एचआईवी के मरीजों को मिल सकता है जीवनदान

एचआईवी
Image caption एचआईवी वायरस कैंसर कोशिका की तरह इम्यून सिस्टम में छिप जाता है

अमरीका में वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने एड्स फैलाने वाले एचआईवी वायरस के संभावित इलाज की ओर पहला कदम उठाया है. इन वैज्ञानिकों ने नेचर पत्रिकार में अपने शोध के बारे में लिखा है.

एचआईवी वायरस कई सालों तक मरीज के शरीर में बिना कोई हरकत किए पड़ा रहता है जिससे इसका इलाज करने में मुश्किलें आती हैं.

बीबीसी के जेसन कैफ्री के अनुसार नेचर पत्रिका में वैज्ञानिकों ने लिखा है कि कैंसर के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली दवा (वोरीनोस्टैट) के इस्तेमाल से इस सुस्त पड़े वायरस को बाहर निकाला जाता है.

इन वैज्ञानिकों ने आठ मामलों में इस वायरस पर हमला कर उसे सामान्य एंटी-रेट्रोवायरल दवाओं से खत्म कर दिया.

लेकिन वैज्ञानिकों की इस टीम का कहना है कि दुनिया में एचआईवी से ग्रस्त तीन करोड़ लोगों के इलाज के लिए कारगर दवा को विकसित करने के लिए कई सालों तक शोध करने की जरूरत पड़ सकती है.

एचआईवी इम्यून सिस्टम से छिपा रहता है

एचआईवी वायरस को खत्म करने के शोध में जुटे इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के जॉन फ्रेटर ने बीबीसी को बताया, "एचआईवी का इलाज दशकों से शोधकर्ताओं को परेशान कर रहा है. कारण यह है कि एचआईवी हमारे जीन्स में जुड़ जाता है और कैंसर कोशिका जैसे प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम से छिपा रहता है और इसका इलाज नहीं हो पाता है."

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता फ्रेटर का कहना है, "जब एचआईवी वायरस सक्रिय नहीं होता तो अब तक उपलब्ध कोई भी इलाज इसके खिलाफ काम नहीं कर पाता. लेकिन जब ये सक्रिय होता है तो हम इस पर नियंत्रण ही नहीं कर पाते हैं."

उनका कहना है, "ये पहला मौका है जब हम सुस्त पड़े एचआईवी वायरस पर ही नियंत्रण पाने की ओर कदम उठा पाएँगे जो संभवत: हमें इसके इलाज की ओर ले जाएगा. "

समाचार एजंसी एएफपी के अनुसार, एचआईवी शोधकर्ता और इस शोध के सह-लेखक डेविड मार्गोलिस का कहना है, "संभावना है कि ये कारगर साबित हो..लेकिन यदि ये 99 फीसदी सही है और एक प्रतिशत एचआईवी वायरस इस प्रक्रिया में बचकर निकल जाता है तो ये सफल नहीं होगा."

शोध के सह-लेखक मार्गोलिस कहते हैं कि इसीलिए ये शोध क्या है और इसके बारे में कोई दावा करने के बारे में सावधान बरती जानी चाहिए.

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