मुर्गे की मर्दानगी कब और क्यों बदली ?

मुर्गा शिश्न
Image caption मुर्गा के शिश्न का विकास एक वक्त के बाद खुद ब खुद रूक जाता है.

ताज़ा शोध में ये बात सामने आई है कि बड़े होने के दौरान कुछ पक्षियों के मर्दाना अंग क्यों ग़ायब हो जाते हैं.

ज़मीन पर रहने वाले पक्षी, जैसे कि मुर्गों के शिश्न भ्रूण के वक़्त से ही विकसित होने लगते हैं लेकिन वयस्कों में ये अल्पविकसित अवस्था में पाया जाता है.

विज्ञान पत्रिका करेंट बायोलॉजी में छपी एक स्टडी में ये बताया गया है कि ये पक्षियां जब बड़े हो रहे होते हैं तो इनके भीतर एक तरह के आनुवांशिक 'प्रोग्राम' की पहल हो जाती है जो तैयार हो रहे शिश्न के विकास को रोक देता है.

मर्दाना अंग के ग़ायब होने की वजह से मुर्गियों के लिए प्रजनन पर अधिक नियंत्रण रखना संभव होता होगा.

सह-लेखक डॉक्टर मार्टिन कोहन कहते हैं, "हमारी खोज में ये पता चला है कि कुछ पक्षियों में मर्दाना अंग के छोर पर मौजूद कोशाणु खुद ब खुद मरने लगते हैं जिससे शिश्न के विकास की प्रक्रिया रूक जाती है."

मुर्गी और अंडे

फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के मार्टिन ने कहा कि इस पूरे मामले में बीएमपी4 नाम का एक जीन अहम भूमिका निभाता है.

मुर्गों में इस जीन के जागते ही मर्दाना अंग सिकुड़ जाता है.

बत्तखों और इमूस नाम की एक चिड़िया में ये जीन सक्रिय नहीं होता इसलिए उनके शिश्न का विकास जारी रहता है.

चूंकि मुर्गियों और कुछ दूसरे पक्षियों के मर्दाना अंग नहीं होते हैं, इसलिए उनमें प्रजनन की प्रक्रिया शिश्न के बिना प्रवेश के ही संभव हो जाती है.

सांप के पांव

नर और मादा दोनों के जिस्म में एक खुली जगह होती है जिसे क्लोका कहते हैं. जब क्लोका एक दूसरे से मिलते हैं तो शुक्राणु मादा के भीतर प्रवेश कर जाता है. इसे 'क्लोकल किस' कहते हैं.

हालांकि ये साफ़ नहीं हो पाया है कि आख़िर शिश्न के ग़ायब होने की प्रक्रिया क्यों शुरू हुई.

शोधकर्ताओं का कहना है कि आगे चलकर इस स्टडी के ज़रिये इस तरह के सवालों का जवाब भी ढू़ढा जा सकेगा कि सांप में पैरों का विकास कैसे और किस वजह से रूक गया.

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