गेम्स के ज़रिए सीखिए फिज़िक्स....

कुछ बच्चों के लिए भौतिकी काफी बोझिल विषय हो सकता है, कुछ को यह मज़ेदार लगता है, लेकिन शॉन यंग जैसा शिक्षक हो, तो यह एक खेल बन जाता है.

यंग कनाडा के क्यूबेक में 16 साल तक के बच्चों को भौतिकी पढ़ाते हैं. अपनी क्लास को रोचक बनाने के लिए वह वीडियो गेम्स की तरफ मुड़े. अपना आभार जताने के लिए उन्होंने पढ़ाई की इस पद्धति का नाम भी क्लासक्राफ्ट रखा है, जो वारक्राफ्ट नामक ऑनलाइन गेम से प्रेरित है.

यंग की क्लास में बच्चे आठ-आठ के समूह में बांटे जाते हैं. हरेक टीम में एक-एक बच्चा योद्धा, पादरी या ज्ञानी बनता है. हरेक भूमिका से उसकी ताकत जुड़ी हुई है. कुछ छोटी ताकतें हैं, कुछ बड़ी.इस ताकत का नाम टाइम वार्प है. यंग कहते हैं कि निचले लेवल की ताकतें तो बस मनोरंजक हैं, लेकिन ऊपरी स्तर की ताकतें बेहद आकर्षक है.

पावर प्ले

विद्यार्थियों को एक्सपिरियंस प्वाइंट या एक्सपी इकट्ठा करने होते हैं, जिसके बाद उसे ताकतें मिलती हैं. ये प्वाइंट क्लास में अच्छे व्यवहार, समय पर होमवर्क करने, परीक्षा में बेहतर करने और दूसरों की मदद करने पर मिलता है. फिलहाल 1,000 एक्सपी इकट्ठा करने पर एक पावर प्वाइंट मिलता है, जिससे एक बेसिक पावर मिल जाती है.

वैसे क्लासक्राफ्ट केवल उपहारों का नाम नहीं है. उन विद्यार्थियों के लिए सजा भी है, जो अपना होमवर्क नहीं करते या इधर-उधर गंदगी फैलाते हैं.

ऐसा होने पर, उस विद्यार्थी के कुछ हिट प्वाइंट खोने पड़ते हैं. गेम में ये किसी के चरित्र की दृढ़ता का पैमाना है. पादरी उन सदस्यों की मदद कर सकते हैं, जिन्हें जुर्माना हुआ है.

ये हैं ताकतें

प्रेयर- यह परीक्षा में अपने क्लास नोट्स इस्तेमाल करने की छूट देता है

इनविज़िबिलिटी- यह क्लास में देर से पहुंचने की छूट देता है

एंबुश- विद्यार्थी कोई एक पर्चा एक दिन बाद दे सकता है

आर्डेंट फेथ- परीक्षा में विद्यार्थी जवाब के सही होने की बात पूछ सकता है

अगर किसी का चरित्र सारे हिट प्वाइंट खो देता है और मर जाता है, तो उसे वास्तविक दुनिया के दंड मिलेंगे. नतीजे के तौर पर परीक्षा में कम समय मिलने या शनिवार की सुबह डिटेन हो सकता है.

यंग ने हरेक विद्यार्थी के चरित्र का आंकड़ा रखने के लिए एक गेम इंजन बनाया हैं, जिससे रोजाना एक्सपी, हिट प्वाइंट और पावर के इस्तेमाल में होनेवाले बदलाव की जानकारी मिल जाती है. इस इंजन के जरिए यंग क्लास में अनायास कोई कार्यक्रम भी करते हैं, जिसका प्रभाव हरेक पर पड़ता है. कुछ मददगार हैं, जैसे ब्लेसिंग, जिससे हिट प्वाइंट ठीक होते हैं, तो कुछ बुरे है, जैसे कर्स- जिससे हिट प्वाइंट कम होते हैं.

सीखे हुए सबक

डॉक्टर लाडन कॉकशट ने ऑनलाइन गेम खेलनेवालों औऱ उनकी संस्कृति पर पीएचडी की है. वह कहती हैं कि ऐसा उन्होंने पहली बार देखा है, जब इतने बड़े स्तर पर कई खिलाड़ियों वाले गेम को पढ़ाई से जोड़ दिया है.

लाडन का मानना है कि शिक्षक आजकल ऑनलाइन गेम्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. इनकी सहायता से टीमवर्क, व्यक्तिगत उन्नति, शोध और डिबेट वगैरह जैसे गुण पाने में मदद मिलती है। वह कहती हैं, ‘यह एक अच्छा रास्ता है, जिससे विद्यार्थियों के गेमिंग के प्यार को पढ़ने के प्यार में बदल दिया जाए.’

यंग कहते हैं कि गेम थोड़ा जटिल है, लेकिन अधिकतर बच्चे इसे पसंद कर रहे हैं. यहां तक कि लड़कियां भी इसमें शिरकत करती हैं, हालांकि वीडियो गेम खेलने के लिए लड़के मशहूर हैं.

पर क्या यह काम करता है? क्या इससे पढ़ाई पर ध्यान नहीं देनेवाले बच्चों नें ध्यान देना शुरू कर दिया है?

यंग कहते हैं कि गेम और ग्रेड्स के बीच सीधा रिश्ता तलाशना तो मुश्किल है, लेकिन बच्चों के रुझान में बदलाव दिखता है. यह बदलाव उन विद्यार्थियों के समूह में साफ दिखता है, जो क्लासक्राफ्ट शुरू होने के पहले बेहद धीमे थे। एक्सपी जमा करने के लिए उन्होंने काफी मदद की. यह इतना लोकप्रिय है कि दूसरे शिक्षकों ने भी बेहतर प्रदर्शन के लिए एक्सपी देना शुरू कर दिया है.

टीचिंग में तकनीक पर काम करनेवाले ऑली ब्रे का कहना है कि वर्ल्ड ऑफ क्लासक्राफ्ट तो महज शिक्षा के गेम्स से गठजोड़ का उदाहरण है.

ऐसी ही एक व्यवस्था अमेरिकी शिक्षाविद ली शेल्डन ने भी की थी, लेकिन वह प्रयोग कॉलेज के लड़कों के साथ थ.। पहली बार सेकंडरी स्कूल के बच्चों के साथ क्लासक्राफ्ट ही लागू हुआ है.

बताया जा रहा है कि तकनीक के बहाने शिक्षा के फायदे हैं, क्योंकि बच्चों ने कंप्यूटर पर अपने किए काम देखे. अंक मिलने के मामले में कंप्यूटर उन्हें तटस्थ भूमिका वाला लगता है.

हालांकि, इस मामले में सबसे अहम है आपका रवैया. वह कहते हैं कि यह जादू की छड़ी नहीं है, लेकिन एक उपयोगी औजार जरूर है इससे शिक्षकों को मदद तो मिलती ही है..

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