फेफड़े के कैंसर का रहस्य सुलझाएंगे ब्रितानी वैज्ञानिक

  • 31 जुलाई 2013

ब्रितानी वैज्ञानिक फेफड़े के कैंसर से पीड़ित 850 लोगों के ट्यूमर का अध्ययन करेंगे ताकि इस प्राणघातक बीमारी के बारे में ज़्यादा जानकारी हासिल हो सके.

ब्रिटेन में कैंसर में होने वाली मौतों में सबसे ज़्यादा मौंतें फेफड़े के कैंसर से होती है. ब्रिटेन के छह केंद्रों में होने वाले इस शोध के लिए एक करोड़ चालीस लाख पाउंड की लागत आएगी.

इस शोध में यह पता किया जाएगा कि कैंसर पीड़ित पर उपचार का असर होना क्यों बंद हो जाता है.

इस अध्ययन में यह भी पता लगाया जाएगा कि पिछले नौ सालों के दौरान फेफड़े का कैंसर किस तरह विकसित हुआ और फैला.

इंग्लैंड में हर साल फेफड़े के कैंसर के 42,000 नए मामले सामने आते हैं और इनमें से 35,000 की मौत हो जाती है.

पिछले पाँच सालों में फेफड़े के कैंसर से पीड़ित सिर्फ़ 9 प्रतिशत मरीजों की ही जान बचाई जा सकी है.

बेहतर समझ

इस शोध समूह से जु़ड़े प्रमुख शोधकर्ता और लंदन रिसर्च इंस्टीट्यूट एवं यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में प्रोफेसर चार्ली स्वॉनटन कहते हैं कि फेफड़े के कैंसर का इलाज करना हमेशा से बहुत मुश्किल रहा है लेकिन अब यह स्थिति बदलेगी.

Image caption इस शोध के तहत फेफड़े के कैंसर से पीड़ित 850 लोगों के ट्यूमर का अध्ययन किया जाएगा.

प्रोफेसर स्वॉनटम ने बीबीसी से कहा, “हमें पूरी उम्मीद है कि इस शोध से हम यह समझ पाएँगे कि 'नॉन-स्मॉल-सेल'-कैंसर किस तरह बदलता है और यह किस तरह अपने को परिस्थिति के अनुकूल ढाल लेता है. ”

ब्रिटेन के कैंसर शोध संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ हरपाल कुमार ने कहा कि अन्य प्रकार के कैंसर के मुकाबले फेफड़े के कैंसर के अध्ययन के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं रही है. आमतौर पर कैंसर के मरीज़ों में इस बीमारी का काफी देर से पता चलता है.

डॉ कुमार ने कहा कि यह एक मिथक है कि फेफड़े का कैंसर केवल धूम्रपान करने वालों को होता है, क्योंकि ऐसे हर दस मे से दो मरीज़ ऐसे होते हैं जो धूम्रपान नहीं करने वाले होते हैं.

उनका कहना है,“हमें धूम्रपान से अपना ध्यान नहीं हटाना चाहिए क्योंकि हम जानते हैं कि न केवल फेफड़े के कैंसर बल्कि किसी भी प्रकार के कैंसर से होनी वाली कुल मौतों में एक चौथाई मौतें धूम्रपान के चलते होती हैं.”

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