सिगरेट पर रोक से अस्थमा घटा

 मंगलवार, 22 जनवरी, 2013 को 19:30 IST तक के समाचार
सिगरेट (फ़ाइल)

ब्रिटेन के अलावा विश्व के बहुत सारे देशों में सार्वजनिक स्थानों पर धुम्रपान मना है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि धूम्रपान पर प्रतिबंध लगने के क़ानून आने के बाद दमा की वजह से अस्पताल में भरती होनेवालों बच्चों की तादाद में भारी कमी आई है.

एक शोध के मुताबिक़ सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान पर रोक लगने के पहले साल में ऐसे मरीज़ों की संख्या में 12फ़ीसद की गिरावट दर्ज की गई थी.

रिपोर्ट को लिखने वालों का कहना है कि इस बात के भी पुख़्ता सबूत हैं कि लोग घरों में भी धूम्रपान करने से पूरी तरह सेपरहेज़ कर रहे हैं.

दमे के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था आस्थमा यूके ने कहा है कि ये संकेत बहुत 'प्रोत्साहक' हैं.

लंदन के इम्पिरिल कालेज के शोधकर्ताओं ने इन नतीजों पर पहुंचने के लिए अप्रेल 2002 तक के आंकड़ों पर नज़रदौड़ाई.

बच्चों के स्वास्थ्य पर छपने वाली पत्रिका 'पीडियाट्रिक्स' में कहा गया है कि जुलाई 2007 में धूम्रपान पर क़ानून आनेसे पहले गंभीर क़िस्म के दमे के शिकार बच्चों के मरीज़ों में दो प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी हो रही थी.

इसके आधार पर वो उन्होंने अगले 12 महीनों का हिसाब-किताब किया और पाया कि गिरावट की दर 12 फ़ीसद थी. इसके अगले दो सालों में गिरावट का प्रतिशत दो साल था.

ये गिरावट सभी तबकों के बच्चों में पाई गई चाहें वो अमीर परिवारों से आते हों, या फिर ग़रीब ख़ानदानों से ताल्लुक़ रखने वाले.

शराबख़ाने में काम करने वाले

जब ये क़ानून लागू किया गया था तो उससे पहले बहस इस बात को लेकर थी कि शराबघर में काम करने वाले लोगों को दूसरों के सिगरेट या बीड़ी के धूंए के शिकार होने से किस तरह बचाया जाए.

उस समय बहुत सारे समीक्षकों ने कहा था कि ये रोक लगने का मतलब होगा कि लोग घरों पर अधिक धूम्रपान करने लगेंगे, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि अब काफ़ी लोग घरों में भी धूम्रपान करने से परहेज़ करने लगे हैं.

शोधकर्ताओं के मुखिया प्रोफेसर क्रिस्टोफ़र मिलेट कहते हैं कि नए क़ानून ने बहुत सारी ऐसी गतिविधियों का बढ़ावा दिया है जो स्वागत योग्य हैं.

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