही हैं.

हर दस मौतों में से एक व्यक्ति की मौत दिल संबंधी बीमारी, डायबिटीज या फिर कुछ तरीके के कैंसर से हो जाती है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि ये समस्या अब इतनी बड़ी हो चुकी है कि इससे महामारी की तर्ज पर निपटना चाहिए.

शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके लिए एक नई सोच की जरुरत है. लोगों को शारीरिक व्यायाम के फायदे बताने की बजाय उन्हें आलस्य के खतरे बताने चाहिए.

नई सोच की जरुरत

पूरी दुनिया से शामिल 33 शोधकर्ताओं की टीम का ये भी कहना है कि सरकारों को चाहिए कि वह शारीरिक गतिविधियों को सुविधाजनक, सुरक्षित और वहन करने योग्य बनाने के तरीके खोजे.

शोध के अनुसार वयस्कों को हर सप्ताह दो से ढाई घंटे साधारण व्यायाम जैसे साइकिल चलाना, टहलना या फिर बागवानी जैसे काम करने चाहिए.

लैंसेट के शोध में पाया गया कि धनी देशों के लोग सबसे ज्यादा आलसी होते है. सबसे खराब स्थिति ब्रिटेन की है जहाँ करीब दो तिहाई वयस्क पर्याप्त काम नही करते.

हांलाकि शोधकर्ताओं ने स्वीकार किया कि देशों की तुलना काफी कठिन काम रहा क्योंकि शारीरिक गतिविधियां एक जगह की तुलना में दूसरी जगह अलग- अलग हो सकती हैं.

मुख्य शोधकर्ताओं में से एक पेड्रो हल्लाल का कहना है कि 2012 के ओलंपिक खेल होने वाले हैं और इससे खेलों व शारीरिक गतिविधियों के प्रति लोगों में रुझान बढे़गा.

उनका कहना है कि हांलाकि पूरा संसार इन खिलाडियों को खेलों में हिस्सा लेते देखेगा लेकिन अधिकांश दर्शक निष्क्रिय ही रहेंगे.

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