किसने कहा ज़मीन पर उगाएं टमाटर: सैम पित्रोदा

 रविवार, 23 सितंबर, 2012 को 07:30 IST तक के समाचार
गज़ा पट्टी में टमाटर का खेत

नई तकनीक की मदद से बिना मिट्टी के, बहुमंज़िली इमारतों में सब्ज़ियां उगाई जा रही हैं

प्रधानमंत्री के जन सूचना ढाँचे और नवरचना मामलों के सलाहकार सैम पित्रोदा का कहना है कि अब समय आ गया है कि भारत खेती में क्रांतिकारी तकनीकों को अपनाए.

पित्रोदा ने दशकों पहले भारत में टेलीफ़ोन को सरकारी दफ्तरों और बड़े लोगों के घरों से निकाल कर एसटीडी-पीसीओ के ज़रिये भारत की गली गली गाँव गाँव में पहुंचा दिया था.

सैम या सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा की नई सलाह है कि अब भारत में ज़मीन पर खेती को छोड़कर बहुमंज़िली इमारतों में खेती शुरु करनी चाहिए.

हो सकता है कि आप उनकी सलाह से चौंक जाएँ लेकिन उनका कहना है कि ये भविष्य की कोई तकनीक नहीं है बल्कि ऐसा मौजूदा समय में हो रहा है.

बिना मिट्टी के खेती करने का तरीका हाइड्रोपोनिक्स कहलाता है. इसमें फसलें उगाने के लिए द्रव्य पोषण या पौधों को दिए जाने वाले खनिज पहले ही पानी में मिला दिए जाते हैं.

सैम पित्रोदा मानते हैं कि भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश को न सिर्फ़ रहने के लिए बल्कि खेती के लिए भी बहुमंज़िली इमारतों का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि खाली ज़मीन वन, खेल के मैदान, पार्क आदि के लिए इस्तेमाल की जाती है.

सैम पित्रोदा

सैम पित्रोदा ज़मीन के दूसरे उपयोगों के बारे में सोच रहे हैं

बीबीसी से हुई एक खास बातचीत में उन्होंने कहा, "मैं वर्टिकल फ़ार्मिंग की वक़ालत करूंगा. यानी ज़मीन पर खेती करने की जगह ऊंची-ऊंची इमारतों में खेती. अभी आप चार एकड़ ज़मीन पर टमाटर उगा रहे हैं. मैं कहता हूं कि आधा एकड़ ज़मीन लीजिए, ऊंची इमारत बनाइए और हर मंज़िल पर टमाटर उगाइए. यहां तक कि बिना मिट्टी के भी टमाटर उगाया जा सकता है.”

क्या है वर्टिकल फ़ार्मिंग?

वर्टिकल फ़ार्मिंग में खेती सपाट ज़मीन पर न होकर बहुमंज़िली इमारतों में होती है. इसे एक तरह का बहुमंज़िला ग्रीन हाउस भी कहा जा सकता है.

अमरीका, चीन, मलेशिया और सिंगापुर जैसे दुनिया के कई देशों में पहले से ही वर्टिकल फ़ार्मिंग हो रही है. इसमें एक बहुमंज़िला इमारत में नियंत्रित स्थितियों में फल-सब्ज़ियां उगाए जाते हैं. इमारत की दीवारें कांच की होती हैं और अत्याधुनिक तकनीक से सिंचाई की जाती है. कांच की दीवारों के ज़रिए फसलों को लगातार सूर्य की रोशनी मिलती रहती है.

भारत में हालांकि अभी वर्टिकल फ़ार्मिंग तो नहीं हो रही लेकिन हाइड्रोपोनिक्स तरीके से पंजाब में आलू उगाया जा रहा है.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी आईसीएआर के उपमहानिदेशक, डाक्टर स्वपन दत्ता कहते हैं कि वर्टिकल फ़ार्मिंग के बहुत फ़ायदे हैं.

"वर्टिकल फ़ार्मिंग से खाने-पीने के चीज़े सस्ती हो जाएंगी, सारे साल फल-सब्ज़ियां उगाई जा सकेंगी औरइससे कीटनाशकों का इस्तेमाल कम हो जाएगा जिसका फ़ायदा हमारी सेहत और पर्यावरण को होगा. काफ़ी हद तक खाद्य संकट भी ख़त्म हो पाएगा"

डाक्टर स्वपन दत्ता, वैज्ञानिक, आईसीएआर

उन्होंने बताया, “बड़े पैमाने पर अगर ये होगा तो खाने-पीने के समान का दाम भी कम हो जाएगा. सारे साल आलू, टमाटर और पत्तेदार सब्ज़ियां आदि उगाई जा सकेंगी और परिवहन का खर्चा कम हो जाएगा. इससे पौधों में होने वाली बीमारियां और कीट खत्म हो जाएंगे जिससे कीटनाशकों का इस्तेमाल कम हो जाएगा जिसका फ़ायदा हमारी सेहत और पर्यावरण को होगा. काफ़ी हद तक खाद्य संकट भी ख़त्म हो पाएगा.”

वे कहते हैं, “जो ज़मीन खेती के लायक नहीं है, उस पर इस तरह की इमारतें बनाकर खेती की जा सकती है. आज शहरों में रहने के लिए जो इमारते बन रही हैं, उनमें भी कुछ मंज़िलें इस काम के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं. ये देखने में भी अच्छा लगेंगी, और सिंचाई के पानी के लिए रेनवॉटर हार्वेस्टिंग हो सकती है.”

हो सकता है कि ये इस समय दूर की कौड़ी नज़र आ रही हो, लेकिन हो सकता है कि कुछ समय बाद भारत में ये एक सच्चाई में परिवर्तित हो जाए.

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