कीटनाशक बनाने में कीटों के इस्तेमाल पर जोर

ततैया
Image caption कीटनाशक के तौर पर ततैयों के अंडों का इस्तेमाल कारगर रहा

ब्राजील ने हाल ही में रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल के मामले में अमरीका को पीछे छोड़ दिया है. यहां लोग ज्यादा उपज के लिए कीटनाशकों का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं.

लेकिन कुछ किसान कीटनाशकों की जगह ऐसी परंपरागत तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे प्रकृति को बहुत ज़्यादा नुकसान नहीं हो. ये तरीके भी कुछ कम दिलचस्प नहीं हैं.

साउ पाउलो में गन्ने के खेतों में हवाई जहाज से ततैया के अंडे गिराए जाते हैं. इन अंडों से निकलने वाले ततैये उन कीटों का सफाया कर देते हैं जो गन्ने को नुकसान पहुंचाते हैं.

इस तरह के परंपरागत तरीकों को साउ पाउलो की संस्था 'बग एजेंट्स बायोलोजिकोस' बढ़ावा दे रही है. इस संस्था को बोलचाल में 'बग' के नाम से ख्याति मिल रही है.

अंडों से कीटों का नाश

कंपनी की ओर से कहा गया है कि हवाई जहाज सें अंडों का छिड़काव अभी परीक्षण की अवस्था में है लेकिन इस तकनीक का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो सकता है.

पिछले साल 'बग' को दुनिया की सबसे बेहतरीन 50 'इनोवेटिव' कंपनियों में शामिल किया गया जबकि फोर्ब्स ने इसे ब्राजील की सबसे बेहतरीन 10 'इनोवेटिव' कंपनियों में से एक माना है.

वैसे तो ये तकनीक नई नहीं है, लेकिन इसका पहली बार बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है.

'बग' के निदेशक डियोगो रॉड्रिग्स कारवाल्हो कहते हैं, ''इस ख़ास तरकीब के जरिए कुछ तितलियों और कीटों का नाश किया जा सकता है, लेकिन इसका आदमी और पौधे पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता.''

Image caption कीटनाशकों के जरिए जैविक नियंत्रण के तौर तरीकों पर अनुसंधान जारी हैं

पिछले दो साल में कंपनी ने ब्राजील में करीब 5 लाख हेक्टेयर में फैले गन्ना खेतों में कीटों का सफाया किया है.

दरअसल इस तरह की तरकीबों को जैविक नियंत्रण का हिस्सा माना जाता है. इस तरह की तरकीबों को लेकर दुनिया भर में जागरुकता का स्तर बढ़ रहा है.

ब्रिटेन के राथमास्टेड रिसर्च के डॉ. टॉबी ब्रूस कहते हैं, ''यूरोपीय यूनियन ने परंपरागत कीटनाशकों के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने का फ़ैसला लिया है. ऐसे में वैकल्पिक तरीकों की अहमियत बढ़ेगी.''

अजीब-अजीब प्रयोग

दरअसल इस तरह कीटों का नाश करने वाले दूसरे कई तरह के कीटनाशक, फंगस और बैक्टीरिया हो सकते है.

जैसे ब्रिटिश एग्रीकल्चर रिसर्च संस्था, सीएबीआई के वैज्ञानिकों को भरोसा है कि फंगस के जरिए वे पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को खत्म कर सकते हैं.

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में एक ऐसा प्रयोग चल रहा है कि जिसके जरिए मच्छरों को जैविक तरीके से प्रजनन के अयोग्य बनाया जाएगा.

न्यूज़ीलैंड के वैज्ञानिक बूशटेल पोसम नामक कीटनाशक से पार पाने की नयी तरकीब तलाश रहे हैं. कोशिश ये की जा रही है कि पोसम की आंत में पाए जाने वाले कीटाणु नेमाटोड्स से ख़ास तरह का रसायन निकले जो इस कीटनाशक को प्रजनन के अयोग्य बना दे.

ख़तरे भी कम नहीं

Image caption जैविक प्रयोगों के साथ खतरे भी जुड़े हुए हैं

लेकिन ये सब कम चुनौती भरा नहीं है. सीएबीआई के डॉ. डिक शॉ कहते हैं, "जैविक प्रयोगों में आप किसी भी परिणाम के लिए सौ फ़ीसदी निश्चिंत नहीं हो सकते. आपको किसी भी चुनौती के लिए तैयार होना चाहिए."

ऑस्ट्रेलिया में वर्ष 1935 में गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को खत्म करने के लिए केन टोड्स का इस्तेमाल किया गया.

इससे गन्ना के कीट तो खत्म हुए लेकिन टोड्स की आबादी इतनी तेजी से बढ़ी कि स्थानीय वन्य जीवों को बहुत ख़तरा हो गया.

ठीक इसी तरह हरलेक्यूइन लेडीबर्ड्स का इस्तेमाल पौधों पर पाए जाने वाले कीटाणु एपडि्स को खत्म करने के लिए किया गया तो भी काफी नुकसान उठाना पड़ा था.

यानी ये तरकीबें कोई कम ख़तरनाक नहीं हैं, लेकिन वैज्ञानिक सावधानी के साथ बेहतर परिणामों के लिए काम में जुटे हैं.

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