कौन करता है मंगल ग्रह से ट्वीट?

 रविवार, 23 सितंबर, 2012 को 19:10 IST तक के समाचार
नासा सोशल मीडिया

टीम सदस्य: कर्टनी ओ कॉनर, स्टेफ़ानी स्मिथ और वेरोनिका मैकग्रेगोर.

"कभी ये छोटा क़दम था ...आज ये बड़ी छलांग है", ये है उस संदेश के शब्द जो अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के रोबोट क्यूरिओसिटी के मंगल ग्रह पर उतरने के बाद वहां से भेजे गए थे.

उसके बाद से @मार्सक्यूरिओसिटी एकाउंट से टेक्ट्स मैसेज भेजने, ट्वीट और रिट्वीट का सिलसिला रूका नहीं है. आज इस एकाउंट के दस लाख फॉलोअर्स हैं.

लेकिन वो कौन है जो लगातार भेजे जा रहे इन ट्वीट्स की ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर लिए है?

क्यूरिओसिटी से लोगों को जोड़ने का काम तीन महिलाओं की एक टीम कर रही है. इनका कार्यालय कैलिफ़ोर्निया के पैसेडेना में है.

बदलाव

ये टीम नासा के 20 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स को सोशल मीडिया से जोड़ने के लिए ज़िम्मेदार है, तब जबकि अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी बदलाव के दौर से गुज़र रही है.

रोबोट क्यूरिओसिटी

क्यूरिओसिटी से जुड़े एकाउंट के 10 लाख फ़ॉलोअर हैं.

इनका कहना है कि लोगों को ख़ुद से जोड़ने से परियोजनाओं में लगे लोगों को बहुत प्रोत्साहन मिलता है.

टीम की सदस्य वेरोनिका मैकग्रेगोर कहती हैं कि सोशल मीडिया ने अंतरिक्ष मिशनों को बारे में लोगों के नज़रिए में भारी तबदीली लाई है.

वो कहती हैं, "लोग हमें ट्वीट करके कहते हैं कि उन्हें ठीक वैसा ही महसूस हो रहा है जो चांद पर मनुष्य के पहली बार जाने के समय हुआ था. वो कहते हैं कि वो अंतरिक्ष मिशनों से ख़ुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं."

जानकारी

वो कहती हैं कि ये लोगों को जानकारियां देने का सबसे बेहतर ज़रिया है. वैसी जानकारियां जो उन्हें मीडिया में दी जाने वाली ख़बरों में नहीं मिलेंगी.

टीम की एक अन्य सदस्य कर्टनी ओ कॉनर कहती हैं कि क्यूरिओसिटी का एकाउंट फ़ेसबुक, ट्वीटर, यूट्यूब, यूस्ट्रीम और रेड्टि पर मौजूद है.

ये ग्रुप न सिर्फ़ लोगों को संदेश देने का काम कर रहा है बल्कि ये उन्हें परियोजना से जुड़ी जानकारियां हासिल करने के लिए संबंधित वेबसाइटों के बारे में भी जानकारी देता है.

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