बचा-खुचा खाकर पले-बढ़े हैं कुत्ते

 शुक्रवार, 25 जनवरी, 2013 को 01:24 IST तक के समाचार
कुत्ता

कुत्तों को इंसानो के सबसे करीब और भरोसेमंद जानवर माना जाता है

अगर आप एक अदद पालतू कुत्ते के मालिक हैं तो ज़ाहिर है, अपने पालतू कुत्ते कि इस आदत से अंजान नहीं होंगे?

अब तक आपको पता चल गया होगा कि ये बेचारा जानवर ज़रा सा मौक़ा मिलने पर घर के कोनों या किचन में खाना ढूंढना शुरु कर देगा.

आपको उसकी इस आदत पर बड़ी खीझ भी आती होगी लेकिन, वैज्ञानिकों की माने तो कुत्तों के इस व्यवहार के पीछे की कहानी और वजह काफी अलग है.

एक ताज़ा अध्ययन के ज़रिए कुत्तों में पाए जाने वाले 'स्टार्च मेटाबॉलिज़्म' यानि माड़ जैसे तरल पदार्थ युक्त खाना को पचाने की प्रक्रिया की तुलना भेड़ियों से की गई है.

जिससे इस बात को बल मिलता है कि कुछ कुत्तों की प्रजातियाँ भेडि़यों से आई हैं.

'नेचर-जर्नल' पत्रिका को दी गई जानकारी में इस टीम ने बताया कि, ये कुत्ते शुरुआती दौर के किसानों के साथ रहा करते थे और उनके द्वारा पैदा किए अनाजों के बचे-खुचे कूड़े को खाकर अपना पेट भरा करते थे.

इंसान का दोस्त

ये कोई नहीं जानता कि आख़िर कब कु्त्ते मनुष्य के इतने करीबी साथी बन गए? लेकिन पुरातत्व विभाग द्वारा दिए गए सबूत बताते हैं कि इसकी शुरुआत हज़ारों साल पहले हो चुकी थी.

एक सोच ये है कि इन कुत्तों का सबसे पहले इस्तेमाल तब शुरु हुआ, जब आदि मानव का मुख्य काम शिकार करना और घूम-घूमकर खाना ढूंढना हुआ करता था.

और तब ही उन्होंने जंगली जानवरों से अपनी सुरक्षा के लिए इन भेड़ियों या कुत्तों का अपने साथ रखना शुरु किया था.

लेकिन एक दूसरी सोच ये भी भी है कि ये भेड़िए हमारी ज़िंदगी का हिस्सा तब बनें जब इन्हें हमारा खाना चुराने की आदत लग गई और इन्होंने हमारे घर के आस-पास अपना बसेरा बसाना शुरु कर दिया.

उप्पसला विश्वविद्यालय के एरिक एकसल्सन के अनुसार, ''एक दूसरी अवधारणा के मुताबिक जब मनुष्य ने एक जगह पर रहना शुरु किया, तभी उसने खेती-बाड़ी शुरु कर दी. ऐसे में उसके आस-पास काफी कचरा इकट्ठा होने लगा था और अचानक से वहां एक नई तरह का खाद्य-साधन पैदा होने लगा जो इन भेड़ियों का भोजन बन गया. बाद में इन्हीं भेड़ियों से कुत्तों का जन्म हुआ.''

वे आगे कहते हैं, ''हमें लगता है कि हमारी ये थ्योरी सही दिशा की तरफ जा रही है कि, असल में कुत्तों का जन्म बचे-खुचे और बेकार खाने के कचरे से हुआ है.''

सामान्य कुत्ता

"परीक्षणों में पाया गया है कि अगर हम किसी कम आक्रामक जीव को पसंद करते हैं तो इसके बदले हमें एक पालतू जानवर तो ज़रूर मिलता है लेकिन साथ ही साथ ऐसा भी जानवर मिलता है, जो बढ़ती उम्र में भी बच्चों जैसा प्यार-दुलार चाहता है"

डॉ एक्सल्सन, कुत्तों पर शोध करने वाले वैज्ञानिक

अध्ययन दल के वैज्ञानिक डॉ एक्सल्सन और उनके साथियों ने 50 से ज़्यादा आधुनिक कुत्तों की प्रजाति के डीएनए की जांच की जिसमें कॉकर-स्पैनियर और जर्मन-शेफर्ड शामिल थे.

बाद में इन कुत्तों की जीन का मिलान दुनिया भर के 12 भेड़ियों की प्रजाति से किया गया.

इस शोध के दौरान दो प्रमुख वर्ग के जीन का पता चला जिसमें से एक से 'दिमाग का विकास' होता था और दूसरे से 'स्टार्च मेटाबॉलिज़्म' का विकास होता है.

स्टार्च मेटाबॉलिज़्म वो प्रक्रिया है, जिसके ज़रिए पेड़-पौधे और खर-पतवार में जमा हुए कार्बोहाईड्रेट के उन तत्वों को भेड़िए या बाद में कुत्ते पचा पाने में समर्थ हुए जिन पर फोटोसिंथेसिस यानि प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया का असर नहीं होता.

कुत्तों पर किए गए अध्ययन से ये भी पता चला कि कुत्तों में उस तरह की जीन की संख्या कहीं ज़्यादा है, जिससे वो एंज़ाईम पैदा होता है जो स्टार्च को पचा पाता है.

जिससे इन कुत्तों के लिए इंसानों का साथी बनना ज़्यादा आसान हो गया.

हालांकि एक्सलसन के मुताबिक ये जीन भेड़ियों में भी पाया जाता है, लेकिन वे उसका कुत्तों की तरह कुशलतापूर्वक इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं.

इसका मतलब ये हुआ कि कुत्ते माड़ में जमा पोषण का इस्तेमाल भेड़ियों से बेहतर कर पाते हैं.

जहां तक दिमाग को विकसित करने वाली जीन का संबंध हैं तो इसका फर्क हमें दोनों जानवरों के स्वभाव को देखकर पता चल जाता है.

कुत्ता, भेड़िए की तुलना में ज़्यादा पालतू और विनम्र होता है जिससे वो आसानी से हमारे साथ घुल मिल जाता है.

एक्सलसल के अनुसार, 'इससे पहले किए गए परीक्षणों में पाया गया है कि अगर हम किसी कम आक्रामक जीव को पसंद करते हैं तो इसके बदले हमें एक पालतू जानवर तो ज़रूर मिलता है लेकिन साथ ही साथ ऐसा भी जानवर मिलता है, जो बढ़ती उम्र में भी बच्चों जैसा प्यार-दुलार चाहता है.''

शायद यही कारण है कि कुत्तों में हमेशा बचपना बरकरार रहता है.

खुली बहस

हालांकि कुत्तों का जन्म कैसे हुआ इसपर अभी तक निर्विवाद रुप से कुछ कहा नहीं जा सकता है.

कुत्ता-लड़की

कुत्तों का स्वभाव कम आक्रामक और विनम्र होता है. वे हमारे अधीन रहते हैं और बात मानते हैं

कुछ जीवाश्म जहां इनकी उत्पत्ति दसियों हज़ार साल होने की बात करते हैं तो कुछ के मुताबिक कुत्ते पृथ्वी पर खेती-बाड़ी शुरु होने से पहले आ गए थे.

लेकिन कुछ वैज्ञानिक ऐसा नहीं मानते.

एक विवादास्पद मुद्दा ये भी है कि जानवरों को पालतू बनाने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी हुई है.

कंज़र्वेशन एंड ईवोल्यूशनरी जेनेटिक्स ग्रुप के डॉ कार्लस विला के अनुसार, ''मेरे ख्य़ाल से आधुनिक कुत्तों का जन्म भेड़ियों की विभिन्न प्रजातियों से हुई है.''

कार्लस विला के अनुसार ये मुमकिन है कि, कुत्तों का जन्म कुछ समय पहले से पालतू जानवरों का भेडि़यों के साथ हाईब्रिडेशन के बाद हुआ हो या फिर ये भी कि ये बिल्कुल अलग प्रक्रिया होगी.

लेकिन इन सबमें जो बात बिल्कुल साफ़ है, वो ये कि वैज्ञानिकों को मिले कुछ कुत्तों के अवशेष या हड्डियां 14 हज़ार साल से भी ज़्यादा पुरानी हैं.

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