अमरीका में घोंघों का 'हमला'

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अमरीका के मध्य और दक्षिणी इलाके में अफ़्रीकी घोंघे के हमलों ने नागरिकों और प्रशासन की नींद उड़ा दी है.

औसतन एक अफ़्रीकी घोंघा कुछ इंच ही लंबा होता है लेकिन कई दक्षिण अमरीकी देशों और अमरीका के फ़्लोरिडा शहर में उन्होंने तबाही मचा रखी है.

घोंघे की जनसंख्या बहुत तेज़ी से बढ़ती है- वो साल भर में व्यस्क अवस्था में पहुंच जाता है, और हर माह 200 से 300 अंडे देता है.

मूलत: पूर्वी अफ्रीका में पाए जाने वाले इन घोंघों को प्रकृति के संरक्षण के लिए तैयार अंतरराष्ट्रीय संस्था ने उन प्रजातियों की श्रेणी में रखा है जो तेज़ी से फैलते हैं.

कोलंबिया के एक शहर ब्युनावेंटूरा में ये प्रजाति पहली बार दो साल पहले देखी गई, और तबसे आठ टन से ज्य़ादा घोंघों को खत्म किया जा चुका है. इक्वाडोर में तो ये मुल्क के 24 में से आधे राज्यों में पाए जाते हैं.

ये प्रजाति कृषि को बर्बाद कर देती है. शहरों में, वो सड़कों के किनारे जमा हो जाते हैं और घरों के प्लास्तर को निकाल देते हैं.

राजमार्गों पर उनके जमा होने से वहां भारी फिसलन का डर पैदा हो जाता है.

मौत

ये घोंघे अक्सर मौत की वजह भी बनते हैं. उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में घोंघों के शरीर पर एक प्रकार के परजीवी मौजूद होते हैं जिन्हें 'रैट लंगवर्म' के नाम से जाना जाता है.

अगर वो किसी तरह से इंसानी शरीर के भीतर चला जाता है तो वो सीधे मस्तिष्क पर हमला करता है जिससे दिमागी बुखार हो सकता है.

इक्वाडोर में इस तरह के 100 मामले दर्ज किए गए हैं. वेनेज़ुएला, पेरू और ब्राज़ील से भी इस तरह के मामले सामने आए हैं.

पूर्वी एशिया में जहां घोंघे को कच्चा या हल्का पकाकर खाया जाता है, इस तरह के मामले काफी अधिक होते हैं.

अंतोकिया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर लूज़ एलीना कहती हैं, "आप घोंघे को छूते हैं और फिर भोजन के रुप में इस्तेमाल करते हैं, बीमारी से आपको जकड़ने के लिए यही काफ़ी है."

इलाज

समझा जाता है कि कोलंबिया में घोंघे का प्रकोप तब शुरू हुआ जब जड़ी-बूटियों के कुछ व्यापारी इन्हें बेचने के लिए मुल्क में ले आए.

कई लोगों का मानना है कि इससे त्वचा से जुड़ी बीमारियों का इलाज किया जा सकता है. नब्बे के दशक में तो कई कंपनियों ने घोंघे के शरीर पर मौजूद चिपचिपे पदार्थ को पैक कर क्रीम के तौर पर बेचना शुरू कर दिया था.

कहा जाता है कि जब व्यापारी इन्हें नहीं बेच पाए तो एक नदी में फेंक दिया उसके बाद कोलंबो में घोंघों का प्रकोप इतना अधिक बढ़ा कि प्रशासन को इनसे निपटने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स तैयार करनी पड़ी.

फ्लोरिडा में 1960 के आसपास भी इसी समस्या से निपटा गया था. एक बच्ची को उसकी दादी ने घोंघे दिए थे जिसे उसने घर के पिछवाड़े फेंक दिया था, जो इस तेज़ी से फैले की समस्या बन बैठे.

उसे समाप्त करने में नौ साल का वक्त लगा था और उस काम में 10 लाख डॉलर ख़र्च हुए थे.

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