डिप्रैशन की काली छाया को कैसे पहचानें

 बुधवार, 10 अक्तूबर, 2012 को 15:25 IST तक के समाचार
डिप्रैशन

भारत में करीब पांच करोड़ लोग इससे पीड़ित माने जाते हैं.

अगर खुशी के मौके पर आप खुश न हो पाते हों और बेहद गमगीन मौका भी आपको दुखी न कर पाता हो तो आपको सतर्क होने की ज़रूरत है.

डॉक्टर कहते हैं कि ये अवसाद यानी डिप्रैशन के लक्षण हैं.

दुनिया भर में लगभग 35 करोड़ लोग अवसाद ग्रस्त रहते हैं. ये विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आँकड़े हैं और इनके मुताबिक़ अवसाद की बीमारी से ग्रस्त तीन-चौथाई से अधिक लोग विकासशाल देशों में रहते हैं.

विशेषज्ञ कहते हैं कि अवसाद की सबसे खराब स्थिति में पीड़ित आत्महत्या तक कर सकता है. लगभग 10 लाख लोग हर साल आत्महत्या करते हैं और उनमें से एक बड़े अनुपात में लोग अवसाद से पीड़ित होते हैं.

आज दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जा रहा है ताकि इस बीमीरी को लेकर लोगों में फैली भ्रांतियाँ दूर हों और इससे निपटने के तरीकों पर चर्चा हो.

भारत में करीब पांच करोड़ लोग इससे पीड़ित माने जाते हैं.

कारण और निवारण

कॉसमॉस अस्पताल के दिल्ली साइकीऐट्रिक केंद्र के निदेशक डॉ सुनील मित्तल के अनुसार यह हैं अवसाद के लक्षण और इससे बचने के तरीके:

अवसाद के तीन लक्षण
1. मूड यानी मिज़ाज. सामान्य उदासी इसमें नहीं आती लेकिन किसी भी काम या चीज़ में मन न लगना, कोई रुचि न होना, किसी बात से कोई खुशी न होनी, यहां तक गम का भी अहसास न होना अवसाद का लक्ष्ण है.
2. विचार यानी हर समय नकारात्मक सोच होना
3. शारीरिक जैसे नींद न आना या बहुत नींद आना. रात को दो-तीन बजे नींद का खुलना और अगर यह दो सप्ताह से अधिक चले तो अवसाद की निशानी है.

अवसाद से बचने के 6 तरीके

1.

नींद को नियमित रखना

2. अच्छा खाना और समय पर खाना
3.

तनाव तो सभी को होता है लेकिन ऐसा विचार रखना कि इसे कैसे कम रखना है

4.

महत्वकांक्षा को उतना ही रखना जितना हासिल करना संभव हो

5.

परिवार के साथ जुड़े रहना

6.

अपने कार्य में व्यस्त और मस्त रहना

डॉ मित्तल के अनुसार अवसाद के लिए लंबे समय तक दवाईयां लेनी पड़ सकती हैं लेकिन इसके 90 प्रतिशत लोग दवा और उपचार के बाद बिल्कुल ठीक हो जाते हैं.

विकार का खतरा

विकासशील देशों में रहने वाले लोगों के हर 10 में से आठ को कोई उपचार प्राप्त नहीं होता.

डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि अवसाद दुनिया के सभी क्षेत्रों में आम है.

डब्ल्यूएचओ के एक हाल के अध्ययन से पता चला है कि पिछले वर्ष लगभग पांच प्रतिशत लोगों को अवसाद था.

अवसाद सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और जैविक कारकों के एक जटिल मिश्रण का परिणाम होता है.

डब्ल्यूएचओ के अनुसार अवसाद और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच एक रिश्ता होता है. उदाहरण के तौर पर हृदय रोग से अवसाद हो सकता है और अवसाद से हृदय रोग.

इसके अलावा आर्थिक दबावों, बेरोजगारी, आपदाओं और संघर्ष से भी विकार का खतरा बढ़ सकता है.

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