दस करोड़ शार्क हर साल शिकारियों के जाल में

  • 3 मार्च 2013

व्यावसायिक मछली पकड़ने से शार्क मछलियों पर पड़ने वाले असर के सबसे सटीक आकलन में पता चला है कि हर साल लगभग 10 करोड़ शार्क मछलियों का शिकार किया जाता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि शार्क के शिकार की ये दर बहुत ज़्यादा है ख़ासकर उन प्रजातियों के लिए जो बड़ी उम्र में प्रजन्न करती हैं.

शार्क के फ़िन की बहुत अधिक मांग शिकार की मुख्य वजह है. शार्क के फ़िन का इस्तेमाल चीनी समुदाय में सूप बनाने के लिए किया जाता है.

इस रिपोर्ट को मरीन पॉलिसी की एक पत्रिका में छापा जाएगा.

शोधकर्ताओं का कहना है कि वैश्विक स्तर पर हो रहे शार्क के शिकार का आकलन करना बेहद मुश्किल है क्योंकि जिस तरह के आंकडे मिलते हैं वो सटीक नहीं कहे जा सकते.

आंकड़ों का फ़र्क़

कई बार तो शिकारी शार्क को पकड़कर, उनके फ़िन काटने के बाद, फिर से वापस समुद्र में फेंक देते हैं. इस तरह के मामलों की गिनती आधिकारिक रिपोर्टों में शामिल नहीं होती.

वैज्ञानिकों का मानना है कि साल 2010 में मारी गई शार्कों की संख्या का आकलन 63 मिलियन से 273 मिलयन यानी कि छह करोड़ से लेकर 27 करोड़ 30 लाख के बीच रहा.

अमरीका में स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी के डॉक्टर डिमेन चैपमेन कहते हैं, “इस आकलन का दायरा बहुत अधिक है जिससे पता चलता है कि शोध के आंकड़ों का स्तर कितना बुरा है. हालांकि 100 मिलियन यानी 10 करोड़ बीच का आंकलन है और ये अब तक का सबसे सटीक आकलन है.”

हालांकि वर्ष 2000 और 2010 के बीच शार्क को पकड़ने की दर में कोई ख़ास बदलाव नहीं हुआ है. शोधकर्ताओं का कहना है कि मछली के व्यापार में लगे लोग बेड़ी मछली पकड़ने के अपने इलाक़ों को बदल रहे हैं ताकि मांग पूरी की जा सके.

शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका असर ये होगा कि अचानक इन प्रजातियों की संख्या अचानक बहुत घट जाएगी.

Image caption चीन में शार्क फिन की भारी मांग होती है.

इन ख़ास प्रजातियों के ख़त्म होने का ख़तरा इसलिए भी हैं क्योंकि जिन शार्क मछलियों को पकड़ा जाता है उस प्रजाति की मछलियां बेहद कम दर से प्रजन्न करती हैं.

क़ानूनी बदलाव

डॉक्टर चैपमेन कहते हैं, “जिन शार्क की मांग बाज़ार में बहुत ज़्यादा है उस प्रजाति की शार्क को व्यस्क होने में 10 साल का वक़्त लगता है.”

वो कहते हैं, “जिस दर से इन मछलियों को निकाला जा रहा है, उस दर से ये मछलियां विकसित नहीं हो रही हैं.”

हालांकि कनाडा, अमरीका और यूरोपीय संघ ने शार्क के फ़िन काटे जाने को रोकने के लिए क़ानूनी क़दम उठाए हैं लेकिन शार्कों के फ़िन अब भी काटे जा रहे हैं.

डॉक्टर चैपमेन कहते हैं कि इस तरह के क़ानूनों का वो असर नहीं हुआ है जिस असर की उम्मीद की जा रही थी.

इंटरनेशनल ट्रेड इन एनडेंजर्ड स्पिशीज़ मुद्दे पर रविवार को बैंकॉक में होने वाली बैठक में 178 देशों से मध्यस्थ इक्टठे हो रहे हैं. इस तरह के प्रस्ताव हैं कि पांच सबसे ज़्यादा ख़तरे में पड़ी शार्क मछलियों के शिकार को नियंत्रित किया जाए.

पिछली बार साल 2010 में हुई इस तरह की बैठक में ये प्रस्ताव दो तिहाई से कुछ कम वोट रहने की वजह से ठुकरा दिया गया था.

शार्क के संगरक्षण कर रहे कार्यकर्ता कहते हैं कि इस बार उनके पास विकसित और विकासशील देशों का व्यापक समर्थन हासिल है और उन्हें उम्मीद है कि अबकी बार वो इस प्रस्ताव के लिए ज़रुरी मत हासिल कर पाएंगे.

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