छुरी, काँटा या चम्मच बदल सकते हैं खाने का स्वाद?

  • 28 जून 2013
Image caption शोध से पता चला है कि चम्मच का रंग भी भोजन के स्वाद पर असर डालता है.

भोजन के स्वाद के बारे में हमारा नज़रिया कटलरी या छुरी-कांटे से प्रभावित होता है. ये कहना है एक नए शोध का.

यह अध्ययन करने वाली ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय की टीम का कहना है कि कटलरी के आकार, वजन, आकृति और उसके रंग का प्रभाव भोजन के स्वादपर पड़ता है.

जैसे प्रयोगों में पता चला है कि काँटे की जगह छुरी से खाने से चीज़ या पनीर अधिक नमकीन लगता है. जबकि दही को सफ़ेद चम्मच से खाने पर उसका स्वाद बढ़ जाता है.

वज़न, रंग, आकार का प्रभाव

'फ्लेवर' नाम के जर्नल में छपे इस अध्ययन के मुताबिक भोजन के मुँह में जाने से पहले ही दिमाग उसके बारे में राय बना लेता है.

भोजन के स्वाद पर कटलरी के वज़न, रंग और आकार के प्रभाव के बारे में तीन प्रयोग किए गए जिनमें सौ छात्रों ने हिस्सा लिया. अध्ययन में पता चला कि जब कटलरी का वजन उम्मीद के मुताबिक़ होता है, तो इसका खाने के स्वाद पर असर पड़ता है.

इसे इस उदाहरण से समझ सकते हैं कि परंपरागत रूप से मिठाई परोसने वाले छोटे चम्मच से खाए जाने पर भोजन मीठा लगता है.

खाने के स्वाद में रंगों का अंतर भी एक बड़ा कारक पाया गया है.

काले चम्मच की तुलना में सफ़ेद चम्मच से सफ़ेद दही ज़्यादा मीठा लगता है. इसी तरह जब स्वाद चखने वालों को छुरी, चम्मच, कांटा या टूथपिक से पनीर खाने के लिए दिया गया तो उन्हें छुरी वाला पनीर सबसे अधिक नमकीन लगा.

बहुसंवेदी अनुभव

प्रोफ़ेसर चार्ल्स स्पेंस और डॉक्टर वानिसा हारर ने कहा, ‘‘ भोजन करना एक ऐसा अनुभव है जिसमें हमारी कई इंद्रियाँ इस्तेमाल होती हैं. इसमें खाद्य पदार्थ का स्वाद, खुशबू, वो मुँह में कैसा महसूस होता है और दिखने में कैसा दिखता है, ये सब शामिल हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘खाने को मुँह में रखने से पहले हमारा दिमाग़ इसको लेकर एक राय बनाता है, जो भोजन करने के पूरे अनुभव को प्रभावित करता है.’’

इससे पहले हुए अध्ययनों से पता चलता है कि खाद्य और पेय पदार्थों के बारे में हमारे अनुभव क्रॉकरी की वजह से बदल सकते हैं.

उदाहरण के लिए छोटी प्लेट में परोसे जाने पर लोग कम खाना खाते हैं.

प्रोफ़ेसर स्पेंस कहते है कि दिमाग़ किस तरह भोजन के बारे में हमारा नज़रिया प्रभावित करता है. इस बारे में नए शोध से वज़न घटाने और रेस्त्रां में खाने के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार