क्या आप लिखेंगे किसी अजनबी को प्रेम पत्र?

अजनबियों को प्रेम पत्र लिखने वाली लड़की

“तुम मेरे लिए बहुत अहमियत रखते हो. मैं बता नहीं सकती हूं, लेकिन तुम मेरे लिए बहुत अहम हो. और तुम, तुम बहुत ही अच्छे हो.”

इस तरह की बातें आप अजनबियों के लिए नहीं लिखते हैं.

लेकिन जब हन्ना ब्रेंशनर स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद न्यूयॉर्क शहर जाकर वहां रहने लगीं तो वो चिंतित और परेशान रहने लगीं. उन्हें लगा कि आसपास के लोगों को उनकी कोई कद्र या जरूरत नहीं है.

फिर उन्होंने अजनबी लोगों को प्रेम पत्र लिखने शुरू किए जिन्हें वो शहर के अलग अलग हिस्सों में छोड़ती थीं. पहला पत्र उन्होंने एक ट्रेन में छोड़ा जिस पर लिखा था, “अगर आपको ये मिलता है, तो ये आपके लिए ही है.”

इसके बाद उन्होंने लाइब्रेरी, कैफे जैसी कई जगहों पर ऐसे प्रेम पत्र छोड़े.

अकेलेपन से राहत

उन्होंने बीबीसी को बताया, “मैंने महसूस किया कि मेरी उदासी और अकेलापन दूर हो गया. मुझे कुछ ऐसा मिल गया था जिसने मेरा ध्यान अपने आप पर से हटा दिया था.”

हन्ना और उनकी 'मोर लव लेटर्स' मुहिम कुछ लोगों को बकवास लग सकती है लेकिन शोध बताते हैं कि दूसरों के प्रति दयालु होना या अच्छे ख्याल रखना दरअसल आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है.

'इमोशन' पत्रिका में छपा एक अध्ययन कहता है कि दयालुता सामाजिक तौर पर अलग थलग पड़े या तनावग्रस्त लोगों को सकारात्मक नजरिया देने में मदद कर सकती है.

यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया की डॉ. लिन एल्डेन और डॉ. जेनिफर ट्रू ने चार हफ्तों तक उदासी और अकेलेपन के शिकार कुछ लोगों से हफ्ते में दो दिन दयालुता और भलाई के काम करने को कहा.

छोटे काम, बड़ा असर

डॉ. एल्डेन कहती हैं, “कभी कभी लोग किसी को एक छोटा का तोहफा देते हैं, किसी बीमार से मिलने जाते हैं या कभी कभी बस ड्राइवर को शुक्रिया बोलते हैं. कहने को तो ये सब छोटे काम हैं, लेकिन इनका असर बड़ा होता है.”

एल्डेन के अध्ययन में चार हफ्तों तक हिस्सा लेने के बाद उन लोगों ने न सिर्फ अपने आप में बेहतरी महसूस की, बल्कि उनमें संबंधों को लेकर संतोष भी पहले से ज्यादा पाया गया.

वैसे लंदन के सेंटर फॉर एंग्जाइटी डिसऑर्डर्स और ट्रोमा के निदेशक डॉ. निक ग्रे को शुरुआत में इस विचार पर संदेह था कि भलाई के काम करने से चिंता और तनाव से जूझ रहे इन लोगों पर कोई चिकित्सीय असर होगा.

वो कहते हैं, “मैंने शोधपत्र नहीं देखा था. इसलिए मुझे इसका शीर्षक देख कर कुछ शक हुआ था. लेकिन ये अच्छा शोधपत्र है और इसे एक सम्मानित टीम ने तैयार किया है.”

एल्डेन मानती हैं कि इस तरह की परेशानियों से जूझ रहे लोगों के लंबे इलाज में दयालुता एक शुरुआती कदम हो सकता है.

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