चीनी खिलाएँ, टीके के दर्द से राहत दिलाएँ

 मंगलवार, 18 दिसंबर, 2012 को 08:49 IST तक के समाचार

जिन बच्चों को टीका लगने से पहले चीनी का घोल पिलाया गया, वे इंजेक्शन लगते वक्त कम रोए.

अगली बार जब आप अपने बच्चे को टीका लगवाने जाएं तो पहले चीनी का घोल पिला दीजिएगा, इससे आपका बच्चा शायद कम रोएगा.

जी हां, कुछ अध्ययनों से ये सामने आया है कि जिन बच्चों को टीका लग रहा हो, उन्हें चीनी की कुछ बूंदों से आराम मिलता है.

कोचरान टीम ने 14 अध्ययनों की समीक्षा की, जिसमें 1500 से ज़्यादा ऐसे शिशु शामिल थे जिनका सामान्य टीकाकरण या रक्त परिक्षण होना था.

शोध की ज़रूरत

समीक्षा में पाया गया कि टीका लगने से तुरंत पहले जिन शिशुओं को चीनी का घोल पीने के लिए दिया गया, वे इंजेक्शन लगते वक्त उन शिशुओं की तुलना में कम रोए जिन्हें पीने के लिए पानी दिया गया था.

चीनी शिशुओं को शायद आराम तो दे दे लेकिन ये साफ़ नहीं है कि इससे दर्द भी कम होता है या नही.

विशेषज्ञों का कहना है इस बारे में और अधिक शोध की ज़रूरत है.

"इंजेक्शन लगने से पहले शिशुओं को कुछ मीठा देने से कुछ देर तक उनका रोना रुक सकता है. हालांकि हम ये यकीन से नहीं कह सकते कि मीठे घोल से सुई का दर्द कम हो जाता है, लेकिन नतीजे तो आशाजनक हैं."

डॉक्टर मनाल कासाब, मुख्य शोधकर्ता, कोचरान समीक्षा

कोचरान टीम एक अंतरराष्ट्रीय, ग़ैरसरकारी, स्वतंत्र संगठन है जिसकी स्थापना इसलिए की गई ताकि स्वास्थ्य-संबंधी नवीनतम और सही जानकारी दुनिया भर में आसानी से उपलब्ध हो.

संगठन, स्वास्थ्य-संबंधी जानकारी और अध्ययनों की समीक्षा भी करता है.

'आशाजनक नतीजे'

मेडिकल जर्नल द लैंसेट में कुछ साल पहले एक अध्ययन छपा था जिसमें ऐसे 44 शिशुओं की प्रतिक्रिया देखी गई जिन्हें रक्त परिक्षण के दौरान पीने के लिए चीनी का घोल या पानी दिया गया.

अध्ययन में पाया गया कि चीनी के घोल से शिशुओं के दर्द में कोई फ़र्क नहीं पड़ा. दोनों ही वर्ग के शिशुओं ने दर्द में एक ही तरह का मुंह बनाया और जब उनके मस्तिष्क के दर्द वाले हिस्से की ईईजी रीडिंग मापी गईं तो दोनों ही वर्ग के शिशुओं की प्रतिक्रिया लगभग एक सी ही थी.

जॉर्डन के इरिब में जॉर्डन यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के डॉक्टर मनाल कासाब मौजूदा कोचरान समीक्षा के मुख्य शोधकर्ता हैं.

"ज़्यादातर डॉक्टर ये सलाह देते हैं कि टीका लगते समय मां, शिशु को पकड़े और उन्हें सहलाती रहें. अगर वो उस वक्त स्तनपान करवा रही हैं, तो टीका लगवाते वक्त वे शिशु को स्तनपान भी करवा सकती हैं."

डॉक्टर डेविड एलिमैन, रॉयल कॉलेज ऑफ़ पीडियाट्रिक्स एंड चाइल्ड हैल्थ

उनका कहना था, "इंजेक्शन लगने से पहले शिशुओं को कुछ मीठा देने से कुछ देर तक उनका रोना रुक सकता है. हालांकि हम ये यकीन से नहीं कह सकते कि मीठे घोल से सुई का दर्द कम हो जाता है, लेकिन नतीजे तो आशाजनक हैं."

मां की मौजूदगी

लेकिन, 'रॉयल कॉलेज ऑफ़ पीडियाट्रिक्स एंड चाइल्ड हैल्थ' के डॉक्टर डेविड एलिमैन का कहना है कि चीनी के घोल का सामान्यत: इस्तेमाल नहीं होता.

उनका कहना था, "ज़्यादातर डॉक्टर ये सलाह देते हैं कि टीका लगते समय मां, शिशु को पकड़े और उन्हें सहलाती रहें. अगर वो उस वक्त स्तनपान करवा रही हैं, तो टीका लगवाते वक्त वे शिशु को स्तनपान भी करवा सकती हैं."

डॉक्टर एलिमैन ने आगे बताया, "बड़े बच्चों के साथ हम उनका ध्यान बंटाने की कोशिश करते हैं. अगर आप वैसे ही उन्हें पकड़ कर आराम देने की कोशिश कर रहे हैं, मैं कह नहीं सकता कि इसके साथ चीनी का घोल भी देने से कितना फ़ायदा होगा. लेकिन हम ये ज़रूर जानते हैं कि छोटी सुई से ज़्यादा दर्द होता है क्योंकि इंजेक्शन का मांसपेशियों तक पहुंचना ज़रुरी होता है."

अपनी दूसरे जन्मदिन तक किसी भी बच्चे को खसरा और रूबैला जैसी लगभग दस संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगने चाहिए.

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