जिन मोबाइल ऐप्स को कोई नहीं डाउनलोड करता!

Image caption एप्पल का दावा है कि पांच साल में उसके 5 करोड़ से ज़्यादा ऐप डाउनलोड हुए हैं

ऐपल के ऐप स्टोर में ऐसे प्रोग्राम्स की भरमार है जिन्हें कभी किसी ने डाउनलोड नहीं किया. ट्रैकिंग सर्विस एडेवेन के आंकड़ों के अनुसार ऐपल स्टोर में से दो-तिहाई ऐप ऐसे हैं जिन्हें उपभोक्ताओं ने शायद ही कभी इंस्टॉल किया हो.

लेकिन ऐपल का कहना है कि 90% ऐप कम से कम महीने में एक बार डाउनलोड किए जाते हैं. ऐपल स्टोर अपनी पांचवीं सालगिरह मना रहा है. ऐपल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक कहते हैं, "स्टोर ने मूल रूप से दुनिया को बदल दिया है."

हाल ही में हुई कंपनी के डेवलेपर्स की ऐप कांफ्रेंस में कुक ने कहा, "उपभोक्ता खरीदने के अनुभव को आपके बनाए शानदार ऐप्स को चाहते हैं. और अब तक पाँच करोड़ ऐप डाउनलोड किए जा चुके हैं."

लेकिन एडेवेन के अनुसार नौ लाख उत्पादों वाले अमरीकी कंपनी के ऐप स्टोर के चलते बहुत से डेवलपर्स तरसते रहते हैं कि उनके काम पर कोई ध्यान दे.

सबसे आगे

Image caption स्मार्टफ़ोन ऐप्स ने वीडियो गेम उद्योग की चूलें हिला दी हैं

एनेलेटिक्स कंपनी के अनुसार उनके डेटाबेस में मौजूद 8,88,856 में 5,79,001 ऐप्स ऐसे हैं जिन्हें कोई नहीं पूछता. ये ऐसे ऐप्स हैं जो सबसे ज़्यादा डाउनलोड की जाने वाली ऐपल की मुख्य-सूची में कभी शामिल नहीं हुए.

यह सूची तीन लाख से ज़्यादा जगहों पर देखी जाती है. कंपनी कहती है, "हम नहीं कह सकते कि कितने डाउनलोड किए गए हैं, ऐपल कभी इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं करता. वैसे यह बहुत कम हैं."

प्यू रिसर्च सेंटर के इंटरनेट और दैनिक ज़रूरत की चीज़ों के विभाग द्वारा करवाया गया एक सर्वेक्षण भी एडेवेन की रिसर्च का समर्थन करता है. सर्वे के अनुसार 68% स्मार्टफ़ोन इस्तेमाल करने वाले एक हफ़्ते में पांच या उससे कम ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं.

वर्ष 2008 में ऐप स्टोर की शुरूआत के समय इसे तकनीक के इस्तेमाल की दिशा बदलने वाला बताया गया था. इससे प्रभावितो होकर बाद में गूगल, माइक्रोसॉफ़्ट और ब्लैकबेरी ने भी अपने स्टोर शुरू किए.

झुक गया ऐपल

Image caption एप्पल अपने मार्केटप्लेस से होने वाली हर बिक्री पर 30% कमीशन लेता है

ऐपल का कहना है कि वह अब तक अपने ऐप डेवलपर्स को छह ख़रब रुपए से ज़्यादा का भुगतान कर चुका है. यह रकम बाकी तीनों स्टोर्स के कुल जमा भुगतान से तीन गुना ज़्यादा है.

इसे अब 'ऐप अर्थव्यवस्था' कहा जाता है. इसने वीडियो गेम इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है. ईए जैसी कंपनियां अब मुफ़्त में डाउनलोड करने दे रही हैं. यह पावर-अप और ऐड-वन्स जैसे ऐप से पैसा कमा रही हैं. जो अब भी सीधे फ़ीस लेते हैं, वह तुलनात्मक रूप से सस्ते हैं.

ख़ासतौर पर रोविया के एंग्री बर्ड्स की लोकप्रियता ने वीडियो गेम बनाने वालों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि ढाई हज़ार रुपए या इससे ज़्यादा पीसी टाइटल और कंसोल के लिए लेना अब इतिहास की बात हो गई है.

एंग्री बर्ड्स गेम की फ्रैंचाइज़ी और इसके सामान की बिक्री से कंपनी ने करोड़ों रुपये कमाए हैं. फिर भी ऐप डेवलपमेंट भी विवाद रहित नहीं रहा है. ऐपल अपने मार्केटप्लेस से होने वाली हर बिक्री पर 30% कमीशन लेता है.

हाल ही में ऐपल पर एक मामला भारी पड़ गया. हुआ यूं कि बच्चों ने इन-ऐप खरीद लिए और मां-बाप को अनपेक्षित रूप से ज़्यादा बिल मिल गया. इसके बाद ऐपल पर इतना दबाव पड़ा कि उसे लोगों को पैसे वापस करने पड़े.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार