शतरंज खेलनी वाली मशीन क्या एक छलावा था?

  • 7 अप्रैल 2013
तुर्क
Image caption तुर्क कृत्रिम बुद्धिमत्ता का आगमन था या छलावा

शतरंज में अपने विरोधियों को हराने में सक्षम 18 वीं सदी की एक मशीन मनुष्य की कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आगमन को साफ तौर पर बताती थी. यह एक अच्छी तरह से बुना गया धोखा था लेकिन इसमें अपनी तरह की खूबियां भी थीं.

पिछले कुछ समय से मैं उस मशीन के बारे में सोच रहा हूं जिसे तुर्क नाम दिया गया था.

हाल ही में कैलिफ़ोर्निया में 18 वीं सदी के शतरंज खेलने वाले इस मानव निर्मित मशीन को दोबारा बनाया गया है.

जो लोग तुर्क के बारे में नहीं जानते हैं, उन्हें बता दूं कि तुर्क 1970 में पहली बार वियना में देखा गया था.

यह एक शतरंज खेलने वाली मशीन थी जिसके कैबिनेट के ऊपर तुर्की कपड़े पहने एक दाढ़ी वाला व्यक्ति बैठा था और सामने शतरंज का बोर्ड रखा था.

सनसनीखेज शो

ऑपरेटर, योहान मायज़ेल, शतरंज खेलने वाले लोगों को एकत्र कर लेता था और उनके सामने कैबिनेट के नीचे के दरवाज़े खोलकर प्रभावशाली ढंग से चलते यंत्र को दिखाता.

तुर्क और शतरंज की बिसात के नीचे का स्थान यह यंत्र घेरे रहता था.

इसके बाद वो कैबिनेट को बंद कर देता और किसी चुनौती देने वाले को खेलने के लिए बुलाता.

यह यंत्रमानव या रोबोट, विरोधी की चाल को देखता, विचार करता और फिर अपनी मशीनी बांह उठाकर अपनी चाल चलता. यह एक सनसनीखेज शो था.

न्यूयॉर्क में 1850 में आग में नष्ट होने से पहले इसने बेंजामिन फ़्रैंकलिन समेत सबके साथ शतरंज खेला.

दंतकथाओं के अनुसार तो नेपोलियन बोनापार्ट से भी.

18वीं सदी को तो लगा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आ गई है, कैप्टन हुक की तरह टिक-टिक करते और तुर्की टोपी लगाए.

भ्रमजाल

Image caption कास्परोव 1996 में कम्प्यूटर से बाजी खेलते हुए

बात आगे बढ़ाने से पहले मैं बता दूं कि ये सब एक धोखा था यूं कहें कि एक चाल, एक चालाक जादूगर का भ्रमजाल.

अच्छी तरह से फ़िसलने वाला एक पटरा कैबिनेट की निचली ओर लगाया जाता था जिसके सहारे एक शतरंज खिलाड़ी चुपके से उसके अंदर पहुंच जाता था.

दरअसल चलती हुई मशीनरी को देखकर जितना लगता था अंदर उससे ज़्यादा जगह थी.

तो बात ये है कि ये तुर्क मुझे कई वजह से मोहता है. पहला तो इसलिए कि ये आदमी की तार्किकता की एक बड़ी कमी की ओर इशारा करता था.

अगर तुर्क सचमुच में शतरंज खेलने वाली मशीन थी तो ये लंबी कड़ी का सबसे ताज़ा हिस्सा होना चाहिए था.

अगर मशीनी तुर्क शतरंज खेल रहा था तो दस साल पहले चेकर्स खेलने वाला कोई मशीन यूनानी होना चाहिए था.

कंप्यूटर

कंप्यूटर विज्ञान के पितामह चार्ल्स बैबेज ने तुर्क को देखा और महसूस किया कि ये संभवतः जादू का एक खेल है.

उन्होंने खुद से पूछा कि अगर शतरंज खेलने वाली मशीन बनानी हो तो आपको कैसी मशीन बनानी होगी?

और उनका पहला कंप्यूटर 'डिफरेंस इंजन' इसी विचार से पैदा हुआ कि इस समस्या का सबसे अच्छा हल क्या हो सकता है.

इसका दूसरा पक्ष भी है जो मुझे बार-बार परेशान करता है.

जिस बात ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया था वो ये थी कि आप एक शतरंज का बौना प्रतिभाशाली खिलाड़ी कहां से लाएंगे जो कैबिनेट में फिट हो जाए.

या फिर शैतान ऑपरेटर अच्छी तरह से प्रशिक्षित बच्चों का इस्तेमाल कर रहा था.

अगर आप ये मान लें कि वो वयस्क खिलाड़ी है तो वो छुपा हुआ लाजवाब चैंपियन कौन होगा.

तुर्क

Image caption ये मशीन 1854 में आग से नष्ट हो गई थी और इसे हाल ही में फिर से बनाया गया है

पता चला कि शतरंज के खिलाड़ी जो तुर्क को चलाते थे सिर्फ़ शतरंज के खिलाड़ी थे.

हमेशा बदलते रहने वाले अच्छे शतरंज के खिलाड़ी, लेकिन स्टार नहीं.

ऐसे खिलाड़ी जिन्हें काम की इतनी ज़रूरत होती थी कि वो हफ़्ता या महीना उस घुटनभरी अलमारी के अंदर बिताने के लिए तैयार हो जाते.

मायज़ेल खिलाड़ियों को रास्ते में से ही चुनता, चाहे वो कहीं भी हो, जैसे कि चक बैरी अपने बैंड के सहायकों को रास्ते से ही लिया करते थे.

तो ईजाद करने वाले की योग्यता शतरंज खेलने वाली मशीन बनाना नहीं थी.

उसकी योग्यता तो ये देखने में थी कि आधुनिक समय में दक्षता उससे ज़्यादा उपलब्ध है जितना आप सोचते हैं.

इसके साथ ही असाधारण प्रतिभा आसानी से उपलब्ध है और ज़्यादातर सस्ते में काम करने को तैयार रहती है.

विशेषज्ञता

तो दरअसल सच ये है कि हम विशेषज्ञ को अक्सर ज़्यादा भाव दे देते हैं और विशेषज्ञता को कम.

ऐसे लोग, जो ये बात समझते हैं कि दरअसल संपूर्ण रूप से दक्ष कुछ ही लोग होते हैं लेकिन उनके नीचे बहुत सारे लोग भी जानकार होते हैं जिन्हें काम की ज़रूरत है.

मायज़ेल ने भी ये सच समझ लिया था और इससे उसने काफ़ी फ़ायदा कमाया.

किसी भी खेल में सबसे अच्छा प्रबंधक वो होता है जो प्रतिभावान को बाहर कर सकता है और उसकी जगह लेने के लिए औरों को ढूंढ लाता है.

बेकहम को मैदान के बाहर बैठाने वाला मैनेजर, उस मैनेजर की जगह कई गुना ज़्यादा सफल होगा, जो बेकहम की बॉल घुमाने की प्रतिभा का कायल होगा.

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