जलवायु परिवर्तन से चमगादड़ों को ख़तरा

 सोमवार, 27 अगस्त, 2012 को 15:54 IST तक के समाचार
चमगादड़

शोध कर्ताओं ने दुनिया के कई हिस्सों में जाकर चमगादड़ों पर अध्ययन किया.

जलवायु परिवर्तन चमगादड़ों की बहुत सी प्रजातियों के लिए खतरा बन रहा है. एक ताजा अध्ययन कहता है कि दुनिया के बढ़ते तापमान के दुष्प्रभाव चमगादड़ों पर पड़ने शुरू भी हो चुके हैं.

'मैमल रिव्यू' नाम की एक पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार चमगादड़ों में हो रहे बदलाव 'चौंकाने वाले' हैं लेकिन अगर धरती का तापमान बढ़ता रहा तो हालात और खराब हो सकते हैं.

इससे उनकी खाना तलाशने और खाने, बसेरा और प्रजनन करने की क्षमता प्रभावित हो रही है.

कुल स्तनपायी जीवों में से 20 प्रतिशत से ज्यादा प्रजातियां चमगादड़ों की हैं. उन्हें न सिर्फ पर्यावरण के लिहाज से बल्कि आर्थिक रूप से भी बहुत जरूरी समझा जाता हैं. वो बहुत से पेड़ों के पराग कणों और बीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में सक्षम हैं.

जलवायु परिवर्तन का असर

ब्रिटेन में बेलफास्ट के क्वींस विश्विविद्यालय के मैथ्यू लुंडी, हेयलर शेरविन और इयान मोंटगोमेरी ने चमगादड़ों पर पड़ने वाले जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की पड़ताल की.

उन्होंने पहले इस बारे में मौजूद वैज्ञानिक साहित्य को खंगाला और उसके बाद देखा कि यूरोप और अमरीका में चमगादड़ किस तरह रहते हैं और अगर दुनिया के तापमान में और इजाफा होता है तो इसका उन पर क्या असर होगा.

उन्हें चमगादड़ों की ज़िंदगी में आ रहे बहुत से बदलावों के बारे में पता चला. मिसाल के तौर पर इससे उनके खाना तलाशने की उनकी क्षमता प्रभावित हो रही है.

चमगादड़

जलवायु परिवर्तन से चमगादड़ों के रहने, खाने और प्रजनन की क्षमताएं प्रभावित हो रही हैं.

खास कर अपने बच्चों को दूध पिलाने वाली मादा चमगादड़ों को पानी के लिए ज्यादा दूरी तक उड़ना होगा. चमगादड़ों को अपने आकार वाली स्तनपायी प्रजातियों में सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है. उनमें पानी को संरक्षित करने की क्षमता भी नहीं होती है.

नींद में खलल

शोधकर्ताओं का कहना है कि यूरोप और अमरीका में चमगादड़ों की 47 में से 38 प्रजातियों को जलवायु परिवर्तन से सीधा खतरा है.

जलवायु में हो रहे बदलावों के कारण चमगादड़ों की नींद भी प्रभावित हो रही है. जानवर अपनी ऊर्जा को संरक्षित करने के लिए खास तरह की झपकी लेते हैं. तापमान बढ़ने से चमगादड़ इस झपकी से जल्दी जग रहे हैं.

इस अध्ययन रिपोर्ट के लेखकों का कहना है कि चमगादड़ों के प्रजनन पर जुलवायु परिवर्तनों के प्रभाव के बारे में अभी और अध्ययन किए जाने की जरूरत है.

हालांकि वे मानते हैं कि गर्म जलवायु से मादा चमगादड़ों को फायदा ही होगा. वे बच्चों को जन्म दे पाएंगी और जल्दी अपने बच्चों का दूध छुड़ा पाएंगीं. इस तरह उनके पास चर्बी जमा करने के लिए ज्यादा वक्त होगा.

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