चूहों पर ज़हर हो गया है बेअसर

 रविवार, 21 अक्तूबर, 2012 को 12:37 IST तक के समाचार

चूहों में बढ़ रही है जहर प्रतिरोधक क्षमता

इंग्लैंड के कुछ इलाक़ों में 75 फ़ीसदी चूहों पर ज़हर का असर नहीं हो रहा है. एक शोध में पता चला है कि इंग्लैंड के पश्चिमी क्षेत्र में चूहे मारने के लिए जिस ज़हर का इस्तेमाल किया जाता है वो अब चूहों पर असरदायक नहीं रहा क्योंकि चूहों में ज़हर प्रतिरोधी क्षमता बढ़ गई है.

हडर्सफील्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ये शोध किया है और उनका कहना है कि इंग्लैंड के ब्रिस्टल, ग्लोसेस्टरशर और विल्टशर में पाए जाने वाले 75 फीसदी चूहों ने प्रतिरोधी क्षमता पैदा कर ली है और इन पर ज़हर का असर नहीं होता.

इसके लिए इंग्लैंड में अलग-अलग इलाकों से लाए गए 300 चूहों पर परीक्षण किए गए थे.

हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि चूहे मारने के लिए कम मात्रा में ज़हर प्रयोग करना भी इस प्रतिरोध की बड़ी वजह हो सकती है.

बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता

चूहों में हुए इस तरह के प्रतिरोध के नमूने इंग्लैंड में इससे पहले भी देखने को मिले हैं, लेकिन हडर्सफील्ड विश्वविद्यालय के अध्ययन में पहली बार इंग्लैंड के पश्चिमी क्षेत्र को रेखांकित किया गया है.

"कुछ कीटनाशक बनाने वाली कंपनियां अभी भी चूहे मारने वाले ज़हर में उन तत्वों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो चूहों पर बेअसर हो चुका है, इसे बदलने की ज़रूरत है."

डॉ. डगी क्लार्क, हडर्सफ़ील्ड विश्वविद्यालय में जैविक विज्ञान के प्रमुख

हडर्सफ़ील्ड विश्वविद्यालय में जैविक विज्ञान के प्रमुख डॉक्टर डगी क्लार्क कहते हैं, “कुछ कीटनाशक बनाने वाली कंपनियां अभी भी चूहे मारने वाले ज़हर में उन तत्वों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो चूहों पर बेअसर हो चुका है, इसे बदलने की ज़रूरत है.”

वहीं, ग्लोस्टरशर में चूहा पकड़ने वाले एंडी बेडोस कहते हैं कि इन चूहों में पाया जाने वाला ज़हर बिल्ली और अन्य पक्षियों के लिए ख़तरनाक साबित हो सकता है क्योंकि ये जीव चूहे को भोजन बनाते हैं.

वैज्ञानिकों ने अभी केवल तीन सौ चूहों का अध्ययन किया है लेकिन उनका इरादा पूरे देश के 25 काउंसिल में 600 चूहों का अध्ययन करना है.

अभी तक उनका शोध पूरा नहीं हुआ है लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले 10 वर्षों में ब्रिस्टल, ग्लोसेस्टरशर और विल्टशर के सभी चूहों पर ज़हर का कोई असर नहीं होगा.

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