अंतरिक्ष के अरबों डॉलर में अब भारत का भी हिस्सा

 रविवार, 9 सितंबर, 2012 को 13:13 IST तक के समाचार
पीएसएलवी

पीएसएलवी फ्रांस एवं जापान के उपग्रहों को लेकर 9.51 बजे अंतरिक्ष के लिए रवाना हो गया.

जब भारत ने रविवार को अपना 100वां अंतरिक्ष मिशन लांच किया तो यह कोई साधारण अभियान नहीं था.

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान-सी 21 (पीएसएलवी), फ्रांस एवं जापान के उपग्रहों को लेकर सुबह 9.51 बजे अंतरिक्ष के लिए रवाना हो गया.

इस रॉकेट को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से लॉन्च किया गया.

वैज्ञानिक मामलों के जानकार पल्लव बागला का कहना है, ''इस अभियान से भारत ने अंतरिक्ष के कई अरब डॉलर के लॉच उद्योग में कदम रखा है.''

पल्लव ने कहा कि इस सफल प्रक्षेपण से भारत ने दिखा दिया है कि उसमें इसकी काबलियत है.

इस अवसर पर वहां मौजूद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस सफलता पर इसरो के सभी सदस्यों को बधाई देते हुए कहा, ''कई बार सवाल उठाए जाते हैं कि भारत जैसा गरीब देश अंतरिक्ष कार्यक्रम का खर्च उठा सकता है. और क्या इस पर किया जाने वाला खर्च, जो भले ही साधारण है, कहीं और किया जाना चाहिए. हम यह भूल जाते हैं कि किसी भी देश की प्रगति उसकी तकनीकी कौशल का परिणाम होती है.''

वजन

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

"कई बार सवाल उठाए जाते हैं कि भारत जैसा गरीब देश अंतरिक्ष कार्यक्रम का खर्च उठा सकता है... हम यह भूल जाते हैं कि किसी भी देश की प्रगति उसकी तकनीकी कौशल का परिणाम होती है"

खर्च के मामले पर पल्लव ने कहा, ''इसरो ने जितना खर्च किया है उससे कहीं अधिक देश को दिया है. इतने सालों में भारत ने अभी तक 12 अरब डॉलर खर्च किए हैं और यह तमाम सफलता प्राप्त की है जबकि अमरीका के नासा का सालाना बजट 17 अरब डॉलर है.''

प्रक्षेपण के समय, ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) रॉकेट का वजन 230 टन था.

इस रॉकेट के साथ 715 किलोग्राम का फ्रांसीसी उपग्रह स्पॉट जा रहा है जो पीएसएलवी से प्रक्षेपित किया जाने वाला अबतक का सबसे भारी विदेशी उपग्रह है. दूसरी तरफ जापानी उपग्रह का वजन 15 किलोग्राम है.

भारत ने इससे पहले 62 उपग्रह और 37 रॉकेट का निर्माण किया है यानी कुल 99 भारतीय अंतरिक्ष अभियान हुए हैं.

भारत ने अपना अंतरिक्ष अभियान वर्ष 1975 में रूसी रॉकेट के ज़रिए आर्यभट्ट उपग्रह के प्रक्षेपण के साथ शुरू किया था.

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