कार में सिगरेट का कश होता है 'ख़तरनाक'

 बुधवार, 17 अक्तूबर, 2012 को 07:39 IST तक के समाचार

क्या आप उन लोगों में से हैं जो अपनी कार में बैठे हुए सिगरेट का कश लगाना पसंद करते हैं ?

वैज्ञानिकों की मानें तो कार में बैठकर धूम्रपान करने से जो धुँआ होता है वो सुरक्षित सीमा से कहीं ज़्यादा होता है- फिर चाहे आपने कार की खिड़की खोल कर रखें या फिर एयर कंडिशनिंग चल रही हो.

ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन का मानना है कि कार में बैठकर धूम्रपान करने पर पाबंदी होनी चाहिए.

कार की पिछली सीट पर बैठे हुए बच्चे या आगे की सीट पर बैठे किसी व्यक्ति की सेहत के लिए ये धुँआ अच्छा नहीं है.

टोबैको कंट्रोल पत्रिका के मुताबिक स्कॉटलैंड की एक टीम ने 85 बार कारों में सफर के दौरान प्रदूषण का स्तर जाँचा और पाया कि ये स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय स्तर से तीन गुना से भी ज़्यादा है..

शोधकर्ताओं ने कार की पिछली सीट पर एक उपकरण लगाया, स्तर मापा और कार के सड़क सफर के दौरान हवा की गुणवत्ता का विश्लेषण किया.

85 में से 49 मामलों में ड्राइवरों ने चार तक सिगरेट पी. जहाँ ड्राइवर ने सिर्फ़ एक ही सिगरेट पी और कार की खिड़की खुली रखी, वहाँ भी पार्टिकूलेट मैटर का स्तर सुरक्षित सीमा से कहीं ज़्यादा था.

पाबंदी कितनी सही?

"धूम्रपान का बच्चों पर सबसे ज़्यादा असर पड़ता है क्योंकि बच्चों की साँस लेने की गति ज़्यादा होती है और वे आमतौर पर धूम्रपान वाली जगह से खुद से हटने में सक्षम नहीं होते."

डॉक्टर शॉन, यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन

ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन कार में बैठकर धूम्रपान करने पर पाबंदी लगाने के पक्ष में है.

यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन के डॉक्टर शॉन कहते हैं, “धूम्रपान का बच्चों पर सबसे ज़्यादा असर पड़ता है क्योंकि बच्चों की साँस लेने की गति ज़्यादा होती है और वे आमतौर पर धूम्रपान वाली जगह से खुद से हटने में सक्षम नहीं होते.”

शोधकर्ताओं का कहना है कि कार में धूम्रपान पर रोक लगाने पर विचार होना चाहिए.

लेकिन सब लोग इससे सहमत नहीं है. धूम्रपान करने वालों के एक गुट के निदेशक साइमन क्लार्क कहते हैं, “हम नहीं चाहते कि लोग कार में धूम्रपान करें जब बच्चे बैठे हों लेकिन इस पर पाबंदी लगाना गलत है. माँ-बाप को ऐसे मामलों में अपना विवेक इस्तेमाल करना चाहिेए.”

वहीं ब्रिटेन के प्रोफेसर जॉन ब्रिटन का तर्क है कि बच्चों को बचाने के लिए ये प्रतिबंध ज़रूरी है.

वे कहते हैं, “हर साल पैसिव स्मोकिंग के कारण बच्चों में संक्रमण के हज़ारों मामले सामने आते हैं, कई बच्चों की मौत हो जाती है और मेननजाइटिस भी होता है.”

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