गर्भवती महिलाओं के लिए लाफ़्टर स्कूल

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Image caption इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में अफ्रीका का पहला लॉफ्टर स्कूल गर्भवती महिलाओं के लिए काफी मददगार साबित हो रहा है

इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में अफ्रीक़ा का पहला लाफ़्टर स्कूल शुरु हुआ है. गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्कूल काफ़ी मददगार साबित हो रहा है. स्कूल को ‘लाफ़्टर फॉर आल’ का नाम दिया गया है.

स्कूल के प्रबंध निदेशक बेलाचीव ग्रेमा ने बीबीसी को बताया, “ हम ज़ोरदार हंसी से गर्भवती महिलाओं से साथ प्रयोग कर रहे हैं. जब हम किसी महिला के गर्भ को हाथ से सहलाते हैं तो इससे हंसी पैदा होती है. इससे पैदा होने वाले उछाल से बच्चा भी पेट में ख़ुशी से हरकत करता है.”

ग्रेमा ने बताया कि भारी संख्या में महिलाएं इस स्कूल की सदस्य बन रहीं हैं. लेकिन अन्य लोगों को भी इस स्कूल से काफ़ी फ़ायदा हो रहा है.

ग्रेमा बताते हैं, “हमारे साथ कापस्ते शंत जैसे शख्स भी हैं. इस लॉफ्टर स्कूल में आने के बाद वह काफ़ी स्वस्थ्य, दिमाग़ी तौर पर शांत, तनावमुक्त और पहले से कहीं बेहतर महसूस कर रहे हैं.”

इस लाफ़्टर स्कूल को शुरु करने के पीछे ग्रेमा की अपनी दर्द भरी कहानी है. असल में उन्होंने अपने दर्द को दूसरों के लिए हंसी में बदला है.

ग्रेमा ने बताया, “ दस साल पहले मेरे साथ अग्निकांड हादसा हो गया. इस कारण मैं हंसना भूल गया. इसके बाद एचआईवी से मेरी पत्नी की मौत हो गई. मैं खुद एड्स का शिकार हो गया. मैं पूरी तरह टूट चुका था और अलग-थलग पड़ गया था. ”

लेकिन एकाएक ग्रेमा की ज़िंदगी में कुछ ऐसा हुआ जो उन्हें प्रेरित करने के लिए काफ़ी साबित हुआ.

इस बारे में उन्होंने बताया, “ इसी दौरान मैं दो किताबे पढ़ रहा था. एक साइकॉलजी पर थी और दूसरी थी जॉय आफ़ साल्वेशन. इन्हें पढ़ने के बाद मैं अकेले में ही हंस पड़ता था. लोग मुझ से पूछते कि कहीं मैं सनक तो नहीं गया हूं.”

ग्रेमा ने कहा, “मैंने पाया कि जब लोग ख़ुद पर हंसना सीख लेते हैं तो वे पहले से अधिक सही ढंग से बाकी लोगों के साथ संवाद कायम कर सकते हैं. इससे उन्हें ऊर्जा मिलती है और इसका असर जहन पर पड़ता है. लोग पहले से अधिक नया सोचना शुऱु करते हैं.”

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