शहरी टिड्डों ने सेक्स के लिए बदली प्रेमधुन

Image caption टिड्डों को ये बदलाव शहरी शोरशराबे से पार पाने के लिए करना पड़ रहा है.

क्या आप जानते हैं कि टिड्डे एक ख़ास तरह की धुन गुनगुनाते हैं जिसके ज़रिए वे अपना साथी तलाशते हैं? लेकिन अब एक शोध में पता चला है कि वे शहरों में होने वाले शोर-शराबे से परेशान हैं. दरअसल उनकी ये प्यार भरी धुन शहर के बढ़ते शोर में ग़ुम जाती है और अपने प्यार को पाने में उन्हें परेशानी हो रही है.

लेकिन उन्होंने इस समस्या का एक समाधान निकाल लिया है.वैज्ञानिकों के मुताबिक़ टिड्डे अपना प्यार पाने के लिए अपने सुर बदल रहे हैं.

जर्मनी के जीव वैज्ञानिकों का कहना है कि ये चालाक टिड्डे अपने जीवनसाथी को रिझाने के लिए उन नई आवाज़ों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो शहरी माहौल के शोर शराबे में गुम नहीं होती.

बेल्फेल्ड विश्वविद्यालय के एक जीव वैज्ञानिक यूलरिक लैंप के अनुसार टिड्डे अपनी आवाज़ों से मादा टिड्डों को संभोग के लिए आमंत्रित करते हैं लेकिन शहरों की व्यस्त सड़कों पर मौजूद तेज़ शोर में टिड्डों की ये आवाज़ दब कर रह जाती है.

बदलती आवाज़ें

शोर- शराबे की वजह से इनके संभोग करने की संभावनाएं कम हो जाती हैं.

यूलरिक लैंप कहते हैं, “नर टिड्डे मादा टिड्डे को आकर्षित करने के लिए गानों का सहारा लेते हैं. मादा टिड्डों को वो गाने ज्यादा पसंद आते हैं जिनमें धीमी फ्रीक्वेंसी की आवाजें हों.”

तो इस समस्या से पार पाने के लिए ये टिड्डे क्या करते हैं, लगता है कि ये अपनी आवाज़ बढ़ा देते हैं.

शांत जगहों और शोर शराबे वाली जगहों में शोधकर्ताओं ने लगभग 200 से ज्यादा टिड्डों की आवाज़ों को रिकॉर्ड किया.

इनकी हज़ारों आवाज़ों की तुलना के बाद पाया गया कि जो टिड्डे शोर शराबे वाले इलाक़े में रहते थे वो अलग तरह की आवाज़ निकाल रहे हैं.

ये पहले से ही पता है कि पक्षी, व्हेल मछलियां और मेंढक मानव निर्मित आवाज़ों से पार पाने के लिए अपनी आवाज़ें बदलते हैं.

जीव वैज्ञानिक यूलरिक का कहना है कि ये पहली बार है कि कीट पतंगों में इस तरह के बदलाव देखे गए हैं.

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