बचपन में हो तनाव, तो सकता है दिल का रोग

  • 3 फरवरी 2013
बच्चों में तनाव
Image caption बच्चों की सेहत का असर बाद में उनके जीवन पर पड़ता है

एक शोध कहता है कि अगर बचपन तनाव में बीता हो तो इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि बाद में चल कर ये दिल की बीमारी का रूप ले ले.

इस शोध के अनुसार सात वर्ष की उम्र में तनाव बड़े होने पर दिल की बीमारी के जोखिम को बढ़ा देता है. अमरीका में हुए एक अध्ययन में 337 लोगों ने बचपन से हिस्सा लिया है. अब ये लोग 40 साल की उम्र को पार कर चुके हैं.

सात वर्ष की उम्र में इन लोगों के भावनात्मक व्यवहार को समझने के लिए उनके कई परीक्षण किए गए. इन परीक्षणों के नतीजों की तुलना उन्हें अब दिल की बीमारी होने के जोखिमों से की गई.

दिल की बीमारी के जोखिम को प्रभावित करने वाले कारकों को नियंत्रित करने के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि सात वर्ष की उम्र में अत्यधिक तनाव होने के कारण महिलाओं में अधेड़ उम्र में दिल की बीमारी का जोखिम 31 फीसदी तक बढ़ जाता है.

वहीं पुरूषों की बात करें तो बचपन में तनाव की वजह से दिल की बीमारी का खतरा 17 प्रतिशत ज्यादा हो सकता है.

और शोध की जरूरत

हालांकि ये शोध करने वाली टीम के प्रमुख डॉ. अलीसन एप्पलटन का कहना है कि इस मामले में अभी और शोध किए जाने की जरूरत है.

40 उम्र की उम्र वाले जिन लोगों का बचपन तनाव में बीता है, उनमें अगले दस साल के दौरान दिल की बीमारी का जोखिम महिलाओं में 7.3 प्रतिशत से बढ़ कर 8.5 प्रतिशत और पुरूषों में 3.2 प्रतिशत से 4.2 प्रतिशत हो सकता है.

ब्रिटिश हेल्थ फाउंडेशन में वरिष्ठ हृदय रोग नर्स मॉरिन टालबोट का कहना है कि यह पहले से ही ज्ञात है कि बच्चे की सेहत का असर आगे चल कर बाद में उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है.

लेकिन बच्चों की बेहतर परवरिश के लिए ये शोध सकारात्मक कदम उठाने के लिए प्रेरित करेगा.

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