मानसिक अक्षमता भी नहीं रोड़ा कामयाबी में

 गुरुवार, 30 अगस्त, 2012 को 11:19 IST तक के समाचार
डाउंस सिंड्रोम से ग्रस्त पाब्लो पिनेदा

डाउंस सिंड्रोम से ग्रसित होते हुए भी पाब्लो पिनेदा ने एक कामयाब जिंदगी हासिल की है.

पाब्लो पिनेदा स्पेन में एक जाना पहचाना चेहरा हैं. वो यूरोप के ऐसे पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने डाउंस सिंड्रोम से ग्रस्त होते हुए भी यूनिवर्सिटी की डिग्री हासिल की है.

साथ ही उन्होंने ‘यो तंबिएन’ (मैं भी) फिल्म में अहम किरदार भी निभाया है. ये फिल्म बताती है कि कैसे डाउंस सिड्रोम से ग्रस्त एक सामाजिक कार्यकर्ता अपने साथ काम करने वाली एक महिला के प्यार में पड़ जाता है.

डाउंस सिंड्रोम गुणसूत्रीय दोष के चलते पैदा होने वाली विकृति को कहते हैं जिसके कारण व्यक्ति का शारीरिक और मानसिक विकास धीमा हो जाता है. डाउंस सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों का बौद्धिक स्तर सामान्य लोगों के मुकाबले आधा होता है. उनका चेहरा और कई दूसरे अंग भी सामान्य नहीं दिखते. इस सिंड्रोम से ग्रस्त ज्यादातर लोग मानसिक रूप से अक्षम होते हैं.

लेकिन पाब्लो ने अपनी लगन और मेहनत से सभी बाधाओं को पार किया है. जल्द ही वो दूसरी डिग्री भी हासिल कर लेंगे. पाब्लो सिनेमा के पर्दे पर अपना करियर बनाने में तो जुटे ही हैं, साथ उनका अगला मिशन ड्राइविंग टेस्ट पास करना है.

चुनौतियां

उन्होंने बीबीसी को बताया, “मैं लाइसेंस हासिल करना चाहता हूं क्योंकि मैंने कभी डाउंस सिंड्रोम से ग्रस्त व्यक्ति को गाड़ी चलाते नहीं देखा. ये सचमुच एक चुनौती है और आत्मनिर्भरता की दिशा में और एक कदम है.”

"मैं लाइसेंस हासिल करना चाहता हूं क्योंकि मैंने कभी डाउंस सिंड्रोम से ग्रस्त व्यक्ति को गाड़ी चलाते नहीं देखा. ये सचमुच एक चुनौती है और आत्मनिर्भरता की दिशा में और एक कदम है."

पाब्लो पिनेदा

पाब्लो इस बात की मिसाल हैं कि इस सिंड्रोम से ग्रस्त व्यक्ति किस तरह शिक्षा और पेशेवर दुनिया में कामयाबी हासिल कर सकते हैं.

इससे पहले डाउंस सिंड्रोम से ग्रसित अमरीका की कैरन गाफने ने टीचिंग डिप्लोमा हासिल किया था और वो इस सिंड्रोम से पीड़ित पहली व्यक्ति थी जिसने 14 किलोमीटर लंबी झील को तैर कर पार किया. वहीं जापान की अया इवामोतो ने अंग्रेजी साहित्य में डिग्री हासिल की.

पाब्लो अपने माता पिता का शुक्रिया अदा करते हैं जिन्होंने उनकी परवरिश बाकी बहन भाइयों की तरह की. वो बताते हैं, “सामान्य बच्चों के स्कूल में मेरा दाखिला कराने के लिए मेरी मां को बहुत संघर्ष करना पड़ा. यहां तक उस स्कूल में अध्यापकों के बीच मेरे दाखिले को लेकर मतदान हुआ. मेरा दाखिला तो हो गया, लेकिन मुश्किल तब आई जब मेरे दाखिले के खिलाफ मत देने वाले अध्यापक क्लास में पढ़ाने आते थे. हालांकि बाद में मैंने उनका भी दिल जीत लिया.”

वैसे पाब्लो के माता पिता ने कभी ये नहीं सोचा था कि उनका ये बच्चा यूनिवर्सिटी तक पहुंचेगा लेकिन हमेशा उनकी यही कोशिश रही कि वो सब लोगों के संपर्क में रहे.

प्रोत्साहन की दरकार

ब्रिटेन के डाउंस सिंड्रोम संघ ने पाब्लो के मामले को असमान्य और अपवाद बताया. पाब्लो इस बात पर खासी नाराज़गी जताते हैं. वो कहते हैं, “वे लोग ऐसा और शोध करने से बचने के लिए कह रहे हैं. वे इस तरह के लोगों की मदद करने की कोशिश नहीं करना चाहते हैं.”

पाब्लो का कहना है कि आखिरकार डाउंस सिड्रोम से पीड़ित बच्चों के माता पिता को ही उनकी ज़िंदगी आसान बनानी होगी, उन्हें पढ़ाना होगा, प्रोत्साहित करना होगा. इसके बाद वो चाहे जो करें.

डाउंस सिंड्रोम से पीड़ित पाब्लो पिनेदा

अपनी फिल्म की डीवीडी के साथ पाब्लो.

अपनी मिसाल देते हुए पाब्लो कहते हैं, “मैंने अपना करियर बनाया, एक फिल्म भी बनाई. अहम बात ये महसूस करना है कि आप कुछ कर सकते हैं.”

बेशक पाब्लो को यूरोप का ऐसा पहला व्यक्ति होने पर गर्व है जिसने डाउंस सिंड्रोम से ग्रस्त होने के बावजूद यूनिवर्सिटी डिग्री हासिल की. लेकिन उनका कहना है कि समाज में अपनी जगह बनाने के लिए लड़ना पड़ता है.

वो बताते हैं, “मैंने खुद को 'सामान्य' दुनिया में फेंक दिया है जबकि इस सिंड्रोम से ग्रस्त दूसरे लोगों ने अपने संघ और सोसायटी बना रखी हैं और अपनी छोटी सी दुनिया में रहते हैं.”

पाब्लो आगे बताते हैं, “मैं यह नहीं कहूंगा कि खुद को अलग-थलग महसूस करता हूं, लेकिन हां इतना ज़रूर है कि डाउंस सिंड्रोम की पहचान के साथ सामान्य समाज में जूझना पड़ता है.”

भेदभाव

वो बताते हैं कि किस तरह कई बार उन्हें भेदभाव झेलना पड़ता है. उनके मुताबिक, “अगर मैं बार में पीने जाता हूं (हालांकि अब कम ही जाना होता है) तो लोग पूछने लग जाते हैं कि ये लड़का अकेला आया है या किसी के साथ है. इसके अलावा सड़क पर लोग देखते हैं तो मेरी बांह पकड़ कर सड़क पार कराने लग जाते हैं या फिर जब वोट देने जाता हूं तो लोग पूछते हैं कि क्या ये बच्चा वोट डालेगा. या फिर अगर आप माता पिता के साथ रेस्त्रां में जाते हैं तो वेटर आपको वाइन के बजाय पानी देता है.”

"मैं यह नहीं कहूंगा कि खुद को अलग थलग महसूस करता हूं, लेकिन हां इतना जरूर है कि डाउंस सिंड्रोम की पहचान के साथ सामान्य समाज में जूझना पड़ता है."

पाब्लो पिनेदा

अभी पाब्लो अपनी मां के साथ रहते हैं. उनके पिता का हाल में निधन हो गया. उनके बाकी बहन भाइयों की शादी हो गई जो अलग रहते हैं.

पाब्लो अकेडो फाउंडेशन के साथ मिल कर कोशिश कर रहे हैं ताकि लोग विकलांगता को एक अवसर के तौर पर देखें. वो बताते हैं, “मैं नौकरी देने वाली कंपनियों से अकसर कहता हूं कि अक्षम लोग भी बहुत कुछ सकते हैं. हमारे अंदर बहुत प्रतिभा है जिसका उपयोग किया जाना चाहिए.”

वो बताते हैं, “हमें इस बात को बढ़ावा देना होगा कि किसी से भिन्न होना एक विशेषता है, न कि समस्या. और भी बहुत सी चीजों को बदलना होगा.”

लेकिन पाब्लो का कहना है कि व्यापक बदलाव के लिए सिस्टम को बदलने की जरूरत है. उनके मुताबिक सबसे पहले शिक्षा तंत्र को और विविध बनाना होगा ताकि उसमें सबके लिए जगह हो.

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