स्मार्टफोन की बैटरी क्यों हो जाती है डिसचार्ज?

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Image caption स्मार्टफोन में बहुत ज्यादा एप्लीकेशन होने के कारण बैटरी जल्दी खतम हो जाती है

आज साधारण मोबाइल सेट की बजाय स्मार्टफोन लोगों के हाथों में अक्सर दिखते हैं. स्मार्टफोन में तमाम खूबियां हैं जिनकी कोई गिनती नहीं है, लेकिन इन स्मार्टफोन्स के साथ समस्या ये है कि इनकी बैटरी बहुत जल्दी खत्म हो जाती है और बार-बार फोन को चार्ज करना पड़ता है.

ऐसा पुराने और साधारण मोबाइल सेटों में नहीं होता था. एक बार चार्ज कर लिया तो दो-तीन के लिए फुर्सत. सवाल उठता है कि ये स्मार्टफोन इतनी जल्दी क्यों डिस्चार्ज होते हैं.

इसकी सबसे बड़ी वजह तो तकनीक ही है. स्मार्टफोन एक तरह से छोटे कंप्यूटर ही हैं जिनका इस्तेमाल हम फोन के रूप में भी कर रहे हैं.

इनमें इंटरनेट के माध्यम से वीडियो देखने, सुनने डाउनलोड करने जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं.

हर एक कदम पर और हर एक क्लिक पर ऊर्जा तेजी से कम होती है. इससे सिलिकॉन चिप के चारों ओर बहने वाली विद्युत धारा से गर्मी पैदा होती है. ज़ाहिर है ऐसे में बैटरी भी तेजी से डिस्चार्ज होगी.

सिलिकॉन वैली में ड्यूश टेलीकॉम इनोवेशन सेंटर के वैज्ञानिक डॉक्टर एंगेला निकोआरा ने इस बारे में अपनी एक रिपोर्ट दी है जिसका शीर्षक है- “हू किल्ड माइ बैटरी?” यानी मेरी बैटरी किसने खत्म की?

एंगेला ने स्मार्टफोन को शुरू करने से लेकर हर एक कदम पर खर्च होने ऊर्जा का अध्ययन किया और पाया कि सिर्फ एक बार 'गो' बटन दबाने पर ही 12 जूल ऊर्जा खर्च होती है.

वेबसाइट्स भी हैं ज़िम्मेदार

उदाहरण के तौर पर यदि बीबीसी न्यूज की वेबसाइट पर एक स्टोरी पर क्लिक किया जाता है तो इस प्रक्रिया में तीन जूल ऊर्जा खर्च होगी. ऐसा हर एक क्लिक पर होगा.

पर सभी वेबसाइटों के साथ ऐसा नहीं है. यदि आप एप्पल डॉट कॉम वेबसाइट खोलते हैं तो यहां बीबीसी की तुलना में करीब ग्यारह गुना ज्यादा यानी 34 जूल ऊर्जा खर्च होती है.

इसके अलावा कई ऐसी वेबसाइट्स भी जाने-अनजाने खुल जाती हैं और उन्हें बंद करने ध्यान नहीं रहता तो वहां भी बैटरी खर्च होती रहती है.

लेकिन वेबसाइट का डिजाइन ही बैटरी खर्च की एकमात्र वजह नहीं है. इसके लिए सर्विस प्रोवाइडर और फोन की सेटिंग भी ज़िम्मेदार होती है.

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी के कंप्यूटर साइंस के प्रोफसर हरि बालाकृष्णन कहते हैं कि ये नेटवर्क पर निर्भर करता है कि हमारे मोबाइल सेट कितनी बैटरी का इस्तेमाल कर रहे हैं.

यही वजह है कि आजकल ऐसे नेटवर्क को लोग ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं जो कि बैटरी की कार्यक्षमता को एक-दो घंटे ज्यादा कर सकते हैं.

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