मंगल पर जीवन के 'मज़बूत साक्ष्य'

  • 19 जुलाई 2013

अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के 'क्यूरियोसिटी रोवर' को मंगल पर गए करीब एक साल हो चुके हैं.

इस दौरान क्यूरियोसिटी रोवर ने जो तथ्य इकट्ठे किए हैं उनसे पता चलता है कि यह लाल ग्रह चार अरब साल पहले जीवन योग्य रहा होगा.

साइंस जर्नल में प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार मंगल ग्रह के वायुमंडल के विस्तृत अध्ययन से पता चला है कि चार अरब साल पहले मंगल ग्रह का वायुमंडल पृथ्वी से ज़्यादा अलग नहीं था.

देखिए मंगल की तस्वीरें

उस समय मंगल का वायुमंडल काफ़ी सघन हुआ करता था. इन नए नतीजों से इस बात को बल मिलता है कि उस समय इस ग्रह की सतह गर्म और शुष्क रही होगी और यहाँ पानी भी मौजूद रहा होगा. हालाँकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मंगल पर कभी भी किसी प्रकार का जीवन था या नहीं

ओपेन यूनिवर्सिटी की डॉक्टर मोनिका ग्रैडी कहती हैं, “इस अध्ययन से पहली बार यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि मंगल ग्रह पर जल और वायुमंडल की कितनी क्षति हुई होगी, उस समय मंगल का वायुमंडल कैसा रहा होगा और क्या उस समय मंगल ग्रह पर जीवन संभव रहा होगा.”

पूरी संभावना है कि समय का साथ मंगल ग्रह का चुम्बकीय क्षेत्र और वायुमंडल नष्ट हो गया और यह ग्रह एक सूखे निर्जन ग्रह में बदल गया.

क्यूरियोसिटी रोवर

क्यूरियोसिटी रोवर रोबोट पिछले साल 6 अगस्त को मंगल पर उतरा था.

26 नवंबर 2011 को इस यान को अंतरिक्ष से छोड़ा गया था और क़रीब 24 हज़ार करोड़ मील की दूरी तय कर यह यान मंगल पर उतरा था.

परमाणु ईधन से चलने वाले इस 'क्यूरियोसिटी रोवर' अभियान की लागत है क़रीब 2.5 अरब डॉलर.

इस अभियान के तहत नासा वैज्ञानिकों ने एक अति उन्नत घूमती फिरती प्रयोगशालाको मंगल ग्रह पर भेजा है.

इस प्रयोगशाला से मिली जानकारी मंगल ग्रह के इतिहास को समझने में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है.

रोवर की यात्रा के तीन चरण हैं, पहला है मंगल ग्रह में प्रवेश , दूसरा नीचे सतह की ओर आना और तीसरा ज़मीन पर उतरना.

इस मार्स रोवर का वज़न 900 किलो है और यह अपनी क़िस्म के अनोखे कवच में ढँका हुआ है.

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