ओलंपिक स्टेडियम से मोबाइल पर बात, इंटरनेट सर्फिंग हो पाएगी?

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Image caption विशेषज्ञों का अनुमान है कि लंदन ओलंपिक में जितने इंटरनेट डेटा का प्रयोग होगा, वो अब तक का सबसे ज्यादा होगा.

सोचिए! आप लंदन में ओलंपिक खेल देख रहें हों, आपको सौ मीटर की दौड़ देखने के लिए स्टेडियम में एक अच्छी जगह भी मिल जाए, लेकिन जैसे ही आप अपने किसी परिजन को फोन करने जा रहे हों, तो मोबाइल का नेटवर्क व्यस्त मिले.

ऐसा होने को टालने के लिए लंदन ओलंपिक 2012 के आयोजक पुरजोर कोशिश कर रहे हैं.

उम्मीद की जा रही है कि ओलंपिक के दौरान लाखों लोग लंदन में आएंगे, जिनके पास स्मार्टफोन और टैबलेट होगा. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ज्यादातर लोग अपनी तस्वीरें और अनुभव बांटने के लिए फोन कॉल और मोबाइल इंटरनेट का प्रयोग करेंगे.

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Image caption बीटी के मुताबिक लंदन 2012 खेलों के दौरान वहां के मोबाइल नेटवर्क की क्षमता बीजिंग खेलों की तुलना में चार गुना ज्यादा होगी.

इससे ब्रिटेन के इंटरनेट नेटवर्कों पर काफी दबाव पड़ेगा, जिसका असर अकेले अतिथियों पर ही नहीं दिखेगा बल्कि आपातकालीन सेवाएं भी इस समस्या की जद आ सकती हैं.

डेटा उपयोग

विशेषज्ञों का अनुमान है कि लंदन ओलंपिक में जितने इंटरनेट डेटा का प्रयोग होगा, वो अब तक का सबसे ज्यादा होगा. एक अनुमान के अनुसार सिर्फ ओलंपिक पार्क के आस-पास से ही प्रति सेकंड 60 गीगाबाइट के इंटरनेट डेटा का आदान-प्रदान होगा.

नेटवर्किंग कंपनी एपिटर के गेविन जॉन कहते हैं, “ओलंपिक के दौरान प्रयुक्त होने वाले इंटरनेट डेटा का आकार असाधारण होगा, खास तौर पर अहम मुकाबलों के दौरान. नतीजे निकलने के बाद डेटा प्रयोग में दूसरी बार एक बड़ा उछाल आएगा, जब लोग नतीजों की विवेचना करे रहे होंगे.”

ओलंपिक के दौरान कनेक्टिविटी दुरूस्त रखने के लिए लंदन 2012 की आधिकारिक संचार कंपनी बीटी नेटवर्क को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है.

चीन के बीजिंग में हुए पिछले ओलंपिक खेलों के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी खराब होने के कारण वहां गए कई अतिथी को निराशा झेलनी पड़ी थी.

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Image caption लंदन ओलंपिक में अच्छी इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए बीटी ने दूसरी कई कंपनियों से अनुबंध किए हैं.

एक पैरालिंपिक स्वयंसेवक बेन स्मिथ ने कहा, “बीजिंग में खेलों के दौरान कॉल करने में तो कोई खास दिक्कत नहीं हुई, लेकिन वहां स्टेडियमों में सार्वजनिक वाई-फाई इंटरनेट नहीं होना खला.”

नेटवर्क क्षमता

बीटी के मुताबिक लंदन 2012 खेलों के दौरान वहां के मोबाइल नेटवर्क की क्षमता बीजिंग खेलों की तुलना में चार गुना ज्यादा होगी.

ओलंपिक के दौरान जरूरत पड़ने वाली नेटवर्क क्षमता का अनुमान लगाने के लिए वहां वर्तमान में हो रहे दूसरे खेलों के स्टेडियम में परीक्षण किए जा रहे है.

पहले स्टेडियमों को चार भाग में बांटकर उसमें मोबाइल नेटवर्किंग के उपकरण लगाए जाते थे, लेकिन अब इसे 48 हिस्सों में बांटकर परीक्षण किए जा रहे हैं. इस तकनीक को सुपर-सेक्टराइजिंग कहते हैं. हर हिस्से में एंटिना लगाए जाते है जिससे इंटरनेट कनेक्टिविटी और बेहतर हो जाती है.

इसी तकनीक को ओलंपिक के दौरान भी प्रयोग किए जाने की योजना है. विशेषज्ञ उम्मीद कर रहे हैं कि इस नए तकनीक से नेटवर्किंग से संबंधित समस्याएं दूर हो जाएंगी.

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