गर्भ में भी हो सकता है ब्लड कैंसर

Image caption एक जींस में बदलाव की वजह से होता है ल्यूकेमिया.

वैज्ञानिकों के एक दल ने दावा किया है कि ल्यूकेमिया कैंसर की मूल वजह का पता लग गया है और बच्चों में मां के गर्भ से भी यह बीमारी हो सकती है.

युवावस्था में कैंसर के जितने भी मामले सामने आते हैं, उनमें एक तिहाई कैंसर ल्यूकेमिया के ही होते हैं. ब्रिटेन में हर साल करीब सौ बच्चे की मौत ल्यूकेमिया से होती है.

जुड़वा बच्चों की एक जोड़ी के जींस के डीएनए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि उन्हें प्रभावित करने वाला ब्लड कैंसर एक्यूट लायमहोबलास्टिक ल्यूकेमिया होता जिसे आम तौर पर श्वेत रक्त कणों का कैंसर भी कहा जाता है.

पहले से ये मालूम था कि जींस की ख़ामियों के चलते ये बीमारी होती है और पर्यावरण के असर के चलते यह बढ़ने लगता है. लेकिन इसके पीछे की वजहों के बारे में पहली बार कुछ ठोस बात उभर कर सामने आई हैं.

इंस्टीट्यूट ऑफ़ कैंसर रिसर्च के विशेषज्ञ मानव शरीर के तीन अरब जींस के डीएनए अध्ययन के बाद इस नतीजे तक पहुंचे हैं. इन नतीजों को पीएनएस जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

बच्चे सबसे ज़्यादा प्रभावित

शोध में शामिल वैज्ञानिकों ने इस बात की उम्मीद जताई है कि इसके परिणाम से कैंसर के इलाज की नई दवा खोजने में मदद मिल सकेगी.

दरअसल, दुनिया भर में बच्चे सबसे ज़्यादा ल्यूकेमिया कैंसर की चपेट में ही आते हैं.

शोध वैज्ञानिक इस बीमारी के बारे में ज़्यादा जानना चाहते हैं ताकि इस बीमारी का बेहतर इलाज संभव हो सके.

हालांकि कई मामलों में ल्यूकेमिया का इलाज कामयाब होता है, लेकिन इसके इलाज में प्रयुक्त होने वाली दवाईयों के गंभीर साइइ इफेक्टस भी होते हैं.

प्रोफेसर मेल ग्रीव्स और उनके साथियों ने एक समान जुड़वा बच्चों को अपने अध्ययन के लिए इसलिए चुना क्योंकि उनमें एक जैसे डीएनए होते हैं जो उन्हें अपने माता-पिता से विरासत में मिले होते हैं.

इन जुड़वा बच्चों में दोनों को चार साल की उम्र में एक्यूट लायमहोबलास्टिक ल्यूकेमिया हो गया था.

इनके रक्त और अस्थि मज्जा के नमूने के अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने देखा कि दोनों बच्चों की एक जींस में बदलाव हुआ है, इसके चलते ही ये ल्यूकेमिया की चपेट में आए हैं. इस जीन का नाम इटीवी6-आरयूएनएक्सआई है.

इलाज में मदद

Image caption दुनिया भर में बच्चे सबसे ज़्यादा ल्यूकेमिया की चपेट में आते हैं

शोध वैज्ञानिकों के मुताबिक जुड़वां बच्चों में एक के जीन में बदलाव गर्भ में ही हुआ होगा, जो बाद में दूसरे बच्चे तक गया.

वैसे दिलचस्प ये है कि इस जुड़वां बच्चों के जींस में 22 तरह के बदलाव हुए हैं, लेकिन इनमें कोई भी एक दूसरे से मिलता नहीं है.

इस अध्ययन की सहयोगी प्रोफेसर ग्रीव्स ने कहा, “ हमने मानव के सभी जीनोम के सीक्वेंस का अध्ययन किया है. पहली बार हमें उस बदलाव का पता चला है जिससे ल्यूकेमिया की शुरुआत होती है.”

इंस्टीच्यूट ऑफ़ कैंसर रिसर्च की प्रोफेसर डॉ. जूली शार्प कहती हैं, “बच्चों में कैंसर होने के मामले में डीएनए का अध्ययन मददगार साबित हुआ है. ऐसे अध्ययनों के जरिए हम कैंसर का बेहतर इलाज़ तलाश पाएंगे जिससे कैंसर से जंग जीतने वाले लोगों की संख्या में इज़ाफा होगा.”

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