कहां से आते हैं स्पैम मेल?

स्पैम
Image caption अगर आपको यह अंदाजा हो कि कोई ईमेल कहां से आया है तो आप मालूम कर सकते हैं कि यह फर्जी या वैध मेल है

एक शोध में यह पाया गया है कि इंटरनेट पर मिलने वाले करीब 50 फीसदी जंक ई-मेल, महज़ 20 इंटरनेट सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियों (आईएसपी) की ओर से भेजे जाते है.

जंक मेल ऐसे बेकार के ईमेल होते हैं जो एक-साथ कई लोगों को काफी तादाद में भेजे जाते है.

इंटरनेट की दुनिया में 'स्पैम मेल' और 'फिशिंग' जैसी घटनाएं खूब हो रही हैं जिसमें धोखाधड़ी से किसी असली वेबसाइट की नकल कर फर्जी वेबसाइट बनाने और झांसा देने वाले मेल भेजने को अंजाम दिया जाता है.

करीब 42,201 आईएसपी के शोध में यह पाया गया कि 50 फीसदी जंक मेल, फिशिंग हमले और झांसा देने वाले फर्जी संदेश महज 20 नेटवर्कों से आते हैं.

इनमें से ज्यादा नेटवर्क भारत, वियतनाम और ब्राजील में मौजूद हैं.

भारत से आया स्पैम

इंटरनेट पर अपराध करने वाले नेटवर्कों में नाईजीरिया का 'स्पेक्ट्रानेट' सबसे ज्यादा बदनाम है. इस आईएसपी के नियंत्रण वाले 62 फीसदी वेब पतों से स्पैम मेल भेजा गया.

शोधकर्ता ने यह पाया कि ऐसी फर्जी गतिविधियों में शामिल रहने वाले नेटवर्क एक विशेष तरह के झांसा देने वाले संदेश और साइबर हमले में संलिप्त होते हैं. मिसाल के तौर पर इस तरह के ज्यादातर फिशिंग हमले अमरीका के आईएसपी से किए जाते हैं.

इसके विपरीत स्पैमरों को एशिया के आईएसपी भी भाते हैं. शोध में भारतीय आईएसपी 'बीएसएनएल' को स्पैम के स्रोत के तौर पर सूची में सबसे ऊपर स्थान मिला है.

कई साइबर अपराधी निजी कंप्यूटरों को हाईजैक कर या उसे किसी दूसरे कॉरपोरेट नेटवर्क से जोड़कर स्पैम या दूसरे फर्जी संदेश भेजते हैं.

कैसे रोकें साइबर हमले?

Image caption भारत में भी स्पैम भेजनेवाले नेटवर्क पाए गए.

शोध में यह कहा गया है कि अगर सुरक्षा इंजीनियर इंटरनेट पर इस तरह के हमले को रोकना चाहते हैं तो उन्हें उन नेटवर्कों पर नियंत्रण करने की कोशिश करनी होगी जहां से ज्यादा हमले किए जाते हैं.

हॉलैंड के एक शोधकर्ता ने अपने सर्वेक्षण में यह पाया कि कई मामलों में आईएसपी को स्पैम और फिशिंग जैसे खतरे बढ़ाने में विशेषज्ञता होती है.

बड़े पैमाने के इस शोध का लक्ष्य कंप्यूटर के सुरक्षा उपकरणों को ठीक करने के मकसद से जुड़ा था. इसके लिए ईमेल और दूसरे संदेश जिन इंटरनेट वेबसाइटों से भेजे गए थे उनकी जांच की गई कि वे फर्जी या वैध मेल हैं.

ऐसे सुरक्षा उपकरण बेहतर साबित हो सकते हैं अगर उनके पास ऐसी पुरानी सूचनाएं हों कि किसी खास नेटवर्क से किस तरह के ईमेल या संदेश भेजे गए हैं.

ट्वेंट विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ने यह पाया कि कुछ नेटवर्कों को खराब करार दिया जा सकता है क्योंकि वास्तविक दुनिया की तरह ही इन जगहों पर भी लोगों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को अंजाम देने की ज्यादा संभावना होती है.

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