कृत्रिम कान बनाने में कामयाबी

  • 1 अगस्त 2013
Image caption अमरीकी शोधकर्ताओं को कृत्रिम कान बनाने में कामयाबी मिली

अमरीकी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वे मरीज की कोशिकाओं की मदद से पूरा का पूरा मानव कान बनाने के करीब पहुंच गए हैं.

कोशिका इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नए शोधों के तहत अब इंसान या जानवरों की कोशिकाओं से मानव कान बनाना संभव होगा.

बॉस्टन के मैसाच्यूसेट्स जनरल हॉस्पीटल के शोधकर्ताओं के मुताबिक कृत्रिम तौर पर बना कान पूरी तरह से वास्तविक कान जैसा ही होगा.

इस तकनीक के ज़रिए एक दिन उन लोगों की मदद की जा सकेगी जिनके या तो कान नहीं हैं या फिर कान ख़राब हो चुके हैं.

कोशिका इंजीनियरिंग चिकित्सा विज्ञान का तेज़ी से उभरता क्षेत्र है जिसके तहत प्रयोगशालाओं में इंसानी अंगों को विकसित करने की कोशिश की जा रही है.

(मानव क्लोनिंग की ओर बढ़ते कदम)

उम्मीद की रोशनी

अमरीकी शोधकर्ताओं की टीम अगर कृत्रिम कान को आम प्रयोग में लाने में कामयाब हो जाती है तो इससे निश्चित तौर पर उन लोगों को काफी मदद मिलेगी जो किसी दुर्घटना में अपने कान गंवा चुके हैं या जन्म से कान की अपंगता के शिकार हैं.

इससे पहले शोधकर्ताओं ने बेबी साइज के कृत्रिम कान बनाने में कामयाबी हासिल की थी.

बहरहाल ये नया शोध जर्नल ऑफ़ द रॉयल सोसायटी इंटरफेस में प्रकाशित हुआ है, जिसमें बताया गया है कि गाय और भेड़ की कोशिकाओं से वे त्रि आयामी वास्तविक इंसानी कान बनाने में कामयाबी मिली है.

(लैब में ही बन गई थी किडनी)

वास्तविक होगा कान

इस कान को विकसित करने के बाद उसे चूहे में लगाया गया है.

इस शोध अध्ययन दल के प्रमुख डॉक्टर थॉमस केरवांट्स ने बीबीसी न्यूज़ को बताया, “हमने चूहे के मॉडल पर पहली बार पूरी तरह वयस्क कान को प्रदर्शित किया है.”

केरवांट्स के मुताबिक यह प्रयोग कई कारणों से बेहद अहम साबित हुआ है. उन्होंने कहा, “हमने देखा कि कान अपने स्वरूप में बढ़ रहा है जो हमने 12 सप्ताह पहले चूहे में लगाया था. दूसरी अहम बात ये है कि कान में प्राकृतिक तौर पर लचीलापन भी देखने को मिल रहा है.”

दरअसल इस प्रयोग के दौरान कोशिकाओं को टाइटेनियम से बने कान की बनावट वाले बॉक्स में विकसित किया गया है.

(कृत्रिम आंख की रोशनी)

पांच साल का इंतज़ार

इस प्रयोग में सैद्धांतिक तौर पर ये भी स्पष्ट हुआ है कि कोशिकाओं को पूरी तरह से इंसानी कान के तौर पर विकसित किया जा सकता है.

डॉक्टर कारवेंट्स कहते हैं, “क्लिनिकल प्रयोग में हम मरीज़ की कुछ लचीली हड्डी को लेकर उसे इस तरह से विकसित करेंगे कि कान तैयार हो जाए. यह अनुसंधान कोशिका इंजीनियरिंग के ज़रिए कान बनाने की दिशा में अहम क़दम साबित हुआ है.”

शोध दल के मुखिया डॉक्टर कारवेंट्स ने उम्मीद जताई है कि इस प्रयोग की मदद से आने वाले पाँच सालों में मानव का कान बनाना संभव होगा.

मानवों के दूसरे अंगों के लिए बायो इंजीनियरिंग के दूसरे प्रयोग भी तेज़ी से किए जा रहे हैं.

करीब एक दर्जन मरीजों में कृत्रिम गले की पाइप का प्रतिरोपण किया गया है जबकि प्रयोगशाला में किडनी को भी विकसित किया जा रहा है. एक चूहे में विकसित हो रही किडनी में मूत्र का बनना भी शुरू हो गया है.

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