अमरीका में तीन सौ चिम्पांज़ी होंगे रिटायर

  • 25 जुलाई 2013
चिंपांज़ी
Image caption बरसों से चिंपाज़ी मेडिकल रिसर्च का अहम हिस्सा रहे हैं

अमरीका में चिकित्सा क्षेत्र में सबसे ज्यादा आर्थिक मदद मुहैया कराने वाला ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ प्रयोगशाला में होने वाले प्रयोगों में चिम्पांज़ियों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की तैयारी कर रहा है.

हालांकि ये सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि ये चिम्पांज़ी कहां जाएंगे और इससे वैज्ञानिक शोध पर किस तरह का असर पड़ेगा.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के प्रमुख का कहना है कि 300 से ज्यादा चिम्पांज़ियों को रिटायर करने के फैसले से वैज्ञानिक शोध को 'करुणामयी दौर' में दाखिल होने में मदद मिलेगी.

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डॉ. फ्रांसिस कॉलिंस का कहना है कि इंसानों से सबसे नजदीकी रिश्तेदार चिम्पांज़ी 'विशेष सम्मान के हकदार हैं'.

वो कहते हैं, “ये अदभुत जीव पहले ही हमें बहुत कुछ सिखा चुके हैं.”

'विवादास्पद फैसला'

वैसे कुछ समय से जैव चिकित्सीय अनुसंधानों में चिम्पांज़ियों का इस्तेमाल घट रहा है, लेकिन उनका इस्तेमाल बंद करने के एनआईएच के फैसले को वन्यजीव प्रेमी 'बड़ा फैसला' मान रहे हैं.

'ह्यूमन सोसाइटी' नाम की संस्था के लिए काम करने वाली कैथलीन कोनली कहती हैं कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान एनआईएच ने अपने प्रयोगों में शायद ही किसी चिम्पांज़ी का इस्तेमाल किया हो.

एनआईएच पशु शोध पर एक साल में 32 अरब डॉलर खर्च करता है लेकिन इसमें से एक प्रतिशत ही चिम्पांज़ियों वाले शोध पर खर्च होता है.

लेकिन इयोवा यूनिवर्सिटी में हेल्थ एंड ह्यूमन फिलोस्फी विभाग में प्रोफेसर केविन क्रेगेल कहते हैं कि वैज्ञानिक हल्कों में एनआईएच के फैसले को ‘एक हद तक विवादास्पद’ माना जा रहा है.

वो कहते हैं, "अब इस बात को शोध के क्षेत्र में महसूस किया जा रहा है कि चिम्पांज़ियों का इस्तेमाल कम होगा, लेकिन अब भी शोध के कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां चिम्पांज़ियों की जरूरत है.”

वो कहते हैं कि टीके विकसित करना एक ऐसा ही क्षेत्र है. खास कर हेपेटाइटिस सी का टीका तैयार करने के लिए चिम्पांज़ियों की अब भी जरूरत है.

क्या हैं विकल्प

लेकिन वन्य जीव प्रेमियों का कहना है कि इस तरह के क्षेत्रों में चिम्पांज़ियों के विकल्प मौजूद हैं.

Image caption चिंपाज़ी इंसान के सबसे करीबी रिश्तेदार माने जाते हैं

कोनली का कहना है, “चिम्पांज़ियों को इस्तेमाल किए बिना दवाओं के परीक्षण करने और इलाज को जांचने के और भी ढेरों तरीके हैं.” उनका कहना है कि इंसानी ऊत्तकों पर इन्हें आजमाया जा सकता है."

क्रेगेल शोध के लिए मानवीय कोशिकाओं या चूहों वाले विकल्प से सहमत हैं, लेकिन उनके अनुसार पूरे शरीर पर जटिल असर डालने वाले वायरसों का अध्ययन करते समय सिर्फ कुछ कोशिकाओं या चूहों से काम नहीं चलेगा.

अपने हालिया फैसले में एनआईएच ने कहा है कि वो फिलहाल 50 चिम्पांज़ियों को अपने साथ बनाए रखेगा. पांच साल बाद चिम्पांज़ियों का इस्तेमाल रोकने की नीति की समीक्षा के बाद इन चिम्पांज़ियों को भी रिटायर किया जा सकता है.

अमरीकी कांग्रेस ने 2000 में 'चिंप एक्ट' पास किया था जिसके अनुसार रिसर्च के क्षेत्र से रिटायर होने वाले चिम्पांज़ियों की देखभाल के लिए तीन करोड़ डॉलर की रकम निर्धारित की गई थी.

लेकिन अब दस साल बाद इसमें सिर्फ 10 लाख डॉलर ही बचे हैं और अमरीका संसद को इन चिम्पांज़ियों के लिए और रकम आबंटित करनी होगी.

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