बचीखुची शराब से चलेगी कार!

Image caption डिस्टलरी में बचे बाइप्रोडक्ट से ईंधन बनाया जाएगा

शराब के नशे में आपने लोगों को कई तरह के करतब करते देखा होगा पर क्या शराब से गाड़ियों को चलते देखा है?

स्कॉटलैंड की एक डिस्टिलरी में ऐसा ही कुछ होने वाला है. डिस्टिलरी में बचीखुची व्हिस्की से ईंधन तैयार होगा जिससे वाहन चल सकेंगे. ये अपने आप में पहला प्रयोग बताया जा रहा है.

स्कॉटलैंड में पर्थशर की एक डिस्टिलरी ने इसके लिए एडिनबरा शहर में नेपियर यूनिवर्सिटी के साथ गठजोड़ किया है. बचीखुची शराब में बैक्टीरिया के प्रयोग से बूटोनोल बनाया जाएगा जिसका इस्तेमाल गाड़ियों में बतौर ईंधन होगा.

व्हिस्की की डिस्टिलरी से निकलने वाला 90 फीसदी से ज़्यादा पदार्थ व्हिस्की नहीं होता. इसमें ज़्यादातर ड्राफ और ‘पॉट एल’ जैसे बाइप्रोडक्ट होते हैं जो शुरुआती दौर में बनते हैं.

इन चीज़ों में शुगर की मात्रा काफी ज़्यादा होती है और इनका इस्तेमाल उर्वरक बनाने में होता है.

पर्यावरण को भी फ़ायदा

नेपियर यूनिवर्सिटी का बायोफ्यूल रिसर्च सेंटर पहले ही ये दर्शा चुका है कि व्हिस्की बनाने के दौरान जिन अन्य चीज़ों का उत्पादन होता है, अगर उनमें सही किस्म के बैक्टीरिया छोड़े जाएँ तो बूटोनोल बनेगा. बूटोनोल को अन्य ईंधनों की जगह वाहनों में उपयोग किया जा सकता है.

माल्ट व्हिस्की उत्पादक टलीबार्डिन और सेल्टिक रिन्यूएबल्स नाम की कंपनी के बीच समझौता हुआ है. दोनों मिलकर इस प्रक्रिया का उपयोग डिस्टिलरी में बचीखुची हज़ारों टन शराब पर करेंगे.

सेल्टिक रिन्यूएबल्स के संस्थापक प्रोफेसर मार्टिन टेंगनी कहते हैं, “ये योजना दर्शाती है कि अगर नए तरीकों से तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो हम पहले से ही मौजूद संसाधनों के ज़रिए अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को फायदा पहुँचा सकते हैं.”

टलीबार्डिन कंपनी हर साल व्हिस्की उत्पादन के दौरान बचीखुची चीज़ों से निजात पाने के लिए दो लाख 50 हज़ार पाउंड खर्च करती है. कंपनी के प्रबंध निदेशक डगलस रॉस कहते हैं, “हम कुछ ऐसा करने जा रहे हैं कि जिसका सामाजिक और व्यावसायिक महत्व है.”

इस योजना को स्कॉटलैंड सरकार की ‘ज़ीरो वेस्ट स्कॉटलैंड’ परियोजना के तहत पैसे दिए जाएँगे.

सेल्टिक रिन्यूएबल्स का कहना है कि वो स्कॉटलैंड में ही प्रोसेसिंग प्लांट लगाना चाहती है. एक ऐसा उद्योग जो भविष्य में करोड़ों पाउंड का हो सकता है.

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